भारत में 6G ट्रायल की तैयारी पूरी: इंटरनेट की रफ्तार में आएगी क्रांतिकारी बढ़त

6G ट्रायल

संक्षिप्त सार में :

  • •भारत ने 6G ट्रायल की रूपरेखा तैयार कर ली है और 2030 तक 6G लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है।
  • •‘भारत 6G विज़न’ के तहत तेज, सस्ती और टिकाऊ कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
  • •सरकार ने “भारत 6G एलायंस” बनाया है ताकि स्वदेशी 6G तकनीक का विकास हो और 2035 तक 10% वैश्विक 6G पेटेंट भारत के नाम हों।
  • •6G ट्रायल 2028 में शुरू होंगे और IIT हैदराबाद ने शुरुआती 6G प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है|
  • •6G की स्पीड 5G से 50–1000 गुना तेज होगी और लगभग जीरो लैटेंसी वाला नेटवर्क मिलेगा।
  • •यह मिशन आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक 6G रेस में अग्रणी देशों की श्रेणी में ले जाएगा।

नई दिल्ली: भारत ने 5G के बाद अब 6G टेक्नोलॉजी की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने पुष्टि की है कि देश में 6G तकनीक के ट्रायल के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत 2030 तक 6G सेवाओं को शुरू कर दे और इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करे। भारत की यह तैयारी भविष्य की डिजिटल क्रांति का मार्ग प्रशस्त करने वाली मानी जा रही है।

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क्या है ‘भारत 6G विज़न’?

भारत सरकार का ‘भारत 6G विज़न’ डॉक्यूमेंट इस मिशन का आधार है, जिसे मार्च 2023 में जारी किया गया था। इसके तहत भारत में तेज, सस्ती और टिकाऊ कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने “भारत 6G एलायंस” का गठन किया है जो घरेलू उद्योग, IITs, शोध संस्थानों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर स्वदेशी 6G तकनीक विकसित करेगा। इसका उद्देश्य है कि 2035 तक 6G से जुड़े 10% वैश्विक पेटेंट भारत के नाम हों।

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6G ट्रायल कब से शुरू होंगे?

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में 6G तकनीक के ट्रायल 2028 से शुरू किए जा सकते हैं, जबकि 2030 तक इसे आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। इस दिशा में IIT हैदराबाद ने एक शुरुआती 6G प्रोटोटाइप तैयार किया है जो जमीन और सैटेलाइट दोनों प्रकार की कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। इसके साथ ही देश में 100 से ज्यादा 5G लैब भी बनाई जा चुकी हैं, जो 6G रिसर्च को मजबूत आधार दे रही हैं।

6G की स्पीड कितनी होगी?

6G को लेकर उम्मीदें काफी बड़ी हैं। यह माना जा रहा है कि 6G की स्पीड 5G की तुलना में 50 से 1000 गुना तेज होगी। इसके साथ ही लगभग जीरो लैटेंसी वाला नेटवर्क मिलेगा। इतनी तेज और भरोसेमंद कनेक्टिविटी से भविष्य की हाई-टेक सुविधाएँ वास्तविकता बन जाएंगी—जैसे रिमोट सर्जरी, एडवांस रोबोटिक्स, हाई-टेक स्मार्ट सिटी, AR/VR आधारित इमर्सिव अनुभव और रियल-टाइम IoT सिस्टम।

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आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

6G मिशन केवल तकनीक का विकास नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूत करेगा। इसके तहत सरकार स्वदेशी रिसर्च, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है ताकि भारत दूरसंचार क्षेत्र में एक बड़े निर्यातक के रूप में उभरे। यह पहल भारत को 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वैश्विक 6G रेस में भारत की स्थिति

दुनिया के कई देश जैसे चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया 6G पर काम कर रहे हैं। भारत ने भले ही थोड़ी देर से शुरुआत की हो, लेकिन तेज़ी से चल रहे रिसर्च और तैयारियों के कारण भारत अब 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत दावेदार बनता जा रहा है।

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