गाज़ा एक बार फिर खून और राख के बीच जूझ रहा है। इज़राइल और हमास के बीच दो साल से जारी संघर्ष ने अब एक भयावह मोड़ ले लिया है। गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को जारी ताज़ा रिपोर्ट में बताया कि इस युद्ध में अब तक 69,169 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 170,685 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़े न सिर्फ मौतों की संख्या बताते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि गाज़ा का हर कोना युद्ध के जख्मों से भरा है।
कैसे शुरू हुआ यह संघर्ष
यह हिंसक अध्याय 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था, जब हमास ने दक्षिणी इज़राइल पर अचानक हमला किया। इसके जवाब में इज़राइल ने गाज़ा पट्टी में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान छेड़ दिया। तब से लेकर आज तक बमबारी, हवाई हमले और ज़मीनी कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रहे। गाज़ा की तंग गलियों और बस्तियों में अब सिर्फ धूल, मलबा और चीखें हैं। हजारों घर तबाह हो चुके हैं, परिवार बिखर चुके हैं, और लाखों लोग अब भी सुरक्षित जगह की तलाश में हैं।
मानवीय संकट की भयावह तस्वीर
- गाज़ा की स्थिति अब एक पूर्ण मानवीय आपदा बन चुकी है।
- अस्पताल खंडहरों में बदल चुके हैं।
- दवाइयों की भारी कमी है।
- पीने का पानी और खाना मिलना मुश्किल हो गया है।
- बिजली आपूर्ति लगभग ठप है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा की अधिकांश आबादी को अब मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है। बच्चे और महिलाएं इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं।
दुनिया भर से आ रही प्रतिक्रियाएं
इस स्थिति ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बयान दिया कि “गाज़ा की स्थिति नैतिक, राजनीतिक और कानूनी रूप से असहनीय हो चुकी है।” फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी इज़राइल से तुरंत युद्धविराम की अपील की है ताकि आम नागरिकों तक मदद पहुंचाई जा सके। दूसरी ओर, कई मानवीय संगठनों ने कहा है कि अगर जल्द ही राहत कार्यों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला, तो हालात “नियंत्रण से बाहर” हो जाएंगे।
कौन हैं इन मौतों में शामिल?
गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये आंकड़े नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर किए बिना जारी किए गए हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की है।
युद्ध का असर सिर्फ जानों पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ रहा है — हजारों बच्चे अब स्कूलों से दूर हैं, मनोवैज्ञानिक रूप से टूट चुके हैं और लगातार विस्फोटों की आवाज़ में बड़े हो रहे हैं।
आगे क्या?
दुनिया अब देख रही है कि क्या इस युद्ध का कोई अंत निकलेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी बेहद नाज़ुक है।
गाज़ा के लोग अब बस एक ही चीज़ चाहते हैं — शांति और सांस लेने की जगह। पर सवाल यह है कि क्या राजनीति और शक्ति की लड़ाई में इन मासूम जिंदगियों की कोई कीमत बची है?