देहरादून में 15 सितंबर 2025 की देर रात अचानक हुए Cloudburst ने शहर और आसपास के इलाकों को दहला दिया। राजधानी के सहस्रधारा क्षेत्र में इस प्राकृतिक आपदा ने कुछ ही पल में भारी तबाही मचा दी। कारलीगाढ़ नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए। अब तक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस भीषण हादसे में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
आपदा का कहर: मिनटों में मचा हाहाकार
तेज बारिश और बादल फटने से सहस्रधारा क्षेत्र पूरी तरह प्रभावित हुआ। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी। दुकानों, पुलों और घरों को भारी नुकसान हुआ। विशेष रूप से विकासनगर और सदर इलाके में तबाही का मंजर ज्यादा देखा गया।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के जवान लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को तेज़ी से राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद और मुआवजे का आश्वासन दिया।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर केंद्र की ओर से हर तरह की मदद देने का भरोसा दिलाया। इस बीच प्रभावित परिवारों को खाने-पीने का सामान, अस्थायी आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

चेतावनी और आने वाले दिन
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड और आसपास के इलाकों में भारी बारिश को देखते हुए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आगामी दिनों में और बारिश की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और सरकारी निर्देशों का पालन करें।
नतीजा: जंग अभी जारी
देहरादून का यह Cloudburst सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि शहर और वहां के लोगों के साहस की भी परीक्षा है। प्रशासन पूरी ताक़त से बचाव और पुनर्निर्माण में जुटा है। वहीं, स्थानीय लोग भी राहत कार्यों में हाथ बंटाकर इस मुश्किल समय में मजबूती दिखा रहे हैं।
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