Bangladesh में हमारा खून पानी से भी सस्ता है।” यह शब्द उस बेबस हिंदू के हैं जिसका घर जल रहा है। पिछले कुछ महीनों में Bangladesh से आ रही तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं—जलाए गए मंदिर, टूटी हुई मूर्तियां और पलायन को मजबूर परिवार। लेकिन क्या यह सब अचानक शुरू हुआ है क्योंकि मीडिया अब ज्यादा एक्टिव है? या फिर यह एक पुरानी बीमारी है जो अब नासूर बन चुकी है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या बांग्लादेश अब किसी भी भारतीय (Indian) के लिए सुरक्षित नहीं है, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान?
आज के इस ब्लॉग में हम बांग्लादेश के इस सुलगते हुए सच की 5 परतों को खोलेंगे।
क्या यह हिंसा “अचानक” बढ़ी है? (The Current Scenario)
जी हाँ, यह सच है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना (Sheikh Hasina) की सरकार गिरने के बाद हिंसा ने एक भयानक रूप ले लिया है। मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की अंतरिम सरकार आने के बाद से कट्टरपंथी तत्व बेकाबू हो गए हैं।

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक:
Dipu Chandra Das और Khokon Chandra Das जैसे आम नागरिकों की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई।
Amnesty International और UN जैसी संस्थाओं ने माना है कि वहां अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।
यह हिंसा अब सिर्फ ‘राजनैतिक’ नहीं रही, बल्कि पूरी तरह से ‘सांप्रदायिक’ (Communal) हो चुकी है। उपद्रवी अब चुन-चुनकर हिंदू घरों और व्यवसायों को निशाना बना रहे हैं।
1947 से 2025: एक पूरी कौम का गायब होना (The Vanishing Population)
आपका यह सवाल बहुत गहरा है कि “क्या यह हमेशा से होता आया है?” इसका जवाब आंकड़ों में छिपा है, जो बेहद डरावना है।
जब 1947 में देश का बंटवारा हुआ था, तब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं की आबादी लगभग 28-30% थी।
1951 में यह घटकर 22% रह गई।
1971 की आजादी के वक्त यह करीब 19-20% थी।
और आज? 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू आबादी सिर्फ 7.95% बची है।
यह गिरावट बताती है कि यह कोई “नई घटना” नहीं है। यह एक ‘Slow Genocide’ (धीमा नरसंहार) है। हिंसा, भेदभाव और ‘Vested Property Act’ जैसे कानूनों के जरिए हिंदुओं की जमीनें छीनी गईं, जिससे वे या तो मारे गए या भारत भाग आए।
क्या भारतीयों (Indians) के लिए भी खतरा है?
यहाँ आपको एक बहुत बड़ा अंतर समझने की जरूरत है: ‘बांग्लादेशी हिंदू’ और ‘भारतीय नागरिक’ दो अलग चीजें हैं।
बांग्लादेशी हिंदू: ये वहां के नागरिक हैं, लेकिन इन्हें धर्म की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।
भारतीय नागरिक (You & Me): अभी बांग्लादेश में सिर्फ ‘हिंदू विरोधी’ लहर नहीं, बल्कि ‘भारत विरोधी’ (Anti-India) लहर भी चल रही है।
कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन भारत को अपना दुश्मन मानते हैं।
‘Boycott India’ जैसे कैंपेन चलाए जा रहे हैं।
यहाँ तक कि भारतीय वीज़ा सेंटर्स (Visa Centers) को भी धमकियां मिली हैं और काम रोका गया है।
इसलिए, अगर आप भारतीय हैं (चाहे हिंदू हों या मुस्लिम), तो मौजूदा हालात में वहां जाना सुरक्षित नहीं है। खुद Indian Cricket Team ने भी सुरक्षा कारणों से वहां जाने से मना कर दिया है।
मीडिया का रोल: सच या हाइप?
कई लोग सोचते हैं कि “मीडिया नमक-मिर्च लगा रहा है।” लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।
इस बार खबरें सिर्फ भारतीय मीडिया से नहीं, बल्कि खुद बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठनों (जैसे Ain o Salish Kendra) से आ रही हैं। सोशल मीडिया के दौर में अब वीडियो छिपाना मुश्किल है। जो वीडियो आप देख रहे हैं—भीड़ का तांडव, रोते हुए लोग—वे असली हैं और Human Rights Watch ने भी इनकी पुष्टि की है। यह ‘हाइप’ नहीं, बल्कि ‘जमीनी हकीकत’ है।
भविष्य क्या है? (What Lies Ahead)
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश तेजी से एक कट्टरपंथी इस्लामी राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, जैसा हाल पाकिस्तान का है।
वहां की नई सरकार कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही है।
हिंदुओं के लिए सरकारी नौकरियों और समाज में जगह लगातार सिकुड़ रही है।
अगर यही हाल रहा, तो अगले 20-30 सालों में बांग्लादेश में हिंदू आबादी शायद 1-2% पर सिमट कर रह जाएगी, जैसा अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हुआ।

क्या अल्पसंख्यक रह पाएंगे सुरक्षित?
बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह सिर्फ एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों की हत्या है। यह कहना गलत नहीं होगा कि फिलहाल बांग्लादेश अपने अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए “रहने लायक” नहीं बचा है। और एक भारतीय होने के नाते, हमें भी वहां की यात्रा करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।
आपकी राय: क्या भारत सरकार को इस मुद्दे पर और सख्त कदम उठाने चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।