आज 1 दिसंबर 2025, सोमवार, पूरा भारत और विश्व गीता जयंती मना रहा है—वह पावन दिन जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को 700 श्लोकों में जीवन, धर्म, कर्तव्य और आत्मज्ञान का दिव्य उपदेश दिया था। यह अवसर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है, पर मनाया जाता है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, यही वह ऐतिहासिक क्षण था जब मानव सभ्यता को एक ऐसा ज्ञान मिला जो समय, परिस्थितियों और युगों से परे है—आज इसे 5162वां गीता वर्ष माना जा रहा है।
गीता का सार्वभौमिक महत्व
18 अध्याय और 700 श्लोकों वाली श्रीमद्भगवद्गीता धर्म, कर्म, भक्ति, ज्ञान, योग, वैराग्य, आत्म-साक्षात्कार जैसे जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन देती है।
इसलिए गीता जयंती सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिन्तन, स्व-विकास और आंतरिक शांति की प्रेरणा है जो हर युग में उतनी ही प्रासंगिक रहती है।

तिथि, पूजा-विधि और व्रत — कैसे मनाई जा रही है गीता जयंती 2025?
इस वर्ष गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी दोनों एक ही दिन हैं। एकादशी तिथि 30 नवंबर की रात से शुरू होकर 1 दिसंबर की शाम तक रही, इसलिए आज मुख्य पूजा, व्रत और पारायण हो रहा है।
भक्त परंपरानुसार एकादशी व्रत रखते हैं और गीता के 18 अध्यायों का पाठ करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करते हैं, दान-पुण्य और जरूरतमंदों को गीता ग्रंथ भेंट दिया जाता है। साथ ही साथ सभी लोग ज्ञान-प्रसार का संकल्प लेते हैं।
कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आज विशाल अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव हो रहा है जहाँ संत, विद्वान, देश-विदेश से भक्त, कलाकार और लाखों श्रद्धालु शामिल होकर गीता पाठ, कीर्तन, प्रवचन, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

महाकाव्य का मूल संदेश— गीता का मौलिक निर्देश “कर्म कर, फल की चिंता मत कर” भव्य रथयात्राओं, शास्त्रार्थ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है।
मंदिरों, आश्रमों और घरों में उत्सव का माहौल
देशभर के ISKCON, वैष्णव और कृष्ण-मंदिरों में सामूहिक गीता पारायण, झांकी, अखंड गीता पाठ (700 श्लोक), 108 श्लोकों से ‘गीता यज्ञ’, रथ सेवा और बाल एवं युवा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। घर-घर में ऑनलाइन गीता अध्ययन और कथाएँ चल रही हैं ताकि नई पीढ़ी भी धर्म, साहस, समत्व और निष्काम कर्म का महत्व समझ सके।
आज के समय में गीता का संदेश
करियर की दौड़, तनाव, रिश्तों की जटिलता और मानसिक दबाव से भरी आधुनिक जिंदगी में गीता का संदेश पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक है। गीता हमें याद दिलाती है सफलता का मूल आंतरिक संतुलन है। कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही शिक्षाएँ आज नेताओं, विद्यार्थियों, प्रोफेशनल्स और साधकों के लिए जीवनदायिनी हैं।
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