New Aadhaar Changes, आख़िर क्या बदल गया आधार कार्ड में?जान लीजिये नहीं तो होगी मुश्किल………

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भारत में UIDAI (Unique Identification Authority of India) ने एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। लीक खबरों के मुताबिक, नए Aadhaar Card में केवल कार्डधारक का नाम और QR-कोड ही मुद्रित रहेगा; पता, जन्मतिथि, फोन नंबर या 12-अंकीय आधार संख्या जैसी संवेदनशील जानकारियाँ कार्ड से हटा दी जाएँगी।

क्यों किया जा रहा है बदलाव?

हमेशा बढ़ती जा रही है आधार कार्ड की ऑफलाइन फोटोकॉपी और गलत वेरिफिकेशन की घटनाएँ, जो डेटा लीक और धोखाधड़ी का कारण बन रही हैं।

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UIDAI ने कहा है कि “कार्ड पर जितनी कम जानकारी होगी, उतना कम दुष्प्रयोग होगा” — इसलिए केवल फोटो + QR कोड के ज़रिए ही पहचान की पुष्टि करना सुरक्षित उपाय माना जा रहा है।

इस बदलाव से क्या-क्या लाभ होंगे?

अब आप किसी सार्वजनिक जगह या सेवा में अपनी आधार कार्ड की फोटोकॉपी नहीं दे पाएँगे – जिससे पहचान चोरी या दुष्प्रयोग का खतरा बहुत कम होगा।

बस आपका नाम और QR-कोड सामने होगा; स्कैन होकर पुष्टि होगी कि यह कार्ड “असली” है।आपकी प्राइवेसी बेहतर तरीके से सुरक्षित होगी, और निजी जानकारी अनावश्यक रूप से सार्वजनिक नहीं होगी।

अगला कदम क्या है?

UIDAI ने दिसंबर 2025 में इस नए फॉर्मेट को लागू करने का लक्ष्य रखा है। वही समय है जब एक नई ऐप भी लॉन्च होने की संभावना है, जिससे QR-कोड स्कैन और डी-वाईात्रा जैसे वेरिफिकेशन काम आसान होंगे।

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पश्चिम बंगाल में 34 लाख आधार कार्ड ‘मृत’ पाए गए, TMC ने बताया “चुनावी साजिश”—जानिए पूरा मामला

आधार कार्ड

पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को सूचित किया है कि करीब 34 लाख आधार नंबर ऐसे हैं, जिन्हें रिकॉर्ड में “मृत” पाया गया है। यह जानकारी सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे भाजपा और केंद्र सरकार द्वारा “पहले से तय चुनावी हेरफेर की साजिश” करार दिया है, जबकि केंद्र और UIDAI ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। आइए पूरा मामला विस्तार से समझते हैं—

क्या है आधार वाला पूरा विवाद?

  • UIDAI की ओर से एक रिपोर्ट में कहा गया कि:
  • 34 लाख आधार कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर सक्रिय थे, जो अब जीवित नहीं हैं।
  • 13 लाख से अधिक मृत व्यक्तियों का आधार कार्ड कभी बना ही नहीं था।
  • यह आंकड़े 2009 से शुरू हुए आधार रजिस्ट्रेशन के डेटा पर आधारित हैं।

यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) अभियान का हिस्सा है, जिसमें मतदाता सूची से फर्जी, डुप्लीकेट या अनुपस्थित मतदाताओं को हटाया जा रहा है।

UIDAI का कहना है कि किसी “जीवित व्यक्ति” का आधार कार्ड रद्द नहीं किया गया है—सिर्फ मृत व्यक्तियों के आधार रिकॉर्ड को अपडेट किया गया है।

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TMC क्यों नाराज़ है?

  • तृणमूल कांग्रेस ने UIDAI की इस कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताई है। टीएमसी का आरोप है कि
  • यह कदम मतदाता सूची से जीवित लोगों के नाम हटाने की योजना है।
  • इसे “Silent Invisible Rigging” यानी शांत, अदृश्य चुनावी हेरफेर बताया गया।
  • पार्टी ने कहा कि BJP “भूत मतदाता” बनाकर चुनाव में गड़बड़ी करना चाहती है।

TMC प्रवक्ताओं ने दावा किया कि अगर किसी भी असली मतदाता का नाम हटाया गया तो सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई होगी।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र को घेरा और कहा— केंद्र सरकार लोगों को कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने के लिए आधार कार्ड “निष्क्रिय” कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस कदम पर चिंता जताई। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे लोगों को वैकल्पिक पहचान पत्र देगी, ताकि उन्हें किसी सरकारी सुविधा के लिए आधार पर निर्भर न रहना पड़े।

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उन्होंने इसे “फासीवादी साजिश” तक कहा।

भाजपा और UIDAI का जवाब विपक्ष नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि “अगर किसी का कार्ड गलती से प्रभावित हुआ है तो 24 घंटे के भीतर एक्टिवेट कर दिया जाएगा।” UIDAI ने साफ कहा कि— “किसी भी आधार नंबर को रद्द नहीं किया गया है, सिर्फ मृत व्यक्तियों के रिकॉर्ड अपडेट किए गए हैं।” केंद्र ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम जारी है।अब यह मामला राज्य बनाम केंद्र की राजनीति का नया मोर्चा बन गया है। TMC इसे चुनावी साजिश बता रही है, जबकि केंद्र कह रहा है कि यह केवल “डेटा क्लीनिंग” की प्रक्रिया है। हालांकि इतनी बड़ी संख्या (34 लाख) में आधार कार्ड “मृत” पाए जाने ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है और आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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