भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। अंडमान सागर की गहराइयों में प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार मिलने की पुष्टि हुई है, जिसे देश की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने वाला कदम माना जा रहा है। यह खोज सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने की और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे “ऊर्जा के अवसरों का महासागर” बताया।
खोज का स्थान और प्रक्रिया
गैस भंडार ‘श्री विजयपुरम-2’ कुएं में मिला है, जो अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से सिर्फ 17 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। ड्रिलिंग के दौरान समुद्र की सतह से 295 मीटर नीचे पानी में काम किया गया। 2,212 से 2,250 मीटर की गहराई में गैस के पुख्ता सबूत मिले, और Intermittent Flaring (गैस की लपटें) भी देखी गई। इसके बाद नमूनों को काकीनाडा में जांच के लिए भेजा गया, जहां पाया गया कि गैस में 87% मीथेन मौजूद है। यह उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा का प्रतीक है और विशेषज्ञ इसे “जैकपॉट” कह रहे हैं।

क्यों है यह खोज ऐतिहासिक?
1. आयात पर निर्भरता कम होगी : भारत अपनी गैस की लगभग 50% और कच्चे तेल की 90% जरूरत आयात करता है। अंडमान में मिली यह गैस आयात बिल घटाने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकती है।
2. ‘समुद्र मंथन’ मिशन की बड़ी सफलता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘राष्ट्रीय डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ (समुद्र मंथन) का यह पहला बड़ा नतीजा है। इसका लक्ष्य गहरे समुद्र में छिपे तेल और गैस संसाधनों को खोजकर भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
3. आर्थिक और औद्योगिक लाभ : घरेलू उद्योगों को सस्ती और स्थायी ऊर्जा मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
4. भूगर्भीय महत्व : मंत्री पुरी ने कहा कि यह खोज प्रमाण है कि अंडमान बेसिन हाइड्रोकार्बन से समृद्ध है, जैसे म्यांमार से इंडोनेशिया तक फैला भूगर्भीय क्षेत्र।
भारत की वर्तमान ऊर्जा स्थिति
भारत की प्राकृतिक गैस खपत लगातार बढ़ रही है। 2024–25 के आंकड़ों के अनुसार, देश को लगभग 150 BCM (बिलियन क्यूबिक मीटर) गैस की जरूरत थी, जिसमें से आधा आयातित है। पेट्रोलियम और गैस आयात पर भारत हर साल 80–90 अरब डॉलर खर्च करता है। इस खोज के बाद देश को लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और खर्च में कमी का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह भंडार व्यावसायिक रूप से लाभकारी साबित होता है, तो भारत डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्थिति मजबूत करेगा।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
दुनिया भर में ऊर्जा संसाधनों की प्रतिस्पर्धा तेज है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद गैस की कीमतों में उछाल और आपूर्ति संकट ने घरेलू उत्पादन की आवश्यकता बढ़ा दी है। अंडमान खोज के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है और आयात पर निर्भरता घटा सकता है।
आगे की राह
हालांकि, भंडार का वास्तविक आकार और व्यावसायिक निकालने की संभावना का मूल्यांकन अभी बाकी है। आने वाले महीनों में फिजिबिलिटी स्टडी और विस्तृत परीक्षण होंगे। यदि सब ठीक रहा, तो यह खोज आने वाले दशकों तक भारत की ऊर्जा नीति और आर्थिक रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
अंडमान सागर की गहराइयों से निकली यह प्राकृतिक गैस भारत के लिए सिर्फ एक ऊर्जा संसाधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रतीक है। यह खोज भारत को ऊर्जा स्वतंत्रता की नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है और देश को आयात-आधारित मॉडल से घरेलू ऊर्जा पर निर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ाने में मदद करेगी।