सोमवार शाम के करीब 6:30-7:00 बजे, दिल्ली के Red Fort Metro Station गेट नंबर 1 के समीप एक खड़ी कार में जोरदार विस्फोट हुआ।धमाके की आवाज इतनी तीव्र थी कि आसपास का इलाका दहल गया—रिपोर्ट्स के अनुसार धमाके के बाद तीन-चार अन्य वाहन भी आग की चपेट में आ गए।
जान-माल की हानि और मौजूदा हालत
घटना में कम-से-कम 10 लोगों की मौत और 24 अन्य घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें प्रमुख रूप से लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया।फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर जुटीं—7 से ज्यादा दमकल गाड़ियाँ भेजी गईं और आसपास का इलाका तुरंत घेर लिया गया। बताया गया है कि कई घायलों की हालत गंभीर है और मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है।
जांच की दिशा और उठ रहे सवाल
अब तक विस्फोट की सटीक वजह खुलकर सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को अतिसंवेदनशील माना है और “आतंकी साजिश” की संभावना भी खंगाली जा रही है।

सवाल खड़े हैं: दिल्ली जैसा संवेदनशील इलाका कैसे अचानक इतनी बड़ी सुरक्षा चूक का शिकार हुआ? क्या हाल ही में पकड़ी गई 2,900 किलो विस्फोटक की खेप और टेरर मॉड्यूल से इसका संबंध हो सकता है?
राजधानी की रक्षा, सवालों के घेरे में
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ हाई-अलर्ट लगाना पर्याप्त नहीं—पूरी तंत्र को एक्टिव-मॉनिटरिंग और तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होना होगा। जहां नागरिकों को असुरक्षित माना गया, वहीं प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है—क्या वे इस तरह की घटना के बाद अपनी तैयारियों को भावी खतरों से मुकाबला करने योग्य बनायेंगे?
आखिरकार, जब राजधानी की सड़कों पर आत्मनिर्भर सुरक्षा भी सवालों के घेरे में आ जाए—तो सिर्फ जवाब नहीं, कार्रवाई की आवश्यकता बढ़ जाती है।