भारतीय रेलवे अक्सर महिला सुरक्षा और ‘कवच’ जैसी तकनीकों का ढिंढोरा पीटता है, लेकिन 17 फरवरी 2026 की रात ने इन तमाम दावों को लहूलुहान कर दिया। अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस में एक NCC कैडेट छात्रा के साथ जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि ट्रेन के भीतर वर्दीधारी ही अब भक्षक बन चुके हैं। प्रशासन और रेलवे बोर्ड की सुस्ती का आलम यह है कि वारदात के दो दिन बाद भी मुख्य आरोपी टीटीई राहुल कुमार पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। क्या यात्रियों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है?
मदद के बहाने बुना गया ‘मौत का जाल’
घटना उस समय की है जब एक छात्रा मऊ में अपनी NCC ‘C’ सर्टिफिकेट की परीक्षा देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। ट्रेन में भारी भीड़ के कारण वह छात्रा AC कोच में जाकर खड़ी हो गई। मदद करने के नाम पर टीटीई राहुल कुमार (निवासी बिहार) ने छात्रा को विश्वास में लिया। सीट दिलाने और टिकट बनाने के बहाने वह उसे फर्स्ट AC (AC-1) के केबिन में ले गया। जैसे ही छात्रा केबिन के अंदर गई, आरोपी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। एक NCC कैडेट, जो खुद देश की सुरक्षा के लिए तैयार हो रही थी, वह रेलवे के एक जिम्मेदार कर्मचारी की हवस का शिकार बन गई।

टीटीई फरार, पुलिस के हाथ अब भी खाली
हैरानी की बात यह है कि जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर 112 पर कॉल किया और मामले की जानकारी दी, तब तक आरोपी टीटीई राहुल कुमार देवरिया स्टेशन पर उतरकर बड़ी आसानी से फरार हो गया। सवाल यह उठता है कि क्या रेलवे के पास ऐसा कोई प्रोटोकॉल नहीं था कि स्टेशन पर उसे तुरंत घेरा जा सकता? फिलहाल, GRP ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और पूर्वोत्तर रेलवे (NER) ने उसे निलंबित कर दिया है। लेकिन क्या निलंबन काफी है? क्या ऐसे अपराधियों को पहले ही कड़ी स्क्रीनिंग के जरिए बाहर नहीं किया जाना चाहिए था?
प्रशासनिक विफलता: कब तक जारी रहेगी ऐसी दरिंदगी?
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे के कर्मचारियों पर इस तरह के संगीन आरोप लगे हैं। लेकिन इस बार मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह घटना ट्रेन के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘फर्स्ट क्लास केबिन’ में हुई है। सरकार ‘बेटी बचाओ’ का नारा लगाती है, लेकिन जब वही बेटी एक सरकारी विभाग के कर्मचारी की देखरेख में असुरक्षित हो, तो जवाबदेही किसकी बनती है? राहुल कुमार की गिरफ्तारी के लिए टीमें पटना और बिहार के अन्य जिलों में छापेमारी तो कर रही हैं, लेकिन आरोपी का अब तक न मिलना पुलिसिया तंत्र की विफलता को दर्शाता है।

महिला यात्रियों के लिए खौफ का सफर
इस घटना ने महिला यात्रियों के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है। अगर एक वर्दीधारी टीटीई पर भरोसा करना अपराध है, तो महिलाएं ट्रेन में किससे मदद मांगें? रेलवे की इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन और सुरक्षा ऐप उस समय कहां थे जब केबिन का दरवाजा अंदर से बंद था? यह घटना रेलवे प्रशासन और सरकार के चेहरे पर एक काला धब्बा है, जिसका जवाब उन्हें देश की हर उस बेटी को देना होगा जो अकेले सफर करने की हिम्मत जुटाती है।
सिर्फ इनाम घोषित करने और निलंबन करने से न्याय नहीं होगा। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि राहुल कुमार जैसे दरिंदों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन जाए। साथ ही, रेलवे को अपनी चयन प्रक्रिया और ऑन-ड्यूटी स्टाफ की मॉनिटरिंग पर पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है।
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