असम का वीर पुत्र, भारत का गौरव — क्यों खास है Lachit Divas? हर साल 24 नवंबर को असम और पूरे भारत में Lachit Divas मनाया जाता है। इस दिन को अहोम साम्राज्य के महान सेनापति, रणनीतिकार और असम की अस्मिता के प्रतीक लाचित बोरफुकन की जयंती के रूप में याद किया जाता है।
1671 के सराइघाट युद्ध में लाचित बोरफुकन ने अद्भुत रणनीति, नेतृत्व और साहस का प्रदर्शन करते हुए विशाल मुगल सेना को ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर निर्णायक हार दी—जो भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे चमत्कारिक विजय अध्यायों में से एक माना जाता है। 2025 में यह जयंती असम, अरुणाचल, नागालैंड और विदेशों में बसे असमिया समुदायों द्वारा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय गौरव के उत्सव के रूप में बेहद भव्य रूप से मनाई जा रही है।
राज्यभर में भव्य समारोह—Assamese Pride की गूंज
गुवाहाटी के शिल्पग्राम से लेकर डिब्रूगढ़, जोरहाट, तेजपुर तक, पूरे राज्य में हज़ारों लोगों ने लाचित बोरफुकन को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने—
✔ Lachit Gold Medal Leadership Award
✔ ब्रह्मपुत्र नदी पर फ्लोटिंग परेड
✔ विशेष जनसभा और सांस्कृतिक प्रदर्शन
के ज़रिये लाचित के शौर्य को सलाम किया।

स्कूली बच्चों, NCC कैडेट्स, कलाकारों और प्रशासनिक अधिकारियों ने—
• नाट्य मंचन
• हथियार (हेंगडांग) प्रदर्शन
• कवि सम्मेलन
• वाद-विवाद प्रतियोगिता
के माध्यम से लाचित की जीवनगाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाया।
सोशल मीडिया पर #LachitDivas #AssamPride #Lachit2025 देशभर में ट्रेंड करता रहा।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश—Leadership, Courage और Nation First!
लाचित दिवस सिर्फ़ ऐतिहासिक उत्सव नहीं, बल्कि नेतृत्व, अनुशासन, सामरिक समझ, राष्ट्ररक्षा और आत्मसम्मान की एक जीवित सीख है।लाचित का आदर्श संदेश हर भारतीय युवा के लिए आज भी उतना ही प्रासंगिक है—“देश पहले, हम बाद में। कर्तव्य ही सबसे बड़ा धर्म है।”
उनकी जयंती पर असम और पूरा देश संकल्प ले रहा है कि लाचित बोरफुकन की तरह—
✔ राष्ट्र की रक्षा
✔ संस्कृति का सम्मान
✔ और न्यायपूर्ण नेतृत्व
हमेशा सर्वोपरि रहेंगे।