क्या आप भी आए दिन बढ़ते साइबर फ्रॉड और Mobile चोरी की घटनाओं से परेशान हैं? अगर हाँ, तो भारत सरकार ने आपकी सुरक्षा के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अब आपको अपने Mobile की सुरक्षा के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स पर भटकने की जरूरत नहीं होगी। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने Mobile निर्माता कंपनियों (Mobile Manufacturers) को निर्देश दिया है कि वे आने वाले सभी नए स्मार्टफोन्स में ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) फीचर या ऐप को पहले से इंस्टॉल (Pre-install) करके दें।
आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है, ‘संचार साथी’ कैसे काम करता है और इससे आपको क्या फायदा होगा।
क्या है सरकार का नया निर्देश?
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल यूजर्स की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए स्मार्टफोन कंपनियों के लिए एक नया नियम लाने की तैयारी की है। इसके तहत, भविष्य में भारत में बिकने वाले सभी नए हैंडसेट्स में ‘Sanchar Saathi’ की सुविधा इन-बिल्ट (पहले से मौजूद) होगी।
इसका मतलब है कि जैसे आपके फोन में कैमरा या गैलरी का ऐप पहले से आता है, वैसे ही अब मोबाइल सिक्योरिटी और ट्रैकिंग के लिए ‘संचार साथी’ का एक्सेस भी आपके फोन में पहले से दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता तक इस सरकारी सुविधा की पहुँच को आसान बनाना है।

संचार साथी (Sanchar Saathi) आखिर है क्या?
अगर आप अभी तक इस पोर्टल से अनजान हैं, तो आपको बता दें कि संचार साथी (sancharsaathi.gov.in) भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया एक बेहद शक्तिशाली पोर्टल है। इसे विशेष रूप से मोबाइल यूजर्स को साइबर अपराधों से बचाने और चोरी हुए फोन को खोजने के लिए बनाया गया है।
इस प्लेटफॉर्म पर मुख्य रूप से तीन बड़ी सुविधाएँ मिलती हैं:
- CEIR (Central Equipment Identity Register): अगर आपका फोन चोरी या गुम हो जाता है, तो आप इस फीचर की मदद से अपने फोन को Block कर सकते हैं और उसे ट्रैक भी कर सकते हैं।
- TAFCOP (Telecom Analytics for Fraud Management): यह सबसे खास फीचर है। इसके जरिए आप चेक कर सकते हैं कि आपके आधार कार्ड (ID) पर कितने सिम कार्ड चल रहे हैं। अगर कोई अनजान नंबर दिखता है, तो आप उसे वहीं से बंद भी करवा सकते हैं।
- KYM (Know Your Mobile): नया या पुराना फोन खरीदने से पहले आप चेक कर सकते हैं कि वह फोन असली है या नहीं, या कहीं वह चोरी का तो नहीं है।
Pre-Install होने से आपको क्या फायदा होगा? (Benefits for Users)
सरकार के इस फैसले से आम जनता को कई बड़े फायदे होने वाले हैं:
- आसान पहुँच (Easy Access): अभी बहुत से लोगों को संचार साथी पोर्टल के बारे में पता नहीं है या वे वेबसाइट खोलने में आलस करते हैं। ऐप या फीचर फोन में पहले से होने पर लोग एक क्लिक में अपनी सुरक्षा चेक कर पाएंगे।
- फ्रॉड पर लगाम: जब हर यूजर आसानी से चेक कर पाएगा कि उसके नाम पर कितने सिम एक्टिव हैं, तो फर्जी सिम के जरिए होने वाले फ्रॉड में भारी कमी आएगी।
- चोरी हुए फोन को ब्लॉक करना आसान: फोन गुम होने की स्थिति में आपको पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने से पहले तुरंत ऐप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करने में मदद मिलेगी (दूसरे डिवाइस से लॉग इन करके)।
- जागरूकता बढ़ेगी: जब फोन में ऐप सामने दिखाई देगा, तो लोग इसके बारे में जानेंगे और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे।
क्या यह कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा?
जी हाँ, रिपोर्ट्स का कहना है कि सरकार इसे मोबाइल हार्डवेयर या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) के स्तर पर अनिवार्य कर सकती है। इसका मतलब है कि चाहे आप Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo या Apple का फोन खरीदें, भारत में बेचे जाने वाले यूनिट्स में यह सिक्योरिटी फीचर देना अनिवार्य हो सकता है।

सरकार चाहती है कि डिजिटल इंडिया के दौर में हर नागरिक का डेटा और डिवाइस सुरक्षित रहे।
सरकार का यह कदम निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। ‘संचार साथी’ को हर मोबाइल का हिस्सा बनाकर सरकार न केवल साइबर अपराधों को रोकना चाहती है, बल्कि तकनीक को आम आदमी के लिए सुरक्षित भी बनाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि मोबाइल कंपनियां इस अपडेट को कब तक और किस तरह से अपने नए मॉडल्स में लागू करती हैं।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि इस ऐप के पहले से इंस्टॉल होने से साइबर क्राइम कम होगा? हमें कमेंट करके जरूर बताएं!
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: क्या संचार साथी ऐप अभी प्ले स्टोर पर उपलब्ध है?
A. फिलहाल संचार साथी की सेवाएं मुख्य रूप से वेब पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) पर उपलब्ध हैं, लेकिन जल्द ही इसका डेडिकेटेड ऐप या ओएस इंटीग्रेशन देखने को मिल सकता है।
Q2: क्या पुराने फोन में भी यह ऐप आएगा?
A. यह नियम मुख्य रूप से नए स्मार्टफोन्स के लिए लागू होने की संभावना है। पुराने फोन यूजर्स इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।
Q3: क्या संचार साथी का उपयोग मुफ्त है?
A. जी हाँ, यह भारत सरकार की एक बिल्कुल मुफ्त सेवा है।
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