‘Jolly LLB 3’ का ट्रेलर आते ही दर्शकों के बीच चर्चा का माहौल गर्म हो गया है। निर्देशक सुभाष कपूर ने इस बार भी साबित कर दिया है कि उनकी पकड़ न केवल कोर्टरूम ड्रामा पर मजबूत है, बल्कि व्यंग्य और हास्य को गंभीर सामाजिक सच्चाइयों के साथ जोड़ने में भी वह बेमिसाल हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है – दोनों ‘जॉली’ का आमना-सामना। पहली बार फ्रेंचाइज़ी के इतिहास में अरशद वारसी और अक्षय कुमार एक साथ पर्दे पर दिखाई दे रहे हैं, और उनके बीच की बहस, ठहाके और टकराव ही ट्रेलर का असली आकर्षण बनते हैं।
शुरुआती दृश्यों में ही सौरभ शुक्ला जज के रूप में नज़र आते हैं। उनकी एंट्री ट्रेलर को एक अलग ही ऊर्जा देती है। उनकी एक झलक भर से अदालत की कार्यवाही हास्य और कटाक्ष से भर जाती है। यह फ्रेंचाइज़ी हमेशा से ही इस बात के लिए सराही जाती रही है कि यह सिर्फ हंसी-मज़ाक तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर तीखा प्रहार भी करती है। Jolly LLB 3 का ट्रेलर भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है।
Jolly LLB 3 Actors
अभिनय की बात करें तो अरशद वारसी अपने चुटीले, भोले और मासूम जॉली के किरदार को एक बार फिर नई जान देते दिखाई देते हैं। वहीं अक्षय कुमार का तेज़-तर्रार अंदाज़, उनका आत्मविश्वास और उनकी तीखी जुबान उन्हें एक दमदार प्रतिद्वंदी के रूप में पेश करता है। दोनों के बीच की नोक-झोंक और व्यंग्यात्मक संवाद
दर्शकों को खूब भाते हैं। जैसे—“संविधान भी कभी-कभी रिव्यू चाहता है, माई लॉर्ड”—जैसे डायलॉग कानों में गूंजते रहते हैं। इन संवादों से साफ है कि फिल्म केवल कोर्ट की दलीलों तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि व्यवस्था पर गहरी चोट भी करने वाली है।
Jolly LLB 3 के ट्रेलर में यामी गौतम और हुमा कुरैशी की झलक भी देखने को मिलती है। दोनों का स्क्रीन टाइम भले ही कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी से यह संकेत मिल जाता है कि महिला किरदार भी कहानी में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। यह संतुलन फिल्म को और अधिक रोचक बनाता है।
तकनीकी दृष्टि से भी ट्रेलर कसा हुआ है। सिनेमैटोग्राफ़र सरबजोत बरार ने कोर्टरूम की अफरा-तफरी, वकीलों के चेहरे के भाव और अदालत की बारीकियों को बेहद प्रभावशाली तरीके से कैमरे में कैद किया है। कैमरे के क्लोज़-अप और स्लो-ज़ूम दर्शकों को सीधे कहानी में खींच लेते हैं। बैकग्राउंड म्यूज़िक ऊर्जावान है और फिल्म की गंभीरता को भी ज़ोरदार तरीके से उभारता है। एडिटिंग टाइट है—ट्रेलर न तो कहीं खिंचता है और न ही प्लॉट के रहस्यों को ज़्यादा उजागर करता है।
बस इतना ही दिखाता है कि दोनों जॉली की लड़ाई केवल एक केस तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि यह न्याय व्यवस्था की जड़ों तक पहुंचेगी।
आख़िरी हिस्से में ट्रेलर अचानक गंभीर हो जाता है। भीड़ में खड़े आम मुवक्किल का टूटता हौसला, कोर्ट परिसर के बाहर जलता दिया और अरशद वारसी की गूंजती आवाज़—“कानून अंधा हो सकता है, पर वकील नहीं”—दर्शकों के दिलो-दिमाग पर गहरा असर छोड़ती है। यही मोड़ बताता है कि यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की सोच को झकझोरने वाला सिनेमा भी होगी।
Jolly LLB 3 का निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘Jolly LLB 3’ का ट्रेलर एक मनोरंजक, व्यंग्यात्मक और विचारोत्तेजक अनुभव का वादा करता है। यह हंसाता है, गुदगुदाता है और साथ ही सोचने पर मजबूर करता है। अगर फिल्म ने ट्रेलर की धार और ऊर्जा को बरकरार रखा, तो यह फ्रेंचाइज़ी की अब तक की सबसे दमदार और बहस छेड़ने वाली किस्त साबित हो सकती है।