CBSE 3rd Language Mandatory: कक्षा 6 से तीसरी भाषा हुई अनिवार्य! जानें CBSE के 7 दिन वाले आदेश की 4 बड़ी बातें

अगर आपके घर में भी कोई बच्चा कक्षा 6 (Class 6) में पढ़ता है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो सीधे तौर पर बच्चों के सिलेबस और पढ़ाई को बदलने वाला है।

हाल ही में (9 अप्रैल 2026 को) CBSE ने एक सख्त सर्कुलर जारी किया है। इसके मुताबिक, अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के सभी छात्रों के लिए ‘तीसरी भाषा’ (Third Language) की पढ़ाई अनिवार्य (Mandatory) कर दी गई है। बोर्ड ने इसे लागू करने के लिए स्कूलों को सिर्फ 7 दिन का समय दिया है। आइए इस नए और कड़े नियम से जुड़ी 4 सबसे महत्वपूर्ण बातें विस्तार से समझते हैं।

7 दिन का सख्त अल्टीमेटम और CBSE की चेतावनी

यह कोई साधारण गाइडलाइन नहीं है, बल्कि एक सख्त आदेश है। CBSE ने अपने सर्कुलर (Acad-17/2026) में सभी संबद्ध (Affiliated) स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उन्हें 7 दिनों के भीतर तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करवानी होगी।

इतना ही नहीं, स्कूलों को अपनी चुनी हुई तीसरी भाषा की पूरी डिटेल CBSE के OASIS पोर्टल पर तुरंत अपडेट करनी होगी। बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Offices) इस आदेश की निगरानी करेंगे, इसलिए इसमें किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्या है ‘3-लैंग्वेज फॉर्मूला’ (R1, R2, R3)?

पहले बच्चे आमतौर पर सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी पढ़ा करते थे। लेकिन अब ‘नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क’ (NCFSE 2023) के तहत छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी।

  • R1 (पहली भाषा): यह आमतौर पर क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा होगी (जैसे हिंदी, तमिल, बंगाली आदि)।
  • R2 (दूसरी भाषा): यह पहली भाषा से अलग होनी चाहिए।
  • R3 (तीसरी भाषा): यह वह नई भाषा है जिसे कक्षा 6 से अनिवार्य किया गया है।

सबसे अहम नियम: इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं ‘भारतीय’ (Indian) होनी चाहिए। इस नई नीति के तहत ‘अंग्रेजी’ (English) को अब एक विदेशी भाषा (Foreign Language) माना जाएगा।

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बिना किताबों के कैसे होगी पढ़ाई?

चूंकि यह फैसला अचानक लागू किया गया है, इसलिए बहुत से स्कूलों और अभिभावकों के मन में सवाल है कि जब किताबें ही नहीं हैं, तो पढ़ाई कैसे होगी?

CBSE ने इसका भी समाधान दिया है। बोर्ड ने कहा है कि जब तक आधिकारिक पाठ्यपुस्तकें (Textbooks) छपकर नहीं आ जातीं, तब तक स्कूल ‘स्थानीय स्तर पर उपलब्ध’ (Locally Available) किताबों और स्टडी मटेरियल का इस्तेमाल कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, कक्षा 6 के लिए 9 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में सिलेबस तैयार किया जा रहा है, जो जल्द ही उपलब्ध होगा।

2031 की बोर्ड परीक्षा (10th Board) पर सीधा असर

इस बदलाव का असर सिर्फ कक्षा 6 तक सीमित नहीं रहेगा। जो तीसरी भाषा (R3) छात्र कक्षा 6 में चुनेंगे, वही भाषा उन्हें आगे कक्षा 7, 8, 9 और 10 में भी पढ़नी होगी।

इसका सबसे बड़ा असर 5 साल बाद यानी वर्ष 2031 की बोर्ड परीक्षाओं में देखने को मिलेगा। 2031 में 10वीं कक्षा का बोर्ड एग्जाम देने वाले छात्रों को इस तीसरी भाषा की परीक्षा भी देनी होगी और इसमें पास होना भी अनिवार्य होगा।

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ApniVani की बात

CBSE का यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और छात्रों को बहुभाषी (Multilingual) बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक प्रयास है। हालांकि, अचानक मिले इस 7 दिन के अल्टीमेटम ने स्कूल प्रबंधन के लिए सिलेबस और नए भाषा शिक्षकों (Teachers) की व्यवस्था करने की एक बड़ी चुनौती जरूर खड़ी कर दी है। अब देखना यह है कि स्कूल इतनी जल्दी इस नए नियम को कैसे लागू कर पाते हैं।

आपकी राय: CBSE द्वारा कक्षा 6 से तीसरी भाषा अनिवार्य करने के इस फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इससे बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ेगा या यह उनके भविष्य के लिए फायदेमंद है? अपनी बेबाक राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!

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