महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सांगली ज़िले के इस्लामपुर का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर “ईश्वरपुर” (Ishwarpur) कर दिया है। 3 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने केंद्र की मंज़ूरी और Survey of India की स्वीकृति मिलने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इसके साथ ही इस्लामपुर नगर परिषद का नाम भी बदलकर अब “उरुण-ईश्वरपुर नगर परिषद” कर दिया गया है। रेलवे, डाक विभाग, राजस्व और सभी सरकारी रिकॉर्ड्स में नए नाम को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
कैसे शुरू हुई ईश्वरपुर की मांग?
यह बदलाव अचानक नहीं आया—स्थानीय जनता और नेताओं की वर्षों पुरानी माँग अब पूरी हुई है।18 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र विधानसभा ने इस नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था।अक्टूबर 2025 में Survey of India ने इसे औपचारिक मंज़ूरी दी।और नवंबर में, गृह मंत्रालय (Home Ministry) की अंतिम स्वीकृति के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई। स्थानीय BJP नेता गोपीचंद पडालकर और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने इस परिवर्तन के लिए लगातार पैरवी की थी।
जनता की प्रतिक्रिया — जश्न और बहस दोनों
नए नाम की घोषणा के साथ ही ईश्वरपुर में माहौल उत्सव जैसा रहा—सड़कों पर मिठाई बंटी, पटाखे फूटे, और लोगों ने “ईश्वरपुर हमारा गौरव” जैसे नारे लगाए।
- समर्थकों का कहना है : “यह बदलाव सिर्फ नाम नहीं, हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान की वापसी है।”
- विरोधियों का तर्क : “हमने सड़क, पानी और विकास के लिए आवाज़ उठाई थी—नाम बदलने से क्या बदलेगा?”
इस तरह यह फैसला गौरव बनाम विकास की बहस को और गहराई दे गया है।

महाराष्ट्र में नाम बदलने की लहर
ईश्वरपुर का यह फैसला महाराष्ट्र में चल रही नाम-परिवर्तन श्रृंखला का नया अध्याय है। पहले ही औरंगाबाद को छत्रपति संभाजीनगर,उस्मानाबाद को धराशिव,अहमदनगर को अहिल्यानगर नाम दिया जा चुका है।राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव “जनभावनाओं और सांस्कृतिक चेतना” का प्रतीक है।
राजनीति और चुनावी समीकरणों से जुड़ा कदम?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला स्थानीय स्वशासन चुनावों के ठीक पहले जनता के भावनात्मक जुड़ाव को साधने की रणनीति भी हो सकता है। हालाँकि सरकार ने स्पष्ट कहा है— “यह निर्णय किसी राजनीति का नहीं, बल्कि जनता की इच्छा और संस्कृति के सम्मान का है।”
नया नाम, नया अध्याय — Ishwarpur की कहानी शुरू
ईश्वरपुर के इस नाम परिवर्तन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है— क्या नाम बदलने से पहचान बदल जाती है, या असली बदलाव विकास और समानता से आता है? फिलहाल, इस ऐतिहासिक कदम ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ईश्वरपुर अब सिर्फ एक नाम नहीं—यह महाराष्ट्र की नई सांस्कृतिक कहानी का प्रतीक बन गया है।