बिहार चुनाव 2025 के परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां महागठबंधन के भीतर हार के कारणों पर मंथन जारी है, वहीं कांग्रेस पार्टी ने अपनी आंतरिक कलह को खत्म करने के लिए ‘क्लीनिंग ऑपरेशन’ शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उत्तराखंड से आए एक विवादित बयान पर बिहार के स्वाभिमान की लड़ाई छेड़ दी है।
कांग्रेस में बड़ा एक्शन: हार के बाद ‘घर की सफाई’ शुरू
नवंबर 2025 में हुए चुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व बेहद सख्त है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ने अनुशासनहीनता और भितरघात करने वाले नेताओं की लिस्ट तैयार कर बड़ी कार्रवाई की है।
- 43 नेताओं पर गिरी गाज: चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल 43 बड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
- 7 नेता निष्कासित: संतोषजनक जवाब न मिलने पर 7 कद्दावर नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
- अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं: राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में हार का मुख्य कारण पार्टी के भीतर छिपे ‘विभीषण’ थे, जिन्होंने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया।

तेजस्वी यादव का ‘न्यू ईयर संकल्प’: बिहार के स्वाभिमान की रक्षा
नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव सोशल मीडिया पर बेहद आक्रामक नजर आ रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर उत्तराखंड के एक मंत्री के पति हैं, जिन्होंने बिहार की महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है।
“बिहार की आधी आबादी का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा और उनके सहयोगियों के मन में बिहार के प्रति जो जहर भरा है, वह अब जुबान पर आने लगा है।” — तेजस्वी यादव
विवाद क्या है?
हाल ही में उत्तराखंड की एक महिला मंत्री के पति का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने बिहार की महिलाओं के पहनावे और संस्कृति पर अभद्र टिप्पणी की थी। तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को बिहार की अस्मिता से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी चुप्पी तोड़ने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा तेजस्वी का दबदबा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव अब डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जनता से सीधा जुड़ने के लिए कर रहे हैं। ट्विटर (X) और फेसबुक पर उनके वीडियोज को लाखों में व्यूज मिल रहे हैं, जिससे साफ है कि वह अगले चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर चुके हैं।
बिहार में बदलेगा समीकरण?
कांग्रेस की आंतरिक टूट और तेजस्वी का बढ़ता आक्रामक अंदाज यह संकेत दे रहा है कि बिहार में आने वाले कुछ महीने राजनीतिक रूप से काफी गर्म रहने वाले हैं। क्या कांग्रेस इस कार्रवाई के बाद खुद को मजबूत कर पाएगी? और क्या तेजस्वी यादव का ‘बिहार अस्मिता कार्ड’ जनता के दिलों में फिर से जगह बना पाएगा?
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