क्या कोई रक्षक ही भक्षक बन सकता है? बिहार के भोजपुर (आरा) में कुछ ऐसा ही हुआ है। आरा नगर थाना क्षेत्र में दो दिन पहले हुई 2.16 लाख रुपये की लूट की खबर ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी। लेकिन, जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो सच्चाई जानकर सबके होश उड़ गए। जिसे दुनिया ‘पीड़ित’ समझ रही थी, वही इस लूट का असली ‘मास्टरमाइंड’ निकला। भोजपुर पुलिस ने महज 48 घंटे के अंदर इस हाई-प्रोफाइल मामले का पर्दाफाश कर दिया है।
घटना की इनसाइड स्टोरी: क्या थी झूठी कहानी?
घटना की शुरुआत तब हुई जब आरा के एक पेट्रोल पंप कर्मी ने पुलिस को सूचना दी कि अपराधियों ने उससे 2 लाख 16 हजार रुपये लूट लिए हैं।
• कर्मी का दावा: उसने पुलिस को बताया कि वह पेट्रोल पंप का कैश जमा करने बैंक जा रहा था, तभी रास्ते में हथियारबंद अपराधियों ने उसे घेर लिया और पैसों से भरा बैग छीनकर फरार हो गए।
• दहशत का माहौल: दिनदहाड़े हुई इस “लूट” की खबर से व्यापारियों में डर का माहौल बन गया। पुलिस पर सवाल उठने लगे थे।

पुलिस को कैसे हुआ शक?
भोजपुर एसपी (SP) के निर्देश पर नगर थाना पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम (SIT) का गठन किया। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो उन्हें पेट्रोल पंप कर्मी की बातों में विरोधाभास (Inconsistency) नजर आया।
• CCTV फुटेज: पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले, तो वहां लूट जैसी कोई गतिविधि नजर नहीं आई।
• बदलते बयान: पूछताछ के दौरान पेट्रोल पंप कर्मी बार-बार अपने बयान बदल रहा था। कभी वह घटना का समय कुछ और बताता, तो कभी अपराधियों की संख्या अलग बताता।
• कड़ाई से पूछताछ: पुलिस ने जब “थर्ड डिग्री” का नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से कड़ाई से पूछताछ की, तो कर्मी टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
साजिश का पर्दाफाश: कर्ज और लालच
पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि पेट्रोल पंप कर्मी ने यह पूरी साजिश खुद रची थी।
• प्लानिंग: उसने अपने ही दोस्तों के साथ मिलकर यह प्लान बनाया था कि वह पैसे गायब कर देगा और इल्जाम अज्ञात अपराधियों पर लगा देगा।
• मकसद: शुरुआती जांच में पता चला है कि पैसों के लालच या किसी पुराने कर्ज को चुकाने के लिए उसने गबन की यह योजना बनाई थी।
• पैसे बरामद: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लूटे गए (गबन किए गए) पैसे भी बरामद कर लिए हैं।
पुलिस की बड़ी कामयाबी
भोजपुर पुलिस के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। अक्सर ऐसे मामलों में पुलिस महीनों तक अंधेरे में तीर चलाती रहती है, लेकिन नगर थाना पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और सूझबूझ का इस्तेमाल कर सिर्फ 48 घंटे में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। आरोपी कर्मी और उसके सहयोगियों को जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।
आरा की यह घटना उन व्यापारियों और मालिकों के लिए एक सबक है जो आंख मूंदकर अपने कर्मचारियों पर भरोसा करते हैं। वहीं, पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने आम जनता का विश्वास जीता है। अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथ उसकी गर्दन तक पहुंच ही जाते हैं।