अगर आपका बच्चा भी स्कूल से आते ही बैग फेंककर सबसे पहले Instagram पर रील स्क्रॉल करता है या घंटों YouTube और Snapchat पर चिपका रहता है, तो यह खबर आपके लिए किसी झटके से कम नहीं है।
भारत में पहली बार एक राज्य सरकार ऐसा कड़ा कानून लाने जा रही है, जो आपके बच्चों की डिजिटल दुनिया में ‘ताला’ लगा देगा। जी हाँ, प्रस्ताव के मुताबिक, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social media का इस्तेमाल पूरी तरह गैर-कानूनी (Illegal) हो सकता है।
न अकाउंट बना सकेंगे, न चला सकेंगे। लेकिन यह कानून कौन सा राज्य ला रहा है? और क्या यह वाकई संभव है? क्या ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी डिजिटल स्ट्राइक होने वाली है? आइए, इस रिपोर्ट में सब कुछ विस्तार से जानते हैं।

वो कौन सा राज्य है जो कर रहा है ये ‘बड़ी तैयारी’?
सस्पेंस खत्म करते हैं। बच्चों की मेंटल हेल्थ को बचाने के लिए यह क्रांतिकारी पहल करने वाला राज्य है— आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)।
राज्य के आईटी मंत्री और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश (Nara Lokesh) ने हाल ही में दावोस (Davos) में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की बैठक में इसका बड़ा संकेत दिया है।
नारा लोकेश ने मीडिया से साफ कहा:
“एक तय उम्र से कम के बच्चों को सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए। वे वहां जो देखते-सुनते हैं, उसे सही ढंग से समझ नहीं पाते। सही और गलत का फर्क करना उनके लिए मुश्किल होता है। इसलिए अब एक मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।”
ऑस्ट्रेलिया मॉडल: कहाँ से आया यह आइडिया?
आंध्र प्रदेश सरकार यह कानून हवा में नहीं बना रही, बल्कि इसके पीछे एक ठोस ग्लोबल रिसर्च है। नारा लोकेश ने बताया कि वे ऑस्ट्रेलिया (Australia) के नए कानून की स्टडी कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में क्या हुआ?
आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया है। वहां की सरकार ने इसे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘जहर’ माना है। अगर सोशल मीडिया कंपनियां (जैसे Meta, TikTok) इसे रोकने में फेल होती हैं, तो उन पर भारी-भरकम जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
अब आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल को भारत में लागू करने की फिराक में है।
कौन-कौन से ऐप्स हो सकते हैं बंद? (The Ban List)
अगर यह कानून आंध्र प्रदेश में लागू होता है (और बाद में शायद पूरे देश में), तो 16 साल से कम उम्र के बच्चों की पहुंच इन लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स से खत्म हो जाएगी:
- Instagram & Facebook: रील और पोस्ट्स की दुनिया बंद।
- YouTube: सबसे बड़ा झटका, क्योंकि बच्चे सबसे ज्यादा वक्त यहीं बिताते हैं।
- Snapchat & X (Twitter): चैटिंग और ओपिनियन शेयरिंग बंद।
- TikTok: (भारत में पहले से बैन है, लेकिन ग्लोबल स्तर पर यह भी इसमें शामिल है)।
नया अकाउंट तो बनेगा ही नहीं, साथ ही जो पुराने अकाउंट्स चल रहे हैं, उन्हें भी वेरीफिकेशन के जरिए बंद किया जा सकता है।
आखिर सरकार को इतना सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा?
यह फैसला सिर्फ मनमानी नहीं है, इसके पीछे के आंकड़े डराने वाले हैं। रिसर्च बताती है कि सोशल मीडिया बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार बना रहा है:
- डिप्रेशन और एंग्जाइटी: इंस्टाग्राम पर दूसरों की ‘परफेक्ट लाइफ’ देखकर बच्चों में हीन भावना (Inferiority Complex) आ रही है।
- नींद की कमी: देर रात तक चैटिंग और स्क्रॉलिंग से बच्चों की नींद और पढ़ाई बर्बाद हो रही है।
साइबर बुलिंग (Cyberbullying): ऑनलाइन छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे कई बार बच्चे आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। - पोर्नोग्राफी और हिंसा: कम उम्र में बच्चे ऐसी सामग्री (Content) के संपर्क में आ रहे हैं जो उनके दिमाग को प्रदूषित कर रही है।

चुनौतियां: क्या यह भारत में लागू हो पाएगा? (Analysis)
इरादा नेक है, लेकिन भारत जैसे देश में इसे लागू करना ‘लोहे के चने चबाने’ जैसा है।
उम्र की पुष्टि (Age Verification): सरकार कैसे पता लगाएगी कि फोन चलाने वाला बच्चा है या बड़ा? क्या आधार कार्ड लिंक करना होगा? इससे प्राइवेसी (Privacy) का खतरा बढ़ सकता है।
VPN का इस्तेमाल: आज के बच्चे टेक्नोलॉजी में बड़ों से आगे हैं। वे VPN या माता-पिता के नाम से आईडी बनाकर कानून को चकमा दे सकते हैं।
माता-पिता का सहयोग: सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या भारतीय माता-पिता खुद अपनी आईडी बच्चों को देना बंद करेंगे?
कड़वी दवा, लेकिन जरूरी इलाज
आंध्र प्रदेश की यह पहल एक बहस का विषय जरूर है, लेकिन इसे नकारा नहीं जा सकता। जिस तरह हम बच्चों को शराब या सिगरेट नहीं देते क्योंकि वो उनके लिए हानिकारक है, उसी तरह आज का सोशल मीडिया भी किसी ‘डिजिटल नशे’ से कम नहीं है।
हो सकता है कि आने वाले समय में आंध्र प्रदेश के बाद यूपी, बिहार और दिल्ली जैसे राज्य भी इस राह पर चल पड़ें।
आपका फैसला:
एक माता-पिता या जागरूक नागरिक होने के नाते, क्या आप इस बैन का समर्थन करते हैं? क्या आपको लगता है कि 16 साल की उम्र सीमा सही है?
कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें—हां या ना?