रिठाला मेट्रो के पास भीषण आग : सिलेंडर विस्फोट से रोहिणी slum बस्ती राख में

रिठाला मेट्रो

शुक्रवार रात को दिल्ली के रिठाला मेट्रो स्टेशन (रोहिणी) के समीप स्थित झुग्गी-बस्ती में गंभीर आग लग गई। दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) को रात 10:56 बजे सूचना मिली थी। घने धुएँ के बीच स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मची और दमकल की लगभग 29 गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं।

घटनास्थल की भयावस्था

तालाबंदी-क्षेत्र की इस झुग्गी बस्ती में रात के अंधेरे में अचानक आग का प्रसार हुआ। स्थिति को और जटिल बना दिया गया जब कई एलपीजी सिलेंडर फटने की सूचना मिली—जिससे आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। बहुत से परिवारों की आशियाने व जरूरी सामान जलकर राख हो गए। एक बच्चा घायल हुआ है और इलाज चल रहा है।

राहत-कार्रवाई

प्रतिक्रिया-टीम ने तुरंत इलाके को घेर लिया। DFS अधिकारियों ने आसपास के लोगों को जल्दी सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया।

“हमने पुलिस से कहा है कि भीड़ को पास न आने दें,” DFS सूत्र ने बताया।

रिठाला मेट्रो

राहत दल अब पुनर्वास एवं माध्यमिक सहायता की तैयारी कर रहे हैं—लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इस तरह की झुग्गी बस्तियों में सुरक्षा मानदंड कितने बनाए गए थे?

बड़ा सवाल: क्या हाई-रिस्क इलाकों की तैयारी पर्याप्त है?

यह घटना हमें दो अहम विषय पर सोचने को मजबूर करती है:

झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में वातानुकूलित खतरे (जैसे गैस सिलेंडर, तंग गलियाँ, निकासी की कमी) कितने प्रबंधित हैं? ऐसी आपदाएँ केवल अग्निशमन सेवा का विषय नहीं, बल्कि सामुदायिक सुरक्षा और लॉक-डाउन-प्रूफ रहने की व्यवस्था हैं। अभी तक ऐसा माना जाता है कि “घटिया बस्तियों” में हादसे हादसों की तरह स्वीकार कर लिए जाते हैं—लेकिन यह आँचर यह साबित करता है कि यह सोच अब पर्याप्त नहीं है।

एक दृश्य या एक अलार्म?

रात में जलते झुग्गियों का दृश्य सिर्फ फोटो नहीं—यह एक रियल-टाइम चेतावनी है। जब तंग-गलियों में सिलेंडर ब्लास्ट जैसी घटना हो सकती है, तो यह सिर्फ इस बस्ती का मसला नहीं—यह नगर प्रशासन, योजना-निर्माताओं व सार्वजनिक सुरक्षा की प्रणाली का परीक्षण है। हमें यह सोचना होगा कि क्या सिर्फ अग्नि-सुरक्षा गाड़ियाँ बढ़ानी पर्याप्त हैं या पहले से तैयारी, निकासी व्यवस्था, गैस-सिलेंडर-सुरक्षा, और जागरूकता जैसी चीजें भी जरूरी हैं।

Read more