उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सादाबाद क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के माइलस्टोन 141 पर एक डबल डेकर बस और ईको कार की जबरदस्त टक्कर में छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा सोमवार रात को हुआ, जब दिल्ली से आगरा जा रही तेज रफ्तार बस ने कार को पीछे से जोरदार धक्का मार दिया। कार में 16 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश परिवार के सदस्य थे।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन गंभीर रूप से घायल कई लोगों को आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। बस चालक, सहचालक और कंडक्टर को फरार होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। यह हादसा एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क दुर्घटनाओं की चेतावनी देता है।
हादसे का पूरा विवरण और राहत-बचाव कार्य
रात करीब 10 बजे आगरा-दिल्ली लेन पर ईको कार परिवार के साथ नोएडा से आगरा लौट रही थी। अचानक पीछे से आई डबल डेकर बस ने ब्रेक न लगाते हुए कार को टक्कर मार दी, जिससे कार सड़क किनारे पलट गई। मृतकों में कार सवार चार महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं, जिनकी पहचान अभी जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की रफ्तार 100 किमी/घंटा से अधिक थी और चालक मोबाइल पर बात कर रहा था।
NDRF की टीम और स्थानीय पुलिस ने दो घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घायलों को हाथरस जिला अस्पताल और आगरा के SNMCH में शिफ्ट किया गया, जहां 10 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

पुलिस जांच और गिरफ्तार आरोपियों का बयान
हाथरस पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बस चालक रामू (उत्तर प्रदेश निवासी), सहचालक श्याम और कंडक्टर राजेश को मौके से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में चालक ने ओवरस्पीड और ब्रेक फेलियर का हवाला दिया, लेकिन मैकेनिकल जांच में बस की स्थिति सामान्य पाई गई। पुलिस अब CCTV फुटेज खंगाल रही है और ब्लैक बॉक्स रिकॉवर करने की कोशिश कर रही है।
SSP हाथरस ने बताया कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें बस कंपनी पर भी जुर्माना लगेगा। मृतकों के शव पीएम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए।
यमुना एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों का कारण
पिछले एक साल में यमुना एक्सप्रेसवे पर 50 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 100 से ज्यादा मौतें हुईं। मुख्य कारण ओवरस्पीडिंग, गलत लेन चेंजिंग और ड्राइवरों की थकान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय खराब लाइटिंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी हादसों को बढ़ावा दे रही है। NHAI ने स्पीड लिमिट 100 किमी/घंटा तय की है, लेकिन उल्लंघन आम है। बिहार और यूपी के यात्रियों के लिए यह रूट व्यस्त है, इसलिए जागरूकता अभियान जरूरी हैं।

परिवारों का दर्द और मुआवजे की मांग
मृतकों के परिजन आगरा पहुंचे और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। एक पीड़ित परिवार ने कहा, “हमारा पूरा परिवार बर्बाद हो गया, बस कंपनी से 20 लाख मुआवजा मिलना चाहिए।” सरकार ने प्रत्येक मृतक को 5 लाख और घायलों को 50 हजार की सहायता घोषित की है। विपक्षी दलों ने हादसे की न्यायिक जांच की मांग की है। यह घटना सड़क सुरक्षा पर पुनर्विचार की मांग करती है।
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