एयरबस A320 क्राइसिस:क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान में उड़ते विशाल हवाई जहाजों को सिर्फ़ एक सूरज की किरण कैसे रोक सकती है.हाल ही में, विमान जगत में एक ऐसी ही अभूतपूर्व घटना हुई है, जिसने दुनिया भर की एयरलाइंस को हिलाकर रख दिया। 27 नवंबर 2025 को, विमान बनाने वाली दिग्गज कंपनी एयरबस ने अपने सबसे लोकप्रिय A320 फैमिली एयरक्राफ्ट के लिए एक इमरजेंसी सॉफ्टवेयर अपडेट की घोषणा की। इसकी वजह –
एक बेहद गंभीर तकनीकी खामी, जिसमें सूरज से निकलने वाले तेज़ रेडिएशन (सौर विकिरण) से प्लेन का अहम फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम खराब हो सकता है।सोचिए, दुनिया के लगभग 6000 विमान, जिनमें आप-हम अक्सर सफर करते हैं, अचानक ग्राउंडेड हो गए!

जड़ कहाँ है-
एक साधारण उड़ान जो डर में बदल गई एयरबस A320 क्राइसिस की पूरे घटनाक्रम शुरुआत 30 अक्टूबर 2025 को हुई। अमेरिका में, जेटब्लू (JetBlue) की फ्लाइट 1230 ताम्पा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास थी। अचानक, पायलट के कोई इनपुट दिए बिना ही, A320 प्लेन अप्रत्याशित रूप से नीचे की ओर झुक गया।
यूएस नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की गहन जाँच शुरू हुई। उन्होंने पाया कि यह हादसा Elevator Aileron Computer (ELAC) के नए सॉफ्टवेयर वर्जन L104 में स्विचिंग के दौरान हुआ। एयरबस ने बाद में
चौंकाने वाला सच कबूल किया: तीव्र सौर विकिरण ने फ्लाइट कंट्रोल डेटा को भ्रष्ट कर दिया था! यह कोई साधारण बात नहीं थी। सूरज से निकलने वाले एनर्जेटिक पार्टिकल्स, जिन्हें हम सोलर फ्लेयर्स कहते हैं, सीधे ELAC कंप्यूटर को प्रभावित कर रहे थे। यह वल्नरेबिलिटी इतनी खतरनाक थी कि यह प्लेन के इलेवेटर्स को अनियंत्रित गति दे सकती थी, जिससे विमान की स्ट्रक्चरल लिमिट्स (ढाँचागत सीमाएँ) भी पार हो सकती थीं| एयरबस A320 फैमिली, जो 1984 में लॉन्च हुआ, दुनिया का पहला ‘फ्लाई-बाय-वायर’ कमर्शियल जेट है। अब, इसी टेक्नोलॉजी में आई एक नई खामी ने एविएशन सेफ्टी पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
वैश्विक असर: 6000 प्लेन और यात्रियों की चिंता
एयरबस के इस ऐलान के बाद, यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) और दुनिया भर के रेगुलेटर्स ने तुरंत इमरजेंसी एयरवर्थिनेस डायरेक्टिव जारी कर दिए। इसका सीधा मतलब था—जब तक अपडेट नहीं, तब तक उड़ान नहीं!

कौन-कौन प्रभावित हुआ-
A318, A319, A320, A321 और इनके neo वेरिएंट्स समेत पूरी A320 फैमिली।
दुनिया भर में लगभग 6000 विमान। अच्छी खबर यह है कि ज़्यादातर नए विमानों में यह अपडेट केवल 30 मिनट का सॉफ्टवेयर रोल बैक है। लेकिन, 1000 से ज़्यादा पुराने मॉडल्स में तो पूरा ELAC कंप्यूटर ही बदलना पड़ेगा, जिसमें 2-3 दिन लग सकते हैं।अमेरिकन एयरलाइंस, डेल्टा, easyJet जैसे बड़े ऑपरेटर्स ने तुरंत मेंटेनेंस विंडो में काम शुरू कर दिया। यह घटना तब हुई जब अमेरिका और यूरोप में थैंक्सगिविंग ट्रैवल सीजन चल रहा था, जिससे कई उड़ानें रद्द हुईं या देरी से चलीं।
भारत में क्या हुआ?
DGCA का कड़ा आदेश ,भारत में भी इसका बड़ा असर दिखा। 28 नवंबर को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एक मैंडेटरी सेफ्टी डायरेक्टिव जारी कर दिया एयरबस A320 क्राइसिस को देखते हुए.
आदेश साफ था: प्रभावित प्लेन को अपडेट पूरा होने तक उड़ान भरने की अनुमति नहीं है।
• इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप (विस्तारा, एयर इंडिया आदि) के कुल 338 विमान प्रभावित थे।
• अच्छी बात यह रही कि भारतीय एयरलाइंस ने तेज़ी दिखाई। 30 नवंबर की सुबह तक 56% से अधिक विमानों का अपडेट पूरा होने की उम्मीद जताई गई।
• इंडिगो ने 143 विमानों को अपडेट कर लिया और कैंसिलेशन को न्यूनतम रखा। एयर इंडिया ने भी कहा कि बड़े शेड्यूल में कोई डिसरप्शन नहीं है।
भारत के बड़े हब्स—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु—में रात भर इंजीनियर्स ने काम किया ताकि यात्रियों को ज़्यादा परेशानी न हो।
भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?
यह घटना कई मायनों में बोइंग 737 MAX की ग्राउंडिंग की याद दिलाती है, जो सॉफ्टवेयर फेलियर के कारण हुई थी।एयरबस ने कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है और सभी ऑपरेटर्स समय पर काम पूरा करेंगे। मगर, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस घटना से एविएशन इंडस्ट्री में ‘स्पेस वेदर रिस्क’ यानी अंतरिक्ष के मौसम से होने वाले खतरों पर नए सिरे से रिसर्च शुरू होगी। आपको बता दें, 2025 में सौर गतिविधि अपने 11 साल के चक्र के चरम पर है, इसलिए यह खतरा फिलहाल बढ़ गया है।
यह क्राइसिस हमें दिखाता है कि टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कितनी भी बढ़ जाए, हमें प्राकृतिक शक्तियों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। विमानन सुरक्षा अब सिर्फ़ इंजीनियरिंग की नहीं, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान की भी मांग करती है।