पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस ने दी दस्तक! हाल ही में राज्य के उत्तर 24 परगना जिले से शुरू हुआ यह संक्रमण अब तेजी से पांव पसार रहा है। ताजा खबरों के मुताबिक, अब तक 5 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें डॉक्टर और नर्स जैसे स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। चूंकि इस वायरस का कोई सटीक टीका (Vaccine) नहीं है, इसलिए इसके बारे में सही जानकारी और सावधानी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।
क्या है निपाह वायरस और यह कैसे फैलता है?
निपाह वायरस (NiV) एक ‘ज़ूनोटिक’ बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। भारत में इसका मुख्य स्रोत ‘फ्रुगिवोरस बैट्स’ यानी फल खाने वाले चमगादड़ हैं। इसके अलावा, यह सूअरों के जरिए भी इंसानों तक पहुँच सकता है।
यह वायरस तब फैलता है जब कोई व्यक्ति:
- चमगादड़ द्वारा कुतरे गए फल या दूषित भोजन खाता है।
- खजूर का कच्चा रस पीता है जिसमें चमगादड़ की लार या मलमूत्र मिला हो।
- किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आता है (सांस की बूंदों या शारीरिक तरल पदार्थ के जरिए)।

शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखने लगते हैं। शुरुआत में यह एक सामान्य फ्लू जैसा लगता है, लेकिन इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
- सामान्य संकेत: अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान।
- गंभीर संकेत: गले में खराश, खांसी और सांस लेने में तकलीफ। कुछ मरीजों को मतली और उल्टी की शिकायत भी हो सकती है।
- खतरनाक स्थिति: संक्रमण बढ़ने पर यह दिमागी सूजन (Encephalitis) का रूप ले लेता है, जिससे भ्रम होना, दौरे पड़ना और अंततः मरीज कोमा में जा सकता है। इसमें मृत्यु दर 40% से 75% तक देखी गई है।

लक्षण दिखने पर तुरंत क्या करें?
अगर आपको या आपके आसपास किसी को ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, खासकर यदि आप प्रभावित इलाकों के संपर्क में रहे हैं, तो ये कदम उठाएं:
- फौरन डॉक्टर से मिलें: बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल जाएं। शुरुआती इलाज से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।
- खुद को आइसोलेट करें: घर के अन्य सदस्यों से दूरी बना लें और मास्क का प्रयोग करें।
- पूरी जानकारी दें: डॉक्टर को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री और संपर्क में आए लोगों के बारे में सही जानकारी दें ताकि ‘कांटेक्ट ट्रेसिंग’ की जा सके।
इन गलतियों से बचना है बेहद जरूरी
अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो संक्रमण को न्योता देती हैं:
- खुले फल खाना: कभी भी जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को न खाएं। फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर ही इस्तेमाल करें।
- कच्चा जूस पीना: खजूर का कच्चा रस (ताड़ी आदि) पीने से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर इन्हीं पेड़ों पर डेरा डालते हैं।
- लापरवाही बरतना: संक्रमित व्यक्ति के बर्तन, कपड़े या बिस्तर शेयर न करें। यदि आप किसी मरीज की देखभाल कर रहे हैं, तो बिना PPE किट या मास्क-दस्ताने के उनके करीब न जाएं।
- साफ-सफाई की कमी: हाथों को बार-बार साबुन से न धोना एक बड़ी गलती हो सकती है। कम से कम 20 सेकंड तक हाथ जरूर धोएं।
पश्चिम बंगाल में बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। नेपाल और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों ने भी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। याद रखें, निपाह से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रमाणित स्वास्थ्य सुझावों का पालन करें।
