नोएडा में बढ़ता प्रदूषण: कक्षा 5 तक के स्कूल हाइब्रिड मोड में — पूरी खबर पढ़ें

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। इसी के चलते नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्कूलों को कक्षा 5 तक हाइब्रिड मोड में चलाने का आदेश जारी किया गया है। प्रशासन ने यह फैसला बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है।

क्या है नया आदेश?

गौतम बुद्ध नगर के जिला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि कक्षा 1 से 5 तक की कक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन—दोनों विकल्पों में चलाई जाएंगी। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं या घर से ऑनलाइन क्लास में शामिल करवा सकते हैं।

क्यों हुआ ये फैसला?

बीते हफ्ते से नोएडा का AQI 400 से ऊपर जा रहा है, जो ‘सीवियर’ श्रेणी माना जाता है। ऐसी स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और दमा/एलर्जी के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक है।

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इसी वजह से:

  • सांस की समस्या बढ़ने लगी
  • बच्चों में खांसी और आंखों में जलन की शिकायत बढ़ी
  • स्कूलों में उपस्थिति घटने लगी
  • प्रशासन ने स्थिति गंभीर होते देख हाइब्रिड मोड लागू किया।

GRAP-3 लागू होने के बाद बढ़ा एक्शन दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-3 लागू कर दिया गया है।

इसमें कई सख्त कदम उठाए जाते हैं:

  • निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियों पर रोक
  • धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव
  • डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध
  • स्कूलों के लिए हाइब्रिड मोड की अनिवार्यता
  • GRAP का उद्देश्य प्रदूषण को धीरे-धीरे कम करना और हालात को सामान्य बनाना है। स्कूलों में पहले से चल रहे एहतियाती कदम

हाइब्रिड मोड लागू करने से पहले ही स्कूलों ने कई कदम उठाए थे:

  • सुबह की प्रार्थना सभा रोकी
  • खेल और आउटडोर गतिविधियाँ बंद
  • बच्चों को बाहर कम समय बिताने की सलाह
  • एयर प्यूरीफायर चालू किए गए फिर भी AQI में सुधार ना होने पर हाइब्रिड मोड जरूरी हो गया।

दिल्ली व गाजियाबाद में भी ऐसे ही आदेश दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम के स्कूलों को भी कक्षा 5 तक के लिए हाइब्रिड मोड लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। कई जगहों पर प्राथमिक कक्षाएँ पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई हैं।

अभिभावकों की क्या प्रतिक्रिया?

कई अभिभावकों ने राहत जताई है। उनका कहना है कि: “बच्चों को ऐसी हवा में बाहर भेजना सही नहीं था। ऑनलाइन क्लास बेहतर विकल्प है।” कुछ अभिभावक स्कूल बंद होने से पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता भी जता रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आदेश का समर्थन कर रहे हैं।

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दिल्ली में जब हवा हुई जहरीली- (आया Breath Rights)

दिल्ली

प्रदूषण की तबाही: दिल्ली की आबो हवा में घुटन रविवार को राजधानी India Gate में हजारों युवा, माता-पिता और पर्यावरण कार्यकर्ता एक साथ जमा हुए, क्योंकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता चरम स्तर पर पहुँच चुकी है। AQI कई इलाकों में 400 के ऊपर दर्ज हुआ, जिससे लोगों ने यह सवाल उठाया—“हमें साँस लेने का हक़ क्यों नहीं मिला?”
भीषण स्मॉग में बच्चों, बुज़ुर्गों और रास्ते-पर काम करने वालों को सबसे ज़्यादा ख़तरा बताया गया, और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से “कार्रवाई की लड़ाई” मांगी, सिर्फ बयान नहीं।

गुस्सा, गिरफ्तारी और प्रश्न

दिल्ली

प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने “अनधिकृत सभा” के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लिया।
नफे-नुकसान का खेल यहाँ सिर्फ गाड़ियों और पटाखों का नहीं—बल्कि निर्माण-धूल, ठेका-काम, वेस्ट-जलाना और प्रशासन की निष्क्रियता का भी है। सवाल उठता है: क्या सिर्फ सरकार दोषी है, या हम खुद अपनी भूमिका निभा पाए हैं?

हवा को जवाब देने की देर

यह धरना सिर्फ एक आंदोलन नहीं—यह चेतावनी है कि दिल्ली जब तक “साँस लेने-का अधिकार” नहीं देगा, सामाजिक स्वास्थ्य संकट गहराता रहेगा। अब वक्त है सरकार और नागरिक दोनों की सहभागिता की—क्या इसे सिर्फ अगले सर्दियों का मौसम कहकर टाल देंगे या इस बार परिवर्तन की दिशा चुनेंगे?

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