नौकरी का झांसा देकर ‘साइबर गुलाम’ बनाए गए युवाओं को सरकार ने बचाया | पूरी खबर जानिए

साइबर गुलाम

Summary (Bullet Points में)

  • भारत ने म्यांमार से कई फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया।
  • युवाओं को थाईलैंड में आईटी नौकरी का झांसा देकर म्यांमार ले जाया गया था।
  • म्यांमार में उन्हें साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
  • पासपोर्ट जब्त कर उन्हें दिन में 16–18 घंटे काम करने पर मजबूर किया जाता।
  • कुछ पीड़ितों ने दूतावास से संपर्क किया, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू हुआ।
  • भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों की मदद से सभी को छुड़ाया गया।
  • सरकार अब तक 1,500+ भारतीयों को साइबर गिरोहों से बचा चुकी है।
  • विदेश मंत्रालय ने फर्जी नौकरी के गिरोहों से सावधान रहने की सलाह दी है।

भारत सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए म्यांमार में फंसे कई भारतीयों को सुरक्षित वापस ला दिया। ये वे लोग थे जिन्हें थाईलैंड में आईटी नौकरी का लालच देकर धोखे से म्यांमार भेजा गया था, जहां उन्हें न सिर्फ बंधक बनाकर रखा गया बल्कि साइबर अपराध करने के लिए मजबूर भी किया गया। सरकार के लगातार प्रयासों और बचाव अभियान की मदद से इन भारतीयों की घर वापसी संभव हुई।

साइबर गुलाम

कैसे फंसे भारतीय गलत जाल में?

यह पूरा जाल सोशल मीडिया, नकली जॉब पोर्टलों और स्थानीय एजेंटों के जरिए चलाया जाता था।युवाओं को बताया जाता कि थाईलैंड में बड़ी कंपनियों में आईटी नौकरियां हैं और वेतन भी आकर्षक है। पीड़ितों को टूरिस्ट वीज़ा पर थाईलैंड ले जाया जाता, फिर उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते और उन्हें जबरन म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में भेज दिया जाता। यहां उन्हें साइबर फ्रॉड, फिशिंग और क्रिप्टो से जुड़े ऑनलाइन घोटाले करवाए जाते थे।

म्यांमार में ‘साइबर गुलामी’ की भयावह हालत

म्यांमार पहुंचने के बाद इन युवाओं को हथियारबंद गिरोहों की निगरानी में रखा जाता था।

उनसे दिन में 16–18 घंटे काम करवाया जाता और मना करने पर उन्हें भूखा रखने, पीटने और मारने की धमकी तक दी जाती थी। कई पीड़ितों ने बताया कि उनसे दूसरे देशों के नागरिकों को धोखा देने के लिए फर्जी कॉल और ऑनलाइन मैसेजिंग का काम करवाया जाता था।

सरकार कैसे पहुंची इन तक?

कुछ पीड़ितों ने किसी तरह भारतीय दूतावास से संपर्क किया, जिसके बाद बचाव का रास्ता खुला।

भारत सरकार, म्यांमार प्रशासन और थाईलैंड के स्थानीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से इन लोगों को छुड़ाया गया। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के जरिए उन्हें थाईलैंड से भारत लाया गया। सरकार अब तक कुल 1,500 से अधिक भारतीयों को ऐसे साइबर गिरोहों से बचा चुकी है।

साइबर गुलाम

विदेश मंत्रालय की चेतावनी

विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि फर्जी आईटी नौकरी के नाम पर चल रहे ये गिरोह तेजी से भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि कोई भी विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले अच्छी तरह जांच कर ले और संदिग्ध एजेंटों से दूर रहे।

यह घटना क्यों है महत्वपूर्ण?

यह न सिर्फ मानव तस्करी का मामला है, बल्कि तेजी से फैलते अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की झलक भी है। इस बचाव अभियान ने दिखाया कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर सक्रिय है।

Read more