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बिहार में माफिया राज का अंत: दूसरे राज्यों से अवैध बालू लाने पर लगेगा 25 गुना जुर्माना, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

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पटना, 5 अप्रैल 2026: बिहार में बालू माफिया और अवैध खनन के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे कठोर निर्णय लिया है। उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की समीक्षा बैठक के बाद एक बड़ा ऐलान किया है। अब यदि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी दूसरे राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश या झारखंड) से बिना वैध अनुमति और चालान के बालू या अन्य खनिज बिहार की सीमा में लाता है, तो उस पर खनिज के मूल मूल्य का 25 गुना जुर्माना वसूला जाएगा।

राजस्व रिकॉर्ड तोड़ने के बाद और सख्ती

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के खनन विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस अवधि में विभाग ने 3592.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 56 करोड़ रुपये अधिक है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल सख्ती और पारदर्शी नीतियों के कारण संभव हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 78 बालू घाटों के सरेंडर होने से सरकार को करीब 600 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ा है।

विजय कुमार सिन्हा
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सरेंडर करने वाली कंपनियों पर ‘ब्लैकलिस्ट’ की तलवार

सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है जिन्होंने घाटे का बहाना बनाकर बीच में ही बालू घाटों का ठेका छोड़ दिया (सरेंडर कर दिया)। विजय सिन्हा ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी कंपनियों को भविष्य में होने वाले किसी भी नए टेंडर (Bidding) में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चाहे वे अपना नाम बदल लें या नई कंपनी बना लें, विभाग की तकनीक उन्हें पहचान कर बाहर का रास्ता दिखाएगी। सरकार का मानना है कि इन कंपनियों ने अवैध खनन के जरिए “शॉर्टकट” कमाई की कोशिश की, लेकिन विभाग की मुस्तैदी ने उनकी दाल नहीं गलने दी।

‘बिहारी योद्धा’ को इनाम और अवैध परिवहन पर नकेल

अवैध खनन को रोकने के लिए ‘जन भागीदारी’ मॉडल को अपनाते हुए सरकार ने “बिहारी योद्धा पुरस्कार” की शुरुआत की है। इसके तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले मुखबिरों को नकद इनाम दिया जा रहा है। हाल ही में विभाग ने 71 मुखबिरों के बैंक खातों में 37 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की है।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

छापेमारी: प्रदेश भर में 50,000 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी की गई है।

भारी जुर्माना: ओवरलोडिंग और बिना लाइसेंस परिवहन करने वाले वाहनों पर 1 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।

पत्थर उद्योग: बालू के साथ-साथ अब सरकार पत्थर खनन के पट्टे (Lease) भी जल्द जारी करने वाली है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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माफिया मुक्त बिहार की ओर कदम

बिहार सरकार की यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सीधे तौर पर उन सिंडिकेट्स को चेतावनी है जो बॉर्डर पार से अवैध तरीके से खनिज लाकर राज्य के राजस्व को चूना लगाते हैं। 25 गुना जुर्माने का प्रावधान न केवल एक आर्थिक दंड है, बल्कि यह अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ने की एक रणनीतिक तैयारी है।

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