आज 26 नवंबर को देशभर में 76वां संविधान दिवस मनाया जा रहा है। सुबह से ही संसद भवन समेत देश के सभी राज्यों, जिलों, स्कूलों और सरकारी संस्थानों में संविधान दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है। आज का दिन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से अपनाया गया था, जिसे लागू होने में 26 जनवरी 1950 का समय लगा। तीन साल से अधिक चर्चा और 11 सत्रों के बाद यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान बना।
संसद भवन में मुख्य कार्यक्रम आज सुबह 11 बजे-
आज का मुख्य राष्ट्रीय समारोह संसद के सेंट्रल हॉल (संविधान सदन) में सुबह 11 बजे से शुरू होगा। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और सांसदों सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।राष्ट्रपति पूरे देश के साथ संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ करवाएँगी। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व पर देश को संबोधित करेंगे।
देशभर में ‘हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान’ थीम की गूंज-
इस वर्ष संविधान दिवस की थीम “हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान” रखी गई है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं।सरकारी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों, पुलिस और सेना के प्रतिष्ठानों में भी आज सुबह से प्रस्तावना पठन, रैलियाँ, क्विज़, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, और निबंध लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में भी विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं।

संविधान के नए भाषाई संस्करणों का विमोचन-
आज समारोह में संविधान के नौ भारतीय भाषाओं—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया—में अनुवादित नए संस्करण जारी किए जाएंगे। साथ ही, “भारत के संविधान में कला और कैलीग्राफी” नामक एक विशेष पुस्तिका का भी लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें संविधान की मूल लिखित प्रति की ऐतिहासिक कला और हस्तलेखन प्रस्तुत किया गया है।
संविधान दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत का संविधान केवल कानूनों की किताब नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। इसमें शामिल मूलभूत अधिकार—स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति की आज़ादी, धर्म की स्वतंत्रता, न्याय, और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार—हर नागरिक की सुरक्षा करते हैं।
•अगर संविधान का दुरुपयोग हो तो क्या परिणाम?
•लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है
•नागरिक अधिकारों का हनन बढ़ सकता है
•क़ानून और न्याय व्यवस्था का संतुलन टूट सकता है
भ्रष्टाचार और शक्तियों का दुरुपयोग बढ़ सकता है
इसलिए आज का दिन हमें याद दिलाता है कि संविधान का सम्मान और सही उपयोग नागरिकों का कर्तव्य है।
विश्व के नजरिए से भारत का संविधान
•विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान
•विश्व भर के संवैधानिक विशेषज्ञ इसे सबसे संतुलित संविधान मानते हैं
•भारत का लोकतंत्र दुनिया में सबसे बड़े और मजबूत लोकतांत्रिक ढाँचे का उदाहरण है
•विश्व के कई देशों ने अपने संविधान निर्माण में भारत के मॉडल का अध्ययन किया
संविधान दिवस का संदेश
• समानता और एकता
•लोकतंत्र में विश्वास
• कानून का सम्मान
• राष्ट्र पहले का संकल्प
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