देश की राजधानी दिल्ली के सत्ता के गलियारों से आज एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारत के प्रधानमंत्री के आवास और कार्यालय से जुड़ा एक ऐसा बदलाव हुआ है जो केवल नाम का नहीं, बल्कि एक ‘विचारधारा’ का है। जी हाँ, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) कॉम्प्लेक्स अब अपने पुराने नाम से नहीं, बल्कि ‘सेवातीर्थ’ (Sevatirth) के नाम से जाना जाएगा। यह फैसला अचानक क्यों लिया गया? ‘सेवातीर्थ’ नाम ही क्यों चुना गया? और इसका आम जनता और लोकतंत्र के लिए क्या सन्देश है? आज के इस आर्टिकल में हम इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से जानेंगे…|
क्या है पूरा मामला?
ताज़ा जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास और कार्यालय परिसर (PMO Complex) को अब आधिकारिक रूप से ‘सेवातीर्थ’ नाम दिया गया है।
आपको याद होगा कि पीएम मोदी का आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है (जिसे पहले रेस कोर्स रोड कहा जाता था)। अब इस पूरे परिसर की पहचान ‘शक्ति के केंद्र’ (Power Center) के रूप में नहीं, बल्कि ‘सेवा के स्थान’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की गई है।

‘सेवातीर्थ’ ही क्यों? जानिए इसके पीछे की खास वजह-
इस नाम को चुनने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह सोच है, जिसका जिक्र वो अक्सर अपने भाषणों में करते हैं।
- प्रधान सेवक की भावना: पीएम मोदी ने 2014 में सत्ता संभालते ही कहा था कि वो देश के ‘प्रधानमंत्री’ नहीं बल्कि ‘प्रधान सेवक’ हैं। ‘सेवातीर्थ’ नाम उसी ‘सेवा भाव’ को दर्शाता है।
- सत्ता नहीं, सेवा महत्वपूर्ण: सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री का कार्यालय केवल फाइलों और फैसलों की जगह नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र स्थान (तीर्थ) है जहाँ से देश की 140 करोड़ जनता की सेवा की जाती है।
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति: यह बदलाव उस कड़ी का हिस्सा है जिसके तहत राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’ और रेस कोर्स रोड को ‘लोक कल्याण मार्ग’ बनाया गया था। मकसद साफ़ है—अंग्रेजों के ज़माने की ‘हुकूमत’ वाली फीलिंग को खत्म करके भारतीय संस्कृति की ‘सेवा’ वाली फीलिंग लाना।
- महत्वपूर्ण बात: ‘तीर्थ’ शब्द का अर्थ होता है एक पवित्र स्थान। यानी, अब देश के सर्वोच्च कार्यालय को एक पवित्र सेवा स्थल का दर्जा दिया गया है।
पहले भी बदले जा चुके हैं कई नाम
यह पहली बार नहीं है जब मोदी सरकार ने लुटियंस दिल्ली (Lutyens’ Delhi) में प्रतीकात्मक बदलाव किए हैं। अगर हम पिछले कुछ सालों पर नज़र डालें तो एक पैटर्न दिखाई देता है:
- रेस कोर्स रोड (RCR): इसे बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया, ताकि यह जनता के कल्याण को समर्पित लगे।
- राजपथ (Rajpath): इसे ‘कर्तव्य पथ’ का नाम दिया गया, जो शासक (राजा) की जगह कर्तव्य (Duty) पर जोर देता है।
- अब PMO कॉम्प्लेक्स: जिसे अब ‘सेवातीर्थ’ बनाकर इसे सेवा का सर्वोच्च स्थान बताया गया है।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
- जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर #Sevatirth ट्रेंड करने लगा है।
- कुछ लोग इसे भारतीय संस्कृति की वापसी बता रहे हैं।
- वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि लोकतंत्र में सबसे ऊपर ‘जनता’ है और नेता केवल ‘सेवक’ हैं।
दोस्तों, नाम में क्या रखा है? शेक्सपियर ने भले ही यह कहा हो, लेकिन राजनीति और राष्ट्र निर्माण में ‘नाम’ और ‘प्रतीक’ बहुत मायने रखते हैं। ‘सेवातीर्थ’ नाम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि भारत का लोकतंत्र अब शासकों का नहीं, बल्कि सेवकों का है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का यह नया नाम आपको कैसा लगा? क्या आपको लगता है कि इस तरह के बदलावों से देश की कार्यशैली (Work culture) में फर्क पड़ता है?
अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
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