Bihar Election 2025 : सियासी घमासान, सभी दलों की रणनीति और टकराव

Bihar Election 2025 – बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है क्योंकि  Bihar Assembly Elections 2025 बिल्कुल दरवाजे पर खड़ा है। इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि सभी बड़े दल अपनी-अपनी रणनीति और दावेदारी के साथ मैदान में उतर चुके हैं। जहां एक ओर एनडीए गठबंधन मजबूती से चुनावी मोर्चा संभाल रहा है, वहीं महागठबंधन में दरार की खबरें चुनावी हवा को और तेज बना रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से कि इस बार बिहार के चुनावी रण में कौन-सी पार्टी किस रणनीति के साथ उतर रही है।

NDA की स्थिति  

नीतीश कुमार की जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठबंधन इस बार पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहा है। नीतीश कुमार इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े दिख रहे हैं और मोदी सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।जनसभाओं में नीतीश कुमार खुलेआम लोगों से अपील कर रहे हैं कि मोदी जी ने बिहार के लिए जितना काम किया है, उसके लिए खड़े होकर प्रणाम करिए। यह साफ संकेत है कि जेडीयू इस बार बीजेपी के साथ ही मैदान में उतर रही है।

 LJP

लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने अलग राह पकड़ ली है। खुद को मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग इस बार 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि एलजेपी ने सीधे-सीधे बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इससे एनडीए के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।

Bihar Election 2025

महागठबंधन की चुनौतियां

महागठबंधन, जिसमें कांग्रेस और आरजेडी शामिल हैं, इस बार मुश्किलों से घिरा नजर आ रहा है। चुनावी अभियान की शुरुआत तो दोनों दलों ने मिलकर की थी, लेकिन सीट बंटवारे पर विवाद ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया। तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया है कि आरजेडी बिहार की सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इससे कांग्रेस के सामने भी अकेले चुनाव लड़ने की चुनौती खड़ी हो गई है।  कांग्रेस पार्टी अब राज्य में अपनी खोई जमीन तलाशने की कोशिश करेगी, लेकिन आरजेडी से अलग होकर कांग्रेस कितना प्रभाव दिखा पाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

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JAN SURAAJ

प्रशांत किशोर और जन सुराज की एंट्री  प्रशांत किशोर की पार्टी जन स्वराज ने भी इस बार 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। प्रशांत किशोर शुरू से ही कह रहे हैं कि उनकी पार्टी इस बार पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी। उनका दावा है कि जनता पारंपरिक दलों से ऊब चुकी है और अब एक नए विकल्प की तलाश में है।

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AIMIM (ओवैसी की पार्टी) की स्थिति

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी बिहार की राजनीति में अपनी जगह बनाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने महागठबंधन में शामिल होने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल सकी। इसलिए ओवैसी ने भी बिहार की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, उनका प्रभाव सीमित इलाकों तक ही रह सकता है।

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सीधे मुकाबले की तस्वीर  

इस बार बिहार में मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और जटिल होने वाला है।  एनडीए (बीजेपी+जेडीयू) मजबूत दिखाई दे रहा है, लेकिन एलजेपी की बगावत ने समीकरण बिगाड़ दिए हैं।  दूसरी ओर आरजेडी और कांग्रेस का अलग-अलग लड़ना विपक्षी वोटों को बांट सकता है।  प्रशांत किशोर और ओवैसी जैसे नेताओं की मौजूदगी इस चुनाव को और भी पेचीदा बना रही है।

बिहार में बवाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुल छह बड़ी पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी — एनडीए (बीजेपी+जेडीयू), एलजेपी, आरजेडी, कांग्रेस, जन स्वराज और एआईएमआईएम।  हर दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुका है और चुनावी माहौल पहले ही बेहद गरमा चुका है।  इस बार बिहार का मतदाता किसे चुनता है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव में बवाल और सियासी उठापटक कम नहीं होगी।

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