अनिल अग्रवाल, वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन, सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से ट्रेंडिंग हैं। इसका मुख्य कारण उनका हालिया ऐलान है जिसमें उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का 75% हिस्सा समाज कल्याण के लिए दान करने की प्रतिबद्धता जताई है। बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद यह भावुक और प्रेरणादायक निर्णय देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
अनिल अग्रवाल का दान घोषणा: पृष्ठभूमि और कारण
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान यह बड़ा फैसल घोषित किया।इंडिया एनर्जी वीक के साइडलाइन्स पर आयोजित ग्लोबल एनर्जी लीडर्स के साथ राउंडटेबल में भाग लेने के बाद उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट शेयर की।उन्होंने कहा, “मैं प्रमोटर की भूमिका छोड़कर ट्रस्टी बनूंगा और 75% संपत्ति समाज को लौटाऊंगा।” l यह वादा उनके इकलौते बेटे अग्निवेश की इच्छाओं को पूरा करने के लिए है, जो स्कीइंग एक्सीडेंट के बाद न्यूयॉर्क में कार्डियक अरेस्ट से 49 वर्ष की आयु में चल बसे।

अनिल अग्रवाल की नेट वर्थ फोर्ब्स के अनुसार लगभग 4.9 बिलियन डॉलर (करीब 41,000 करोड़ रुपये) है। इस हिसाब से दान की राशि हजारों करोड़ में होगी। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, हेल्थकेयर और सामाजिक कल्याण पर 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव पीएम मोदी के समक्ष रखा। पीएम ने उनके नुकसान पर संवेदना जताई और देशहित में काम जारी रखने की सलाह दी, जो अग्रवाल के लिए प्रेरणा बनी।
बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन: दर्दनाक कहानी
जनवरी 2026 में अनिल अग्रवाल को जीवन का सबसे काला दिन झेलना पड़ा जब उनके बेटे अग्निवेश का निधन हो गया।अमेरिका में स्कीइंग के दौरान चोट लगने के बाद माउंट सिनाई हॉस्पिटल में रिकवर कर रहे अग्निवेश को अचानक कार्डियक अरेस्ट आ गया।अनिल ने एक्स पर लिखा, “यह हमारे परिवार के लिए अभूतपूर्व दुख है। कोई शब्द इस पीड़ा का वर्णन नहीं कर सकते।अग्निवेश वेदांता की सब्सिडियरी तलवंडी साबो पावर के चेयरमैन थे और पिता के साथ सामाजिक कार्यों के सपने देखते थे।
इस व्यक्तिगत त्रासदी ने अनिल अग्रवाल को दान के वादे को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बेटे के साथ किया गया वादा निभाएंगे, जिसमें कोई बच्चा भूखा न रहे, महिलाओं को अवसर मिले और युवाओं को रोजगार सुनिश्चित हो। बिहार के पटना से निकलकर वैश्विक उद्योगपति बने अग्रवाल की यह यात्रा अब परोपकार की नई मिसाल बन रही है।
वेदांता ग्रुप पर प्रभाव और भविष्य की योजनाएं
इस घोषणा के बाद वेदांता के शेयरों में तेजी देखी गई, जो 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचे।ब्रोकरेज फर्मों ने डीमर्जर प्लान और मेटल सेक्टर की मजबूती पर सकारात्मक टिप्पणी की।अनिल अग्रवाल प्रमोटर पद छोड़ने के बावजूद ट्रस्टी के रूप में कंपनी से जुड़े रहेंगे, जो उत्तराधिकार की चिंताओं को कम करता है।
दान की रूपरेखा में शिक्षा और हेल्थकेयर पर फोकस होगा, खासकर ओडिशा जैसे क्षेत्रों में जहां वेदांता सक्रिय है। यह पहल स्वावलंबी भारत के सपने को साकार करेगी। अनिल अग्रवाल की सादगीपूर्ण जिंदगी जीने की इच्छा भी सराही जा रही है।

सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग का असर
एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #AnilAgarwalDan जैसे हैशटैग वायरल हो रहे हैं।लोग उनके फैसले को अंबानी-टाटा जैसे उद्योगपतियों से तुलना कर रहे हैं। यह ट्रेंडिंग न केवल दान पर बल्कि बिहार कनेक्शन के कारण भी है, क्योंकि अनिल पटना से हैं l न्यूज चैनल्स और यूट्यूब पर डिबेट्स चल रही हैं।
परोपकार की नई मिसाल
अनिल अग्रवाल का यह कदम भारतीय उद्योग जगत में परोपकार की नई लहर ला सकता है।उनके फैसले से लाखों जरूरतमंदों को लाभ मिलेगा।