इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं! नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE Mains 2026 (Session 1) का रिजल्ट घोषित कर दिया है। जैसे ही रिजल्ट का लिंक एक्टिव हुआ, देश भर में लाखों धड़कनें तेज हो गईं। एक तरफ उन घरों में जश्न का माहौल है जहां बच्चों ने 99 या 100 परसेंटाइल (Percentile) हासिल किया है। वहीं दूसरी तरफ, हजारों घर ऐसे भी हैं जहां रिजल्ट देखने के बाद मातम जैसा सन्नाटा पसर गया है। कमरे के अंदर एक छात्र खुद को कोस रहा है, और बाहर माता-पिता की उम्मीदें टूट कर बिखर गई हैं।
आज ‘ApniVani’ के इस ब्लॉग में हम टॉपर्स को बधाई तो देंगे ही, लेकिन हमारा मुख्य मकसद उन बच्चों और उनके माता-पिता से बात करना है, जिनके हाथ इस बार निराशा लगी है।
टॉपर्स का जलवा: 300/300 का जादू बरकरार
हर साल की तरह इस साल भी देश के होनहारों ने साबित कर दिया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। तेलंगाना, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों से कई छात्रों ने 100 Percentile का जादुई आंकड़ा छू लिया है।

इन टॉपर्स की सफलता यह बताती है कि अगर NCERT पर पकड़ मजबूत हो और प्रैक्टिस में कमी न हो, तो यह एग्जाम क्रैक किया जा सकता है। टॉपर्स की पूरी लिस्ट आप NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। लेकिन असली कहानी उन नंबरों के पीछे नहीं, बल्कि उन बच्चों के मन में चल रही है जो इस लिस्ट में जगह नहीं बना पाए।
अगर रिजल्ट खराब आया, तो अब क्या? (छात्रों के लिए)
सुनो दोस्तों! अगर तुम्हारी परसेंटाइल कम आई है या तुम कट-ऑफ (Cut-off) पार नहीं कर पाए, तो यह दुनिया का अंत नहीं है।
- सच स्वीकारो: सबसे पहले यह मानो कि कमी रह गई। पेपर कठिन नहीं था, शायद हमारी तैयारी में ही कोई खोट थी।
- अगला मौका: अभी Session 2 (April Attempt) बाकी है। जो गलतियां जनवरी में हुईं, उन्हें डायरी में लिखो और आज से ही डबल मेहनत शुरू कर दो। रोने से परसेंटाइल नहीं बढ़ेगी, पढ़ने से बढ़ेगी।
- माता-पिता सावधान: प्यार और प्रेशर के बीच का संतुलन (Parents Must Read)
यह सेक्शन इस ब्लॉग का सबसे अहम हिस्सा है। जब रिजल्ट खराब आता है, तो घर में दो तरह का माहौल बनता है—या तो बहुत ज्यादा डांट या फिर बहुत ज्यादा दुलार। ये दोनों ही बच्चे के लिए खतरनाक हैं।
पिता के लिए: ताने मारना बंद करें
अक्सर पिता अपने बच्चे की तुलना ‘शर्मा जी के बेटे’ या रिश्तेदार के बच्चे से करने लगते हैं। “उसका हो गया, तेरा क्यों नहीं हुआ? हमने तुझपर इतने पैसे बर्बाद किए!”
यह बातें बच्चे को डिप्रेशन (Depression) में धकेल सकती हैं। उसे अभी आपके साथ की जरूरत है, आपके तानों की नहीं। उसे समझाइए कि कोई बात नहीं, गिर गए तो क्या हुआ, फिर से उठो।
माँ के लिए: ममता में ‘अंधे’ न बनें
यहाँ माताओं को थोड़ा विशेष ध्यान देने की जरूरत है। भारतीय माँ का दिल बहुत कोमल होता है। बच्चा जब रोता है या उदास होता है, तो माँ अक्सर कहती है— “कोई बात नहीं बेटा, तूने तो मेहनत की थी, किस्मत ही खराब थी।”

यहीं आप गलती कर रही हैं।
प्यार करना सही है, लेकिन प्यार में बच्चे की गलतियों पर पर्दा डालना गलत है।
अगर आप उसे यह अहसास नहीं दिलाएंगी कि उसने पढ़ाई में लापरवाही की है या मोबाइल पर ज्यादा वक्त बिताया है, तो वह सुधरेगा कैसे?
उसे खाना खिलाइए, प्यार कीजिए, लेकिन साथ में यह भी सख्ती से कहिए— “बेटा, मुझे तुझसे हमदर्दी है, लेकिन सच यह है कि तूने मेहनत कम की थी। इस बार मैं चुप हूँ, लेकिन अगली बार मुझे रिजल्ट चाहिए।”
ममता और अनुशासन (Discipline) का यही संतुलन उसे टॉपर बनाएगा।
आगे की राह: वापसी कैसे करें?
जो हो गया, उसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन जो आने वाला है (JEE Advanced या Session 2), वह आपके हाथ में है।
- सोशल मीडिया से दूरी: अगले 3 महीनों के लिए इंस्टाग्राम और दोस्तों की महफिल छोड़ दें।
- मॉक टेस्ट: जितने ज्यादा पेपर सॉल्व करेंगे, उतना डर कम होगा।
- बात करें: अगर मन भारी हो, तो अपने पेरेंट्स या टीचर से बात करें। चुप्पी साधने से तनाव बढ़ता है।
ApniVani क्या कहता है ?
JEE का रिजल्ट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है, यह आपकी जिंदगी का रिजल्ट नहीं है। जो पास हुए, उन्हें बधाई। जो फेल हुए, उन्हें एक सबक।
माता-पिता से बस इतनी विनती है—अपने बच्चे को “कोहिनूर” बनने का मौका दें, उसे “कांच” समझकर तोड़ें नहीं। और हाँ, थोड़ा प्यार और थोड़ी सख्ती का मिक्सचर ही उसे सफलता की सीढ़ी चढ़ाएगा।
अभी नहीं तो कभी नहीं! उठो और पढ़ने बैठ जाओ!

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि JEE की तैयारी के दौरान बच्चों पर पेरेंट्स का प्रेशर बहुत ज्यादा होता है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।
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