आज के टाइम में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन गया है कि इसके बिना एक दिन गुजारना भी मुश्किल लगता है। सुबह उठने के अलार्म से लेकर रात को सोने से पहले न्यूज़ पढ़ने तक, सब कुछ इसी पर होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस फोन को आज हम अपनी जेब में लेकर घूमते हैं, उसकी शुरुआत कैसे हुई थी? आज Apni Vani की इस खास रिपोर्ट में हम आपको मोबाइल फोन के इतिहास की उस मजेदार और रोमांचक दुनिया में लेकर जा रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
आखिर कैसे और क्यों बना पहला मोबाइल फोन?
आजकल के स्मार्टफोन्स में हम सबसे पहले यह देखते हैं कि उसका प्रोसेसर कौन सा है और बैटरी कैपेसिटी कितनी तगड़ी है, जैसे कि किसी धांसू OnePlus Nord CE 5 जैसे मॉडल में हम एक-एक स्पेक्स बारीकी से चेक करते हैं। लेकिन 1970 के दशक में लोग सिर्फ इतना चाहते थे कि बात करते समय उन्हें तारों में उलझना न पड़े। पहले जो फोन कारों में लगे होते थे, वे बहुत भारी होते थे। इंसान चलते-फिरते आराम से बात कर सके, इसी सोच ने दुनिया के पहले मोबाइल फोन को जन्म दिया।
3 अप्रैल 1973 को मोटोरोला कंपनी के एक इंजीनियर मार्टिन कूपर ने न्यूयॉर्क की सड़क पर चलते हुए दुनिया की पहली मोबाइल कॉल की थी। मजे की बात यह है कि उन्होंने यह ऐतिहासिक कॉल अपनी सीधा टक्कर देने वाली कंपनी के एक इंजीनियर को चिढ़ाने के लिए की थी!
पहला बिकने वाला फोन और उसकी कीमत कर देगी हैरान
मार्टिन कूपर ने जो फोन बनाया था, वह किसी ईंट से कम नहीं था। उसका वजन 1 किलो से भी ज्यादा था। इस पहली कॉल के पूरे 10 साल बाद, 1983 में आम जनता के लिए दुनिया का पहला मोबाइल फोन बाजार में आया, जिसका नाम ‘मोटोरोला डायनाटैक 8000X’ था। भारी होने की वजह से लोग इसे प्यार से ‘द ब्रिक’ (ईंट) भी कहते थे। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात इसकी कीमत थी। उस समय इस फोन की कीमत लगभग 4,000 डॉलर (यानी आज के हिसाब से लाखों रुपये) थी। इसे खरीदना सिर्फ बहुत अमीर लोगों के बस की ही बात थी।
नोकिया का राज और वो स्नेक वाला गेम
धीरे-धीरे मोबाइल की दुनिया बदलने लगी। 1994 में ‘आईबीएम साइमन’ (IBM Simon) नाम का फोन आया, जिसे दुनिया का पहला सच्चा स्मार्टफोन कहा जाता है। इसमें टच स्क्रीन और ईमेल जैसी सुविधाएं थीं। लेकिन मोबाइल को हर आम आदमी के हाथ तक पहुंचाने का असली काम नोकिया ने किया। 90 और 2000 के दशक में नोकिया 3310 जैसे फोन्स ने तहलका मचा दिया। फोन अब सिर्फ बात करने की मशीन नहीं रह गया था; दोस्तों को एसएमएस भेजना और वो मशहूर ‘स्नेक’ (Snake) गेम खेलना लोगों की नई आदत बन गई थी। साल 2000 आते-आते दुनिया का पहला कैमरा फोन भी बाजार में आ गया था।

एप्पल और एंड्रॉयड: जब फोन बन गया चलता-फिरता कंप्यूटर
मोबाइल की दुनिया में सबसे बड़ा भूचाल 2007 में आया, जब एप्पल (Apple) ने अपना पहला आईफोन लॉन्च किया। इस फोन ने मोबाइल से बटन वाले कीपैड की छुट्टी कर दी और मल्टी-टच स्क्रीन का जादू दुनिया को दिखाया। आईफोन की इस बंपर सक्सेस के बाद गूगल ने भी अपना एंड्रॉयड (Android) सिस्टम उतार दिया। एंड्रॉयड के आने से स्मार्टफोन्स सस्ते हो गए और हर किसी की पहुंच में आ गए। आज इन्हीं दोनों की वजह से हमारा फोन हमारा बैंक, कैमरा, टीवी और ऑफिस सब कुछ बन चुका है।
भविष्य की छलांग: मोबाइल अब और कहां तक जाएगा?
अगर हम आज से 10-15 साल आगे की सोचें, तो मोबाइल फोन हमारी कल्पना से भी ज्यादा एडवांस होने वाले हैं। एआई (AI) और मुड़ने वाली स्क्रीन का जलवा तो हम आज ही देख रहे हैं। आने वाले समय में शायद हमें हाथ में फोन पकड़ने की भी जरूरत न पड़े। स्मार्ट चश्मे और दिमाग से चलने वाली तकनीक (जैसे न्यूरालिंक) के जरिए हम सिर्फ सोचकर ही कॉल मिला सकेंगे। और तो और, सैटलाइट कॉलिंग की मदद से जंगलों और पहाड़ों में भी नेटवर्क गायब होने की टेंशन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
