Mumbai Pune Expressway Jam: 18 घंटे की तड़प के बीच उद्योगपति डॉ. सुधीर मेहता ने लिया हेलीकॉप्टर का सहारा, सरकार को दिया बड़ा सुझाव

मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र की लाइफलाइन कहे जाने वाले मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (Mumbai-Pune Expressway) पर बीते 24 से 30 घंटों में जो मंजर देखने को मिला, उसने देश के सबसे आधुनिक हाईवे की सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गैस टैंकर के पलटने से शुरू हुआ यह घटनाक्रम देखते ही देखते एक मानवीय संकट में बदल गया, जहाँ लाखों यात्री बिना भोजन, पानी और टॉयलेट की सुविधा के बीच सड़क पर फंसे रहे।

एक गैस टैंकर और 33 घंटे का संघर्ष: क्या था पूरा मामला?

यह संकट मंगलवार शाम करीब 5 बजे शुरू हुआ, जब मुंबई की ओर जा रहा प्रोपलीन गैस (Propylene Gas) से भरा एक टैंकर रायगढ़ जिले के अदोषी सुरंग (Adoshi Tunnel) के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर से अत्यधिक ज्वलनशील गैस का रिसाव होने लगा, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से ट्रैफिक रोक दिया। खंडाला घाट के पहाड़ी इलाके में हुई इस दुर्घटना के कारण देखते ही देखते 20 किलोमीटर से भी लंबा जाम लग गया। NDRF और विशेषज्ञों की टीम को गैस रिसाव रोकने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे यातायात करीब 33 घंटे तक प्रभावित रहा।

Mumbai Pune Expressway Jam and the reason behind it

डॉ. सुधीर मेहता को क्यों लेना पड़ा हेलीकॉप्टर?

इस भीषण जाम में आम जनता के साथ-साथ पिनेकल इंडस्ट्रीज और EKA मोबिलिटी के चेयरमैन डॉ. सुधीर मेहता (Dr. Sudhir Mehta) भी फंस गए थे। डॉ. मेहता मुंबई से पुणे की ओर जा रहे थे, लेकिन एक्सप्रेसवे के गतिरोध ने उन्हें करीब 8 घंटे तक एक ही जगह पर रोके रखा। स्थिति की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए, उन्होंने अंततः एक निजी हेलीकॉप्टर मंगवाया और पुणे के लिए उड़ान भरी।

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जाम की रोंगटे खड़े कर देने वाली एरियल तस्वीरें (Aerial Photos) साझा कीं। इन तस्वीरों में हजारों गाड़ियाँ चींटियों की तरह कतार में खड़ी दिखाई दे रही थीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि महज एक टैंकर की दुर्घटना ने लाखों लोगों की जिंदगी को 18-18 घंटों के लिए दांव पर लगा दिया है।

उद्योगपति का सुझाव: इमरजेंसी एग्जिट और सस्ते हेलिपैड

डॉ. सुधीर मेहता ने इस संकट के समाधान के लिए सरकार और NHAI को दो महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  • इमरजेंसी एग्जिट पॉइंट्स: उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे पर नियमित अंतराल पर ऐसे आपातकालीन निकास होने चाहिए जिन्हें संकट के समय खोलकर वाहनों को वापस मोड़ा जा सके। वर्तमान में, एक बार जाम में फंसने के बाद यात्रियों के पास पीछे मुड़ने का कोई विकल्प नहीं बचता।
  • अनिवार्य हेलिपैड: डॉ. मेहता के अनुसार, एक्सप्रेसवे के किनारे एक एकड़ से कम जमीन पर 10 लाख रुपये से भी कम लागत में हेलिपैड बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हर कुछ किलोमीटर पर हेलिपैड अनिवार्य होने चाहिए ताकि गंभीर स्थिति में लोगों को एयरलिफ्ट किया जा सके।

Mumbai Pune Expressway Jam

मानवीय पीड़ा: बिना पानी और खाने के कटे दिन-रात

सोशल मीडिया पर यात्रियों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि जाम इतना भयानक था कि एम्बुलेंस तक रास्ता नहीं पा रही थीं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समय सबसे कठिन रहा। पीने के पानी और भोजन की कमी के कारण लोगों में भारी गुस्सा देखा गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने बाद में कुछ राहत सामग्री पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन ट्रैफिक का दबाव इतना था कि मदद पहुँचने में भी घंटों लग गए।

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मैनेजमेंट भी जरूरी

यह घटना हमें याद दिलाती है कि सिर्फ चौड़ी सड़कें बनाना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी ‘प्रोपलीन गैस’ जैसी संवेदनशील दुर्घटनाओं से निपटने के लिए हमारे पास एक ‘डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल’ होना अनिवार्य है। डॉ. सुधीर मेहता के सुझावों पर यदि सरकार अमल करती है, तो भविष्य में लाखों लोगों को इस तरह की प्रताड़ना से बचाया जा सकता है।

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