आज के डिजिटल युग में जहाँ सूचनाएं बिजली की गति से फैलती हैं, वहीं ‘प्राइवेट कंटेंट लीक‘ होना एक भयावह सपना बन गया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई निजी वीडियो वायरल होने की घटनाओं ने ऑनलाइन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आप या आपका कोई जानने वाला इस स्थिति का सामना कर रहा है, तो घबराने के बजाय कानूनी और तकनीकी रास्तों को जानना अनिवार्य है। भारत का संविधान और आईटी कानून आपको अपनी गरिमा वापस पाने का पूर्ण अधिकार देते हैं।
निजता का अधिकार: आपका संवैधानिक कवच
भारत में निजता का अधिकार (Right to Privacy) कोई साधारण अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के ऐतिहासिक पुट्टस्वामी फैसले में इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ का अभिन्न हिस्सा माना है। इसका अर्थ है कि बिना सहमति के आपकी कोई भी निजी जानकारी, फोटो या वीडियो सार्वजनिक करना एक मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर आप कानूनी कार्रवाई की शुरुआत कर सकते हैं।

पहला कदम: डिजिटल साक्ष्य (Evidence) सुरक्षित करें
वीडियो देखते ही सबसे पहली प्रतिक्रिया उसे डिलीट करवाने की होती है, लेकिन कानूनी कार्रवाई के लिए सबूत जरूरी हैं।
• उस पोस्ट या प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट लें जहाँ वीडियो मौजूद है।
• वीडियो का URL (Link) कॉपी करके कहीं सुरक्षित रख लें।
• अपलोड करने वाले व्यक्ति का नाम, हैंडल या प्लेटफॉर्म का विवरण नोट करें।
• घटना की तारीख और समय का रिकॉर्ड रखें। ये सभी जानकारियां एफआईआर दर्ज करवाते समय आपके काम आएंगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट कैसे हटवाएं?
भारत के नए IT नियम 2021 के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे Facebook, Instagram, YouTube) को शिकायत मिलने के 24 से 36 घंटों के भीतर अश्लील या बिना सहमति वाले निजी कंटेंट को हटाना अनिवार्य है।
• Report Option: हर प्लेटफॉर्म पर ‘Report’ बटन होता है। वहां ‘Inappropriate Content’ या ‘Non-Consensual Intimate Content’ विकल्प चुनें।
• StopNCII.org: यह एक वैश्विक टूल है जो आपकी प्राइवेट इमेज या वीडियो का एक ‘डिजिटल हैश’ बनाता है। इसे इस्तेमाल करने से वह कंटेंट फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य पार्टनर प्लेटफॉर्म्स पर अपने आप ब्लॉक हो जाता है।
• Google Search: यदि वीडियो गूगल सर्च में दिख रहा है, तो आप गूगल के ‘Request to Remove Personal Information’ फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।
आईटी एक्ट की धाराएं और कड़ी सजा का प्रावधान
भारतीय कानून में डिजिटल अपराधों के लिए सख्त सजा है:
• IT एक्ट धारा 66E: बिना सहमति के किसी के प्राइवेट अंगों की फोटो/वीडियो लेना या प्रसारित करना अपराध है। इसमें 3 साल की जेल या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
• धारा 67A: इलेक्ट्रॉनिक रूप से अश्लील सामग्री (Sexually Explicit Content) शेयर करने पर पहली बार में 5 साल और दोबारा करने पर 7 साल की जेल हो सकती है।
• IPC धारा 354C (Voyeurism): किसी महिला की निजी गतिविधियों को बिना उसकी जानकारी के कैमरे में कैद करना ‘दृश्यकता’ का अपराध है।

शिकायत कहाँ और कैसे दर्ज करें?
आप घर बैठे भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं:
• CyberCrime.gov.in: भारत सरकार के इस पोर्टल पर ‘Report Women/Child Related Crime’ सेक्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें। आप यहाँ अपनी पहचान गुप्त (Anonymous) रखने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
• Cyber Helpline 1930: किसी भी साइबर धोखाधड़ी या लीक के मामले में तुरंत इस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
• स्थानीय साइबर सेल: अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या जिला साइबर सेल में जाकर लिखित शिकायत दें। यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करे, तो आप वकील के माध्यम से कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
डरें नहीं, डटकर मुकाबला करें
लीक वीडियो के मामलों में अपराधी का मुख्य हथियार ‘डर’ और ‘लोकलाज’ होता है। कानून आपकी सुरक्षा के लिए है। जितनी जल्दी आप रिपोर्ट करेंगे, कंटेंट के फैलने की संभावना उतनी ही कम होगी। याद रखें, आप पीड़ित हैं अपराधी नहीं, इसलिए कानूनी मदद लेने में संकोच न करें।
Aso Read:
Invention of Clock: जानिए आपके घर के घड़ी की 5 सबसे रोचक कहानियां ! समय बताने वाली मशीन का पूरा सफर
AI Voice Scam India: आपकी आवाज़ चुराकर लाखों की ठगी! AI फ्रॉड से बचने के 4 अचूक तरीके
