बिहार विधानसभा स्पीकर: डॉ. प्रेम कुमार बने निर्विरोध अध्यक्ष, जानिए उनके सियासी सफर और बिहार की राजनीति पर असर

बिहार विधानसभा

बिहार की राजनीति में आज का दिन एक नई शुरुआत लेकर आया है। बिहार विधानसभा को अपना नया स्पीकर (अध्यक्ष) मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और गया टाउन से लगातार 8 बार के विधायक, डॉ. प्रेम कुमार को सर्वसम्मति से बिहार विधानसभा का नया स्पीकर चुन लिया गया है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी ने एक सुर में उनके नाम पर मुहर लगाई है।आइए जानते हैं इस खबर की पूरी जानकारी, डॉ. प्रेम कुमार का राजनीतिक सफर और इस फैसले के पीछे के सियासी मायने।

विधानसभा में आज क्या हुआ?

  • आज बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान स्पीकर पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। यह प्रक्रिया बिहार के लोकतांत्रिक मूल्यों की एक खूबसूरत तस्वीर पेश कर गई।
  • सर्वसम्मति से चयन: सदन में डॉ. प्रेम कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी सदस्यों ने ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया। कोई वोटिंग नहीं हुई, जो उनके कद और स्वीकार्यता को दर्शाता है।
  • सीएम और तेजस्वी ने दिखाया सम्मान: परंपरा के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, दोनों मिलकर नए स्पीकर को सम्मानपूर्वक उनके आसन (Chair) तक लेकर गए।
  • नए स्पीकर का वादा: पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि वे “निष्पक्ष” होकर सदन चलाएंगे और हर विधायक की आवाज को बराबर महत्व देंगे, चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का।
  • बिहार विधानसभा

कौन हैं डॉ. प्रेम कुमार?

  • अगर आप बिहार की राजनीति को समझते हैं, तो डॉ. प्रेम कुमार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके करियर पर एक नज़र:
  • गया का अभेद किला: प्रेम कुमार 1990 से लगातार गया टाउन (शहरी) सीट से जीतते आ रहे हैं। वे अब तक 8 बार विधायक बन चुके हैं।
  • मंत्री पद का अनुभव: वे बिहार सरकार में कृषि मंत्री और पीएचई (PHE) मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाल चुके हैं।
  • अति-पिछड़ा चेहरा: वे अति-पिछड़ा वर्ग (EBC – चंद्रवंशी समाज) से आते हैं, जो बिहार के वोट बैंक में एक बड़ा हिस्सा रखता है।
  • शिक्षा: वे पढ़ाई-लिखाई में भी आगे हैं और उनके पास पीएचडी (PhD) की डिग्री है, इसीलिए उन्हें ‘डॉक्टर’ प्रेम कुमार कहा जाता है।

बीजेपी ने प्रेम कुमार को ही क्यों चुना?

इस फैसले के पीछे एनडीए (NDA) की गहरी रणनीति दिखाई देती है:

  • जातीय समीकरण (Caste Arithmetic): बिहार में EBC वोट बैंक बहुत मायने रखता है। प्रेम कुमार को स्पीकर बनाकर बीजेपी ने चंद्रवंशी और अति-पिछड़ा समाज को एक बड़ा संदेश दिया है।
  • वरिष्ठता (Seniority): सदन चलाने के लिए अनुभव की ज़रूरत होती है। 35 साल का विधायकी अनुभव होने के कारण वे नियम-कानून के अच्छे जानकार हैं।
  • विवादरहित छवि: प्रेम कुमार की छवि एक शांत और गंभीर नेता की रही है, जिसे विपक्ष भी सम्मान देता है। यही वजह है कि आरजेडी (RJD) ने भी उनका विरोध नहीं किया।

अब आगे क्या ?

नए स्पीकर के आने से उम्मीद है कि विधानसभा का सत्र शांति से चलेगा। बिहार में अभी कई महत्वपूर्ण बिल और बजट पर चर्चा होनी है। ऐसे में डॉ. प्रेम कुमार की भूमिका एक “अंपायर” के तौर पर बहुत अहम होगी।

डॉ. प्रेम कुमार का स्पीकर बनना बिहार की राजनीति में स्थिरता का संकेत है। एक अनुभवी नेता के हाथ में कमान होने से सदन की गरिमा और बढ़ेगी।

बिहार विधानसभा

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: बिहार विधानसभा के नए स्पीकर कौन हैं?

उत्तर: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और गया से विधायक डॉ. प्रेम कुमार नए स्पीकर बने हैं।

प्रश्न 2: डॉ. प्रेम कुमार किस पार्टी से हैं?

उत्तर: वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से संबंध रखते हैं।

प्रश्न3: क्या स्पीकर के चुनाव में वोटिंग हुई थी?

उत्तर: नहीं, उनका चुनाव निर्विरोध (Unanimous) तरीके से हुआ है। विपक्ष ने भी उनका समर्थन किया।

आपकी क्या राय है?

क्या डॉ. प्रेम कुमार बिहार विधानसभा को बेहतर तरीके से चला पाएंगे? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं।

Read more