क्या आप जानते हैं कि भारत में महिलाओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण कौन सा कैंसर है? इसका जवाब है— ‘सर्वाइकल कैंसर’ (Cervical Cancer)। हर साल हज़ारों महिलाएं सही जानकारी न होने के कारण इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ जाती हैं।
लेकिन अब घबराने की नहीं, बल्कि जागरूक होने की ज़रूरत है! सरकार ने देश की बेटियों को इस जानलेवा कैंसर से बचाने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब 9 से 14-15 साल की किशोर लड़कियों को ‘HPV’ का टीका (Vaccine) लगाया जा रहा है, जो भविष्य में उन्हें इस कैंसर से 100% तक सुरक्षित रखेगा। आज ‘ApniVani’ के इस विशेष लेख में हम एकदम आसान भाषा में समझेंगे कि सर्वाइकल कैंसर क्या है, यह क्यों होता है और यह टीका लगवाना क्यों इतना जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर क्या है और क्यों होता है?
आम बोलचाल की भाषा में सर्वाइकल कैंसर को ‘बच्चेदानी के मुंह का कैंसर’ कहा जाता है।
यह कैंसर शरीर के किसी अंदरूनी गड़बड़ी से नहीं, बल्कि एक वायरस के संक्रमण (Infection) से होता है। इस वायरस का नाम है— HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस)। जब यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो यह बच्चेदानी के निचले हिस्से (Cervix) की कोशिकाओं (Cells) को नुकसान पहुंचाता है, जो धीरे-धीरे कई सालों बाद कैंसर का रूप ले लेता है।
कैंसर होने के बाद क्या होता है? (चेतावनी वाले लक्षण)
इस कैंसर की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती सालों में इसका कोई भी लक्षण (Symptom) दिखाई नहीं देता है। महिला को पता ही नहीं चलता कि उसके अंदर कैंसर पल रहा है। लेकिन जब यह बीमारी बढ़ जाती है, तब ये तकलीफें शुरू होती हैं:
- अचानक ब्लीडिंग: पीरियड्स (मासिक धर्म) खत्म होने के बाद भी अचानक ब्लीडिंग होना।
- तेज़ दर्द: कमर के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार तेज़ दर्द रहना।
- कमज़ोरी: अचानक से बहुत ज़्यादा कमज़ोरी महसूस होना और वज़न का तेज़ी से गिरना।
अगर समय पर इसका इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे अंगों में फैलकर जानलेवा बन जाता है।
सरकार का ‘HPV वैक्सीन’ प्लान क्या है?
कैंसर होने के बाद इलाज बहुत महंगा और दर्दनाक होता है। इसीलिए सरकार ने ‘रोकथाम’ (Prevention) का रास्ता चुना है।
- किसे लगेगा टीका – यह टीका मुख्य रूप से 9 साल से लेकर 14-15 साल की लड़कियों को स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से लगाया जा रहा है। भारत सरकार ने इसके लिए ‘Cervavac’ नाम की स्वदेशी वैक्सीन बनाई है।
- इसी उम्र में क्यों – इस वायरस का संक्रमण आमतौर पर शादी के बाद या शारीरिक संबंध बनने के बाद होता है। डॉक्टरों का मानना है कि संक्रमण के खतरे से पहले (यानी बचपन में) ही अगर यह टीका लगा दिया जाए, तो शरीर में इस वायरस से लड़ने की ताकत (एंटीबॉडी) बन जाती है और कैंसर का खतरा लगभग खत्म हो जाता है।

आम जनता और माता-पिता की क्या है जिम्मेदारी?
अक्सर हमारे समाज में महिलाओं की बीमारियों पर खुलकर बात करने में शर्म महसूस की जाती है। इसी झिझक के कारण कई माता-पिता अपनी बेटियों को यह टीका नहीं लगवाते हैं या अफ़वाहों का शिकार हो जाते हैं।
यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है और दुनिया भर के वैज्ञानिक इसे प्रमाणित कर चुके हैं। अगर आपके घर में या आस-पड़ोस में 9 से 15 साल की बच्चियां हैं, तो अपने नज़दीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर इस HPV टीके के बारे में जानकारी जरूर लें।
ApniVani की बात
सर्वाइकल कैंसर जैसी भयानक बीमारी को हराने का एकमात्र तरीका ‘सही समय पर सही टीका’ है। सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब हम जागरूक होंगे। अपनी बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस अभियान का हिस्सा ज़रूर बनें।
आपकी राय: क्या आपको इससे पहले इस ‘HPV वैक्सीन’ के बारे में जानकारी थी? महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार को और क्या कदम उठाने चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट्स या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर बताएं!
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी के इलाज या वैक्सीन के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
