Bihar Latest Government Decisions: फाइलेरिया पर ऐतिहासिक सफलता, स्कूलों में नया शिक्षक नियम और भूजल कानून की तैयारी

Bihar Latest Government Decisions

बिहार में पिछले कुछ दिनों के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा और जल प्रबंधन से जुड़े तीन बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) के खिलाफ मिली बड़ी सफलता की हो रही है। इसके अलावा प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी और भूजल संरक्षण के लिए नए कानून पर काम भी राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
आइए जानते हैं कि इन तीनों मामलों में क्या बदला है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।

फाइलेरिया के खिलाफ बिहार की बड़ी उपलब्धि

बिहार ने फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार राज्य के 57 में से 55 Implementation Units ने Transmission Assessment Survey-1 (TAS-1) सफलतापूर्वक पास कर लिया है।

इसके बाद अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों में शिक्षक सुनिश्चित करने Drug Administration (MDA) अभियान को रोकने की अनुमति मिल गई है, क्योंकि वहां संक्रमण का स्तर तय सीमा से नीचे पहुंच चुका है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बिहार के सभी 38 जिले फाइलेरिया प्रभावित रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) और WHO की संयुक्त निगरानी, बेहतर माइक्रोप्लानिंग और Directly Observed Treatment (DOT) रणनीति ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि पूरा बिहार WHO के फाइलेरिया उन्मूलन मानदंड पूरी तरह हासिल कर चुका है। फिलहाल राज्य ने इस दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है।

प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक व्यवस्था होगी और मजबूत

राज्य सरकार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक उपलब्धता सुधारने की दिशा में भी काम कर रही है। नई व्यवस्था के तहत लक्ष्य यह रखा गया है कि छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की तैनाती अधिक संतुलित हो। प्रस्तावित ढांचे में लगभग 30 छात्रों पर एक शिक्षक सुनिश्चित करने और प्रत्येक कक्षा में कम-से-कम एक शिक्षक उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो छोटे बच्चों की पढ़ाई, कक्षा संचालन और सीखने की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है।

भूजल बचाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी

बिहार में लगातार बढ़ती पानी की मांग और कई इलाकों में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार नया Groundwater Regulation Law तैयार कर रही है।
सरकार का उद्देश्य कृषि, उद्योग और शहरी क्षेत्रों में भूजल के उपयोग को संतुलित करना है। प्रस्तावित कानून के जरिए भूजल दोहन पर निगरानी, जल संरक्षण को बढ़ावा और भविष्य की जरूरतों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नियम लागू किए गए तो आने वाले वर्षों में जल संकट की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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इन तीनों फैसलों का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इन तीनों पहल का सीधा संबंध लोगों के दैनिक जीवन से है। फाइलेरिया नियंत्रण में सफलता लाखों लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाने में मदद करेगी। शिक्षा क्षेत्र में शिक्षक व्यवस्था मजबूत होने से सरकारी स्कूलों के छात्रों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिल सकता है। वहीं भूजल संरक्षण से भविष्य में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए राहत मिलने की उम्मीद है।

Apnivani की बात

स्वास्थ्य, शिक्षा और जल संरक्षण—इन तीनों क्षेत्रों में बिहार तेजी से सुधार की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। हालांकि कुछ योजनाएं अभी तैयारी के चरण में हैं, लेकिन फाइलेरिया नियंत्रण में मिली सफलता यह दिखाती है कि लगातार प्रयास और बेहतर निगरानी से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। आने वाले समय में इन नीतियों का प्रभाव जमीन पर कितना दिखता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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बिहार में माफिया राज का अंत: दूसरे राज्यों से अवैध बालू लाने पर लगेगा 25 गुना जुर्माना, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

बिहार

पटना, 5 अप्रैल 2026: बिहार में बालू माफिया और अवैध खनन के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे कठोर निर्णय लिया है। उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की समीक्षा बैठक के बाद एक बड़ा ऐलान किया है। अब यदि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी दूसरे राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश या झारखंड) से बिना वैध अनुमति और चालान के बालू या अन्य खनिज बिहार की सीमा में लाता है, तो उस पर खनिज के मूल मूल्य का 25 गुना जुर्माना वसूला जाएगा।

राजस्व रिकॉर्ड तोड़ने के बाद और सख्ती

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के खनन विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस अवधि में विभाग ने 3592.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 56 करोड़ रुपये अधिक है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल सख्ती और पारदर्शी नीतियों के कारण संभव हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 78 बालू घाटों के सरेंडर होने से सरकार को करीब 600 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ा है।

विजय कुमार सिन्हा
Apni Vani

सरेंडर करने वाली कंपनियों पर ‘ब्लैकलिस्ट’ की तलवार

सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है जिन्होंने घाटे का बहाना बनाकर बीच में ही बालू घाटों का ठेका छोड़ दिया (सरेंडर कर दिया)। विजय सिन्हा ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी कंपनियों को भविष्य में होने वाले किसी भी नए टेंडर (Bidding) में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चाहे वे अपना नाम बदल लें या नई कंपनी बना लें, विभाग की तकनीक उन्हें पहचान कर बाहर का रास्ता दिखाएगी। सरकार का मानना है कि इन कंपनियों ने अवैध खनन के जरिए “शॉर्टकट” कमाई की कोशिश की, लेकिन विभाग की मुस्तैदी ने उनकी दाल नहीं गलने दी।

‘बिहारी योद्धा’ को इनाम और अवैध परिवहन पर नकेल

अवैध खनन को रोकने के लिए ‘जन भागीदारी’ मॉडल को अपनाते हुए सरकार ने “बिहारी योद्धा पुरस्कार” की शुरुआत की है। इसके तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले मुखबिरों को नकद इनाम दिया जा रहा है। हाल ही में विभाग ने 71 मुखबिरों के बैंक खातों में 37 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की है।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

छापेमारी: प्रदेश भर में 50,000 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी की गई है।

भारी जुर्माना: ओवरलोडिंग और बिना लाइसेंस परिवहन करने वाले वाहनों पर 1 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।

पत्थर उद्योग: बालू के साथ-साथ अब सरकार पत्थर खनन के पट्टे (Lease) भी जल्द जारी करने वाली है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विजय कुमार सिन्हा
Apni Vani

माफिया मुक्त बिहार की ओर कदम

बिहार सरकार की यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सीधे तौर पर उन सिंडिकेट्स को चेतावनी है जो बॉर्डर पार से अवैध तरीके से खनिज लाकर राज्य के राजस्व को चूना लगाते हैं। 25 गुना जुर्माने का प्रावधान न केवल एक आर्थिक दंड है, बल्कि यह अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ने की एक रणनीतिक तैयारी है।

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बिहार में अब 21 दिन का इंतज़ार खत्म: सिर्फ 24 घंटे में मिलेगा डेथ सर्टिफिकेट, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

डेथ सर्टिफिकेट

बिहार में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में नीतीश सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को अपने परिजनों की मृत्यु के बाद ‘डेथ सर्टिफिकेट’ (Death Certificate) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही 21 दिनों का लंबा इंतज़ार करना होगा। पंचायती राज विभाग ने एक नया ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत अब आवेदन के मात्र 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

पुराने नियमों में बदलाव: 21 दिन की बाध्यता समाप्त

अब तक की व्यवस्था के अनुसार, मृत्यु की सूचना देने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। नियमानुसार 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य था, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सुस्त सरकारी मशीनरी के कारण लोगों को हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ता था। इस देरी की वजह से मृतक के आश्रितों को बैंक क्लेम, जमीन का नामांतरण (Mutation), और बीमा राशि प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बिहार सरकार की नई नियमावली “बिहार जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2025” ने अब इन सभी बाधाओं को दूर कर दिया है।

डेथ सर्टिफिकेट
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पंचायत स्तर पर ही होगा समाधान: वार्ड सदस्य और सचिव की भूमिका

नई व्यवस्था के तहत, सरकार ने पंचायतों को सीधे तौर पर सशक्त बनाया है। अब मृत्यु की सूचना मिलते ही संबंधित पंचायत सचिव और वार्ड सदस्य की सक्रियता से डेटा को तुरंत डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। सरकार एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जिससे मौके पर ही सत्यापन (Verification) कर डिजिटल सर्टिफिकेट जेनरेट किया जा सकेगा। यह सर्टिफिकेट सीधे आवेदक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाएगा, जिसे कहीं भी कानूनी दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जमीन विवाद और भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

बिहार में भूमि विवादों का एक मुख्य कारण मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली देरी भी रहा है। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने से वंशावली और जमीन के बंटवारे जैसे मामले सालों तक लटके रहते थे। अब 24 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र मिलने से ‘दाखिल-खारिज’ की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने से बिचौलियों और भ्रष्टाचार का खात्मा होगा। पंचायती राज मंत्री के अनुसार, यह व्यवस्था पारदर्शिता लाने और आम आदमी के समय की बचत करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

डेथ सर्टिफिकेट
डेथ सर्टिफिकेट

डिजिटल डेटाबेस और भविष्य की योजनाएं

यह नई व्यवस्था न केवल तात्कालिक राहत देगी, बल्कि बिहार के सेंट्रल डेटाबेस को भी मज़बूत करेगी। हर मृत्यु का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में पुराने रिकॉर्ड खोजने में आसानी होगी। श्मशान घाट और कब्रिस्तानों के पास स्थित वार्ड सदस्यों को इस प्रक्रिया की पहली कड़ी बनाया गया है, ताकि सूचना तंत्र में कोई कमी न रहे।

बिहार सरकार का यह फैसला ‘ई-गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ी जीत है। इससे न केवल आम जनता की परेशानी कम होगी, बल्कि सरकारी सेवाओं में तत्परता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। अगर आप भी बिहार के निवासी हैं, तो अब आपको ब्लॉक या नगर निगम की दौड़ लगाने की ज़रूरत नहीं है—आपकी पंचायत अब आपकी सेवा के लिए 24 घंटे तैयार है।

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बिहार में थमा लाखों पक्के घरों का निर्माण, नीतीश सरकार ने केंद्र से मांगे 3000 करोड़ रुपये; जानें क्या है पूरा मामला

बिहार

बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपना पक्का घर बनाने का सपना देख रहे लाखों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लंबित 3,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। यह मांग ऐसे समय में की गई है जब राज्य में तकनीकी कारणों से करीब 9 लाख से अधिक घरों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

SNA खाते का पेच और फंड में देरी

बिहार विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने स्वीकार किया कि ‘सिंगल नोडल अकाउंट’ (SNA) खोलने में हुई देरी के कारण केंद्र से फंड मिलने में समस्या आ रही है। दरअसल, केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार, अब सभी योजनाओं का पैसा डिजिटल निगरानी के लिए SNA खाते के जरिए ही जारी किया जाना है। बिहार में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से करोड़ों की राशि अटकी हुई है।

बिहार
पक्के घरों

9 लाख से ज्यादा घर अभी भी अधूरे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए बिहार को कुल 12.19 लाख आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें से 12.08 लाख आवासों को स्वीकृति तो दे दी गई है, लेकिन फंड की कमी के कारण

9,16,709 आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

मंत्री ने बताया कि लगभग 72,492 लाभार्थियों को अभी पहली किस्त मिलना बाकी है, जबकि 3.26 लाख से अधिक लोग दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं। बिना अगली किस्त मिले, गरीब परिवारों के लिए छत डालना नामुमकिन हो गया है।

केंद्र से विशेष रियायत की मांग

राज्य सरकार ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है कि जब तक SNA खाता पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक नियमों में ढील देते हुए 31 मार्च, 2026 तक की राशि पुराने माध्यम से ही जारी कर दी जाए। इससे पहले जनवरी 2026 में केंद्र ने इसी तरह की राहत देते हुए 91 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिससे कुछ लाभार्थियों को लाभ मिला था। अब सरकार की कोशिश है कि होली और वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बाकी 3000 करोड़ रुपये भी मिल जाएं

लाभार्थियों पर क्या होगा असर?

अगर केंद्र सरकार यह फंड जारी कर देती है, तो बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। 31 मार्च की समयसीमा के भीतर आवास पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि फंड मिलते ही सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (DBT) के जरिए किस्तों का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि मानसून शुरू होने से पहले लोग अपने नए घरों में प्रवेश कर सकें।

बिहार
PM Modi and Nitish Kumar

प्रमुख बिंदु (Quick Facts):

मांगी गई राशि: 3,000 करोड़ रुपये।

अधूरे आवास: 9,16,709 घर।

रुकी हुई किस्तें: पहली किस्त के लिए 72,492 और दूसरी के लिए 3.26 लाख लाभार्थी लंबित।

डेडलाइन: 31 मार्च 2026 तक फंड वितरण का लक्ष्य।

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Darbhanga Bird Flu News : 10,000 कौओं की मौत के बाद H5N1 की पुष्टि, क्या इंसानों को है खतरा?

Bird Flu

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से गिरते मृत कौओं के रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। जांच रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर H5N1 वायरस (Bird Flu) की पुष्टि हो गई है। प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

Darbhanga Bird Flu

दरभंगा के नगर निगम क्षेत्र (वार्ड नंबर 31) स्थित भिगो श्मशान घाट (मुक्तिधाम) पिछले कुछ दिनों से पक्षियों के कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों ने देखा कि अचानक बड़ी संख्या में कौए पेड़ से गिरकर मर रहे हैं। देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ों से हजारों में पहुंच गई। समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद जब सैंपल भोपाल की लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी—यह खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) था।

मौत का आंकड़ा और प्रशासनिक हलचल

शुरुआती सरकारी आंकड़ों में एक हजार कौओं की मौत की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 पक्षी अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

• मुक्तिधाम परिसर के पास जेसीबी से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया है।

• संक्रमित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया गया है।

• अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पोल्ट्री (मुर्गा-बत्तख) की बिक्री और परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

क्या इंसानों के लिए भी है खतरा?

H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आता है या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरभंगा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं।

बर्ड फ्लू से बचाव के रामबाण उपाय

अगर आप दरभंगा या इसके आस-पास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:

पक्षियों से दूरी: छत, मुंडेर या सड़क पर कोई मृत पक्षी दिखे तो उसे छुएं नहीं। इसकी सूचना तुरंत हेल्पलाइन या पशुपालन विभाग को दें।

चिकन और अंडा: अगर आप मांसाहारी हैं, तो मांस और अंडे को 70°C से ऊपर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। अधपका मांस बिल्कुल न लें।

साफ-सफाई: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। सैनिटाइजर का प्रयोग करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

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पोल्ट्री फार्म से दूरी: फिलहाल कुछ दिनों के लिए पोल्ट्री फार्म या चिड़ियाघर जैसी जगहों पर जाने से बचें।

लक्षणों पर नजर: यदि आपको अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक एक गंभीर चेतावनी है। प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही इस वायरस की चेन को तोड़ने में मदद करेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

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Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

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बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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