Fake Loan Application का नया जाल : क्विक फंड्स, ट्रस्ट रूट और जैकपॉट फंड्स के नाम पर ठगी रहे 1 कदम सतर्क

डिजिटल युग में जहां एक ओर तकनीक ने जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर साइबर ठग (Fake Loan Application) लगातार लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। खासकर फर्जी लोन एप्लीकेशंस के ज़रिए भोले-भाले आम नागरिकों से ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में क्विक फंड्स, ट्रस्ट रूट और जैकपॉट फंड्स नाम की एप्लीकेशंस सामने आई हैं, जो दिखने में असली और भरोसेमंद लोन प्लेटफॉर्म जैसी लगती हैं, लेकिन असलियत में ये सिर्फ लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने का जरिया हैं।

कैसे काम करता है यह फर्जी जाल

इन एप्लीकेशंस का तरीका बेहद चालाकी से बनाया जाता है। सबसे पहले ये ऐप गूगल प्ले स्टोर, तीसरे पक्ष की वेबसाइटों या फर्जी लिंक के जरिए डाउनलोड कराई जाती हैं। यूज़र को शुरुआत में आसान शर्तों पर इंस्टेंट लोन का वादा किया जाता है। “कुछ ही मिनटों में अकाउंट में पैसा” जैसी टैगलाइन से लोग आकर्षित हो जाते हैं।जब कोई व्यक्ति इन एप्लीकेशंस पर साइन अप करता है, तो सबसे पहले उससे उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल्स और मोबाइल कॉन्टैक्ट्स तक की अनुमति मांगी जाती है। लोग इसे लोन प्रक्रिया का हिस्सा मानकर सहज रूप से अपनी जानकारी साझा कर देते हैं। लेकिन यही जानकारी बाद में ठगी का हथियार बन जाती है।

पैसे देने का झांसा और फिर ब्लैकमेल

फर्जी एप्लीकेशंस की सबसे बड़ी चाल यह होती है कि वे यूज़र को शुरू में कुछ हजार रुपये का लोन देकर भरोसा जीतती हैं। मगर इस लोन पर ब्याज और पेनल्टी इतनी ज्यादा होती है कि व्यक्ति चुकाने की स्थिति में नहीं रहता। फिर वसूली करने वाले कॉल सेंटर से लगातार धमकी भरे फोन और संदेश आने लगते हैं।कई मामलों में देखा गया है कि ठग यूज़र के मोबाइल से कॉन्टैक्ट्स और गैलरी तक एक्सेस कर लेते हैं और फिर फोटो या वीडियो का दुरुपयोग करके ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। “अगर पैसे नहीं चुकाए तो आपके कॉन्टैक्ट्स को मैसेज भेज देंगे” जैसी धमकियों से लोग मानसिक दबाव में आकर रकम चुकाने पर मजबूर हो जाते हैं।

क्विक फंड्स, ट्रस्ट रूट और जैकपॉट फंड्स का नेटवर्क

इन तीनों एप्लीकेशंस का पैटर्न लगभग एक जैसा है। क्विक फंड्स, ट्रस्ट रूट और जैकपॉट फंड्स खुद को इंस्टेंट डिजिटल फाइनेंस कंपनी बताती हैं। इनके ऐप इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पहली नजर में ये वैध फाइनेंशियल ऐप जैसी लगती हैं। लोगो, कलर स्कीम और ग्राहक सेवा चैट सपोर्ट तक को प्रोफेशनल अंदाज़ में पेश किया जाता है।

लेकिन जांच में पता चलता है कि इनका न तो कोई पंजीकरण भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से है, न ही ये किसी मान्यता प्राप्त एनबीएफसी (Non-Banking Financial Company) से जुड़ी हैं। इनकी सर्वर लोकेशन अक्सर भारत से बाहर पाई जाती है, जिससे ठगों तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है।

पीड़ितों की बढ़ती संख्या

पिछले कुछ महीनों में कई राज्यों से शिकायतें सामने आई हैं कि इन एप्लीकेशंस ने लोगों को कर्ज के नाम पर बर्बाद कर दिया। कुछ मामलों में लोगों ने 5,000 रुपये का लोन लिया और चुकाते-चुकाते 50,000 रुपये तक गंवा दिए। कई लोग सामाजिक बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज ही नहीं कराते, जिससे ठग और भी सक्रिय हो जाते हैं।

प्रशासन और साइबर सेल की कार्रवाई

सरकारी एजेंसियों और साइबर सेल ने बार-बार चेतावनी दी है कि किसी भी लोन एप्लीकेशन का इस्तेमाल करने से पहले उसके वैध होने की पुष्टि ज़रूर करें। RBI की वेबसाइट पर सभी मान्यता प्राप्त एनबीएफसी और बैंकों की सूची उपलब्ध है। साथ ही, केंद्र सरकार ने हाल ही में गूगल से कई संदिग्ध लोन एप्लीकेशंस को हटाने का आग्रह भी किया है।

Fake Loan Application

कैसे बचें इनसे

  • किसी भी अनजाने एप्लीकेशन को डाउनलोड न करें।
  • हमेशा आधिकारिक बैंक या NBFC की ऐप का ही इस्तेमाल करें।
  • अपनी व्यक्तिगत जानकारी, खासकर बैंक डिटेल्स और कॉन्टैक्ट्स तक की अनुमति कभी भी संदिग्ध ऐप्स को न दें।
  • किसी भी स्थिति में धमकी या ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

लूट से बचे

क्विक फंड्स, ट्रस्ट रूट और जैकपॉट फंड्स जैसे नाम सुनने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इनकी असलियत पूरी तरह फर्जी है। ये एप्लीकेशंस डिजिटल ठगी का नया रूप हैं, जिनसे बचाव के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को चाहिए कि वे आसान पैसों के लालच में न पड़ें और किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें, क्योंकि डिजिटल युग में एक क्लिक से जिंदगी बर्बाद भी हो सकती है।

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