मौसम बदल रहा है, बच्चों को खांसी-जुकाम होना आम बात है। ऐसे में हम बिना सोचे-समझे मेडिकल स्टोर से ‘कफ सिरप’ (Cough Syrup) खरीद लाते हैं। हमें लगता है कि इससे बच्चे को आराम मिलेगा। लेकिन ज़रा रुकिए! क्या आपको पता है कि जिस शीशी को आप ‘अमृत’ समझकर बच्चे के मुंह से लगा रहे हैं, उसमें एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol) जैसा जानलेवा जहर हो सकता है?
जी हाँ, यह डराने वाली बात नहीं, बल्कि बिहार के हाजीपुर (Hajipur) से आई एक खौफनाक हकीकत है। ड्रग विभाग ने वहां की एक बड़ी दवा कंपनी पर ताला जड़ दिया है। वजह जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।

हाजीपुर की दवा कंपनी में क्या मिला? (The Horror Story)
बिहार का हाजीपुर शहर, जो फार्मा हब माना जाता है, अब शक के घेरे में है। खबरों के मुताबिक, हाजीपुर स्थित एक दवा निर्माण इकाई (Pharmaceutical Unit) में छापेमारी के दौरान कफ सिरप के सैंपल फेल हो गए हैं। जांच में पाया गया कि बच्चों की खांसी के सिरप में ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ और ‘डायथिलीन ग्लाइकॉल’ की मात्रा मिली है। यह वही रसायन है जिसकी वजह से पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में दर्जनों बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी।
कार्रवाई:
प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए उस कंपनी के विनिर्माण (Manufacturing) पर रोक लगा दी है और बाज़ार से उस बैच की सारी दवाइयां वापस मंगवाने का आदेश दिया है।
आखिर कौन सी है वो दवा? (Check Your Medicine Box Now)
यह सबसे जरूरी हिस्सा है। अगर आपके घर में कोई भी कफ सिरप रखा है, तो तुरंत उठिए और उसकी बोतल का लेबल (Label) चेक कीजिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस सिरप में यह जहर मिला है, वह मुख्य रूप से ‘Cough & Cold Syrup’ (जेनेरिक नाम) के नाम से बेची जा रही थी, जो हाजीपुर की फैक्ट्री में बनी थी।
आपको क्या चेक करना है?
Manufacturer Name (निर्माता): अगर बोतल के पीछे “Manufactured in Hajipur, Bihar” लिखा है और कंपनी का नाम संदिग्ध है, तो उसे तुरंत हटा दें।
Batch Number: हाल ही में बने बैच (2025-26) के सिरप जांच के दायरे में हैं।
Contents: अगर सिरप में साल्वेंट की जगह सस्ता केमिकल इस्तेमाल हुआ है, तो यह नंगी आंखों से पता नहीं चलेगा, इसलिए रिस्क न लें।
(नोट: सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने अभी ब्रांड का नाम सार्वजनिक करने से पहले बैच नंबर पर जोर दिया है, लेकिन हाजीपुर की फैक्ट्रियों से बनीं जेनेरिक दवाइयों पर अभी सख्त नजर है।)
एथिलीन ग्लाइकॉल: यह ‘जहर’ आखिर करता क्या है?
शायद आप सोच रहे होंगे कि यह केमिकल इतना खतरनाक क्यों है? दरअसल, Ethylene Glycol का इस्तेमाल कारों के इंजन को ठंडा रखने (Coolant) और ब्रेक ऑयल में होता है। यह स्वाद में मीठा होता है, लेकिन शरीर में जाते ही तबाही मचा देता है।
दवा कंपनियां इसे क्यों मिलाती हैं?
सिर्फ और सिर्फ ‘पैसा’ बचाने के लिए। कफ सिरप में ‘ग्लिसरीन’ या ‘प्रोपलीन ग्लाइकॉल’ का इस्तेमाल होना चाहिए, जो महंगा होता है। कुछ लालची कंपनियां इसकी जगह सस्ता इंडस्ट्रियल ग्रेड एथिलीन ग्लाइकॉल मिला देती हैं।
अगर यह दवा पी ली तो क्या होगा? (Symptoms to Watch)
अगर गलती से किसी बच्चे ने दूषित सिरप पी लिया है, तो उसमें ये लक्षण 24 से 48 घंटे के भीतर दिख सकते हैं:
- पेट में तेज दर्द और उल्टी होना।
- पेशाब का रुक जाना (यह Kidney Failure का सबसे पहला संकेत है)।
- बच्चे का सुस्त हो जाना या बेहोश होना।
- दिमागी संतुलन बिगड़ना।
अगर ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो घर पर इलाज न करें, तुरंत बच्चे को बड़े अस्पताल लेकर भागें।
माता-पिता अब क्या करें? (3 Safety Rules)
हाजीपुर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि हम आंख मूंदकर किसी भी दवा पर भरोसा नहीं कर सकते। अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आज ही ये 3 गांठ बांध लें:
- लोकल ब्रांड्स से बचें: कोशिश करें कि डॉक्टर की लिखी हुई बड़ी और नामी कंपनियों (Standard Brands) की दवा ही खरीदें। सस्ती जेनेरिक दवाइयां, जिनका नाम आपने कभी नहीं सुना, उनसे बचें।
- “Made in…” चेक करें: दवा खरीदने से पहले देखें कि वह कहां बनी है। अगर किसी ब्लैकलिस्टेड जगह या कंपनी का नाम दिखे, तो उसे न लें।
- सिरप की जगह टैबलेट? अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो डॉक्टर की सलाह पर सिरप की जगह टैबलेट देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि लिक्विड दवाओं में ही मिलावट (Adulteration) का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

लालच और लापरवाही की कीमत
हाजीपुर की कंपनी पर प्रतिबंध लगना एक अच्छी खबर है, लेकिन यह डरावना है कि ऐसी दवाइयां मार्केट में पहुंची कैसे? क्या इंसानी जान की कीमत कुछ रुपयों के मुनाफे से कम है? जब तक सिस्टम सुधरेगा, तब तक आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। अभी जाएं और अपनी दवाइयों की जांच करें। अगर आपको कोई संदिग्ध सिरप मिले, तो उसे डस्टबिन में फेंक दें।
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