अयोध्या के भव्य राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को जल्द ही अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने जा रहा है। 11 और 12 अगस्त 2026 को इस अहम पद के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन साक्षात्कारों में उम्मीदवारों से न केवल उनके प्रशासनिक अनुभव के बारे में पूछा गया, बल्कि कुछ ऐसे व्यक्तिगत और धार्मिक सवाल भी दागे गए, जिन्होंने सबको चौंका दिया है। ‘अपनी वाणी’ आज आपके लिए इस पूरी चयन प्रक्रिया, पूछे गए सवालों और अगले कदम का एकदम सटीक और एक्सक्लूसिव विश्लेषण लेकर आया है।
आखिर क्यों पड़ी राम मंदिर में CEO की जरूरत?
सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर अचानक एक पूर्णकालिक सीईओ की जरूरत क्यों महसूस हुई? दरअसल, यह बड़ा फैसला राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसों में कथित चोरी और गबन के आरोप सामने आने के बाद लिया गया है। जून महीने में जब मंदिर के कर्मचारियों द्वारा दान की हेराफेरी का मामला सामने आया और यूपी पुलिस की एसआईटी (SIT) ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया, तब ट्रस्ट की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए थे। इसी वजह से प्रशासन को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए एक सख्त और अनुभवी सीईओ की तलाश शुरू की गई।
“क्या आप कट्टर हिंदू हैं?” – इंटरव्यू में पूछे गए हैरान करने वाले सवाल
इस पद के लिए हुए इंटरव्यू कोई सामान्य कॉर्पोरेट इंटरव्यू नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों को एक गूगल फॉर्म भरना पड़ा, जिसमें उनके खान-पान और धार्मिक मान्यताओं की जानकारी मांगी गई थी। चयन समिति ने उम्मीदवारों से बहुत ही व्यक्तिगत सवाल पूछे, जैसे- “क्या आप एक कट्टर हिंदू हैं?”, “क्या आप शिखा (चोटी) रखते हैं?”, “क्या आप जनेऊ पहनते हैं?” और “क्या आप पूरी तरह शाकाहारी हैं या मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन करते हैं?”।
हालाँकि, कुछ अन्य स्रोतों और अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरव्यू का मुख्य फोकस उम्मीदवारों के सीवी (CV), प्रशासनिक अनुभव, भीड़ प्रबंधन और राम मंदिर के लिए उनके विज़न पर था। उम्मीदवारों की भगवान राम में आस्था और हिंदू रीति-रिवाजों की समझ को भी बारीकी से परखा गया।
क्या आम लोगों ने भी किया था आवेदन?
यह सवाल भी काफी चर्चा में है कि क्या इस पद के लिए आम लोग आवेदन कर सकते थे? इसका जवाब है- हाँ, लेकिन शर्तें बहुत कड़ी थीं। ट्रस्ट के पास पूरे देश से 5,500 से ज्यादा आवेदन आए थे। इस पद के लिए उम्र सीमा 50 से 70 वर्ष के बीच तय की गई थी और उम्मीदवार के पास ‘एक्जीक्यूटिव लीडरशिप’ का कम से कम 20 साल का अनुभव होना अनिवार्य था। इसके अलावा, उम्मीदवार का हिंदू धर्म का पालन करने वाला और सख्त शाकाहारी होना भी जरूरी शर्त थी।

इन हज़ारों आवेदनों में से कई चरणों की स्क्रीनिंग के बाद सिर्फ 16 से 18 उम्मीदवारों को ही अंतिम इन-पर्सन (In-person) इंटरव्यू के लिए अयोध्या बुलाया गया था। शॉर्टलिस्ट किए गए इन लोगों में आम नागरिक नहीं, बल्कि रिटायर्ड आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), पूर्व सैन्य अधिकारी और शिक्षा जगत के दिग्गज शामिल थे। इनमें बिहार के पूर्व डीजीपी प्रवेश सक्सेना और यूपी के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
आगे का रास्ता: अब क्या होगा अगला कदम?
साक्षात्कार की यह पूरी प्रक्रिया राम मंदिर परिसर में ही बंद दरवाजों के पीछे बेहद गोपनीय तरीके से की गई। इंटरव्यू लेने वाली इस तीन सदस्यीय समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे शामिल थे।
अब इंटरव्यू खत्म होने के बाद, यह चयन समिति अपनी एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगी। यह समिति 16 फाइनल उम्मीदवारों में से सबसे योग्य 3 नामों को छांटकर एक लिस्ट बनाएगी और उसे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप देगी। इसके बाद, ट्रस्ट उन तीन नामों में से किसी एक पर अंतिम मुहर लगाएगा और राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम का आधिकारिक ऐलान करेगा।
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