गणतंत्र दिवस 2026: दिल्ली बनी अभेद्य किला! अल-कायदा आतंकी मोहम्मद रेहान के पोस्टर जारी, स्नाइपर और एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस ,26 जनवरी की परेड और गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर पूरी दिल्ली इस समय ‘हाई अलर्ट’ पर है। राजधानी की सड़कों से लेकर आसमान तक, सुरक्षा का ऐसा पहरा बिठाया गया है कि परिंदा भी पर न मार सके। खुफिया एजेंसियों से मिले ‘गंभीर’ इनपुट्स के बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना बढ़ा दिया है।

इस साल की सुरक्षा व्यवस्था पिछले सालों की तुलना में काफी अलग और तकनीक से लैस है। पुलिस ने न केवल सुरक्षा बढ़ाई है, बल्कि आम जनता से भी सहयोग की अपील की है।

अल-कायदा आतंकी मोहम्मद रेहान की तलाश, शहर भर में लगे पोस्टर

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अल-कायदा से जुड़े संदिग्ध आतंकी मोहम्मद रेहान समेत कई अन्य मोस्ट वांटेड संदिग्धों के पोस्टर सार्वजनिक किए हैं। ये पोस्टर रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चस्पा किए गए हैं

गणतंत्र दिवस 2026

पुलिस का कहना है कि इन आतंकियों की मौजूदगी की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति इन संदिग्धों के बारे में सटीक जानकारी देगा, उसे न केवल उचित इनाम दिया जाएगा, बल्कि उसकी पहचान भी पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। यह कदम सुरक्षा चक्र को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

’26-26′ का खतरा: पाकिस्तान और खालिस्तानी गठजोड़ पर नजर

खुफिया रिपोर्टों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि सीमा पार बैठे आतंकी संगठन और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी तत्व मिलकर ’26-26′ प्लान पर काम कर रहे हैं। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य 26 जनवरी के मौके पर दिल्ली और अयोध्या स्थित राम मंदिर जैसे संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाना है।

इस इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां और भी चौकन्नी हो गई हैं। दिल्ली के बॉर्डर सील कर दिए गए हैं और हर आने-जाने वाली गाड़ी की गहन तलाशी ली जा रही है।

जमीन पर स्नाइपर, आसमान में एंटी-ड्रोन सिस्टम

दिल्ली की सुरक्षा को इस बार ‘थ्री-लेयर’ सिक्योरिटी में तब्दील किया गया है:

एंटी-ड्रोन तकनीक: हाल के वर्षों में ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रमुख इलाकों में अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं। यह सिस्टम किसी भी संदिग्ध यूएवी (UAV) को हवा में ही जाम या नष्ट करने में सक्षम है।

स्नाइपर्स की तैनाती: इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और लाल किले जैसे प्रमुख स्थलों के आसपास की ऊंची इमारतों पर शार्प-शूटर और स्नाइपर्स तैनात किए गए हैं।

CCTV और फेस रिकग्निशन: दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए हजारों हाई-डेफिनेशन कैमरे लगाए गए हैं, जो फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर से लैस हैं।

क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और फ्लाइंग स्क्वॉड सक्रिय

दिल्ली पुलिस के आयुक्त के अनुसार, किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और फ्लाइंग स्क्वॉड को 24×7 मोड पर रखा गया है। दिल्ली के प्रमुख बाजारों जैसे चांदनी चौक, कनॉट प्लेस और सरोजिनी नगर में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात हैं।

ट्रैफिक पुलिस ने भी गणतंत्र दिवस को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। कई रास्तों को डायवर्ट किया गया है ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई चूक न हो।

गणतंत्र दिवस 2026

जनता से अपील: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

पुलिस प्रशासन ने दिल्लीवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु जैसे बैग, खिलौना या मोबाइल को हाथ न लगाएं। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि नजर आए, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।

निष्कर्ष: गणतंत्र दिवस हमारे राष्ट्रीय गौरव का पर्व है। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की यह मुस्तैदी सुनिश्चित करती है कि हम और हमारा लोकतंत्र सुरक्षित रहे। 26 जनवरी 2026 की यह परेड न केवल भारत की सैन्य ताकत दिखाएगी, बल्कि हमारी अटूट सुरक्षा व्यवस्था का भी प्रमाण होगी।

Read more

रामलीला मैदान के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान में हिंसक झड़प, पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल

रामलीला

देश की राजधानी दिल्ली का मध्य क्षेत्र आज सुबह रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। रामलीला मैदान के समीप फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास नगर निगम और प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब स्थानीय भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हो गया। इस पथराव में पुलिस के कई जवान घायल हुए हैं, जिसके बाद इलाके में अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है।

रामलीला

8 जनवरी 2026: क्या है पूरा मामला?

आज सुबह करीब 10:00 बजे, दिल्ली नगर निगम (MCD) की टीम भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मध्य दिल्ली के तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान से सटे इलाकों में अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के उन ढांचों को हटाना था, जिन्हें कोर्ट के आदेशानुसार अवैध घोषित किया गया था।

जैसे ही बुलडोजर ने कार्रवाई शुरू की, स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते शांतिपूर्ण विरोध ने हिंसक मोड़ ले लिया। संकरी गलियों और छतों से पुलिस टीम पर अचानक भारी पथराव (Stone Pelting) शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

अतिक्रमण विरोधी अभियान और कानूनी पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई थी। सूत्रों के अनुसार, फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।

• कोर्ट का आदेश: दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में सार्वजनिक रास्तों को साफ करने और पैदल यात्रियों के लिए जगह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

• नोटिस की अवधि: प्रशासन का दावा है कि संबंधित पक्षों को 15 दिन पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था, लेकिन किसी ने भी स्वतः संज्ञान लेकर अतिक्रमण नहीं हटाया।

• प्रशासनिक तर्क: सड़क के चौड़ीकरण और आपातकालीन वाहनों (जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड) की आवाजाही के लिए यह कार्रवाई अनिवार्य बताई जा रही है।

हिंसा का घटनाक्रम: कैसे बिगड़े हालात?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह 10:30 बजे तक स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन जैसे ही मस्जिद के पास की एक दीवार को गिराने की कोशिश की गई, भीड़ उग्र हो गई।

• नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद: शुरुआत में केवल नारेबाजी हो रही थी, लेकिन भीड़ में शामिल कुछ असमाजिक तत्वों ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू किए।

• छतों से हमला: चूंकि यह इलाका काफी सघन (Dense) है, इसलिए पुलिस के लिए गलियों में सुरक्षा करना कठिन हो गया। छतों से फेंके गए पत्थरों के कारण डीसीपी रैंक के एक अधिकारी समेत कई कांस्टेबल चोटिल हो गए।

• वाहनों में तोड़फोड़: उपद्रवियों ने नगर निगम की एक जेसीबी (JCB) और दो पुलिस वैन के शीशे भी तोड़ दिए।

घायलों की स्थिति और पुलिस की कार्रवाई

इस हिंसा में अब तक मिली जानकारी के अनुसार, कम से कम 8 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तुरंत नजदीकी एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में:

• 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

• CCTV फुटेज के आधार पर दंगाइयों की पहचान की जा रही है।

• इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है ताकि भीड़ एकत्र न हो सके।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया, “कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हम शांति बनाए रखने की अपील करते हैं, लेकिन सरकारी कार्य में बाधा डालना और पुलिस पर हमला करना गंभीर अपराध है।”

रामलीला

स्थानीय निवासियों का पक्ष

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के यह कार्रवाई की। स्थानीय निवासी मोहम्मद असलम (नाम परिवर्तित) ने बताया, “हम पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। अचानक आकर हमारे घरों और धार्मिक स्थलों के हिस्सों को तोड़ना गलत है। पुलिस ने महिलाओं के साथ भी धक्का-मुक्की की, जिसके बाद गुस्सा भड़क गया।”

क्या सघन इलाकों में अतिक्रमण हटाने के लिए बल प्रयोग करना सही है या प्रशासन को कोई अन्य रास्ता अपनाना चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।

Read more

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आग का तांडव: 7 लोगों की मौत, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

राजधानी दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इस सप्ताह दो बेहद दुखद और भयावह खबरें सामने आईं, जिसने एक बार फिर से शहर के भीड़भाड़ वाले आवासीय क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो अलग-अलग आग की घटनाओं में, दिल्ली ने कुल सात अमूल्य जिंदगियां खो दीं, जबकि कई अन्य घायल हुए। ये घटनाएं न केवल जान-माल के नुकसान के लिए दर्दनाक हैं, बल्कि ये इस बात का भी संकेत हैं कि अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और तंग गलियों की समस्या हमारे शहरों के लिए एक टाइम बम बन चुकी है।

संगम विहार की त्रासदी: चार मंजिला इमारत बनी मौत का जाल

पहली दुखद घटना राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिण दिल्ली के संगम विहार इलाके में हुई। यह क्षेत्र अपनी घनी आबादी और संकरी गलियों के लिए जाना जाता है, जहाँ एक चार मंजिला आवासीय मकान में अचानक भीषण आग लग गई। यह हादसा इतना भयानक था कि घर के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
आग की लपटें इतनी तेज़ी से फैलीं कि इसने जल्द ही पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। इस त्रासदी में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें [संभवतः बच्चों या बुजुर्गों का उल्लेख अगर उपलब्ध हो] भी शामिल थे।

आग बुझाने के दौरान दो अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्थानीय निवासियों और दमकलकर्मियों के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण संभवतः शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि घनी बस्तियों में, जहाँ इमारतों के बीच दूरी लगभग नगण्य होती है, वहाँ एक मकान में लगी आग पड़ोसी इमारतों के लिए भी बड़ा खतरा बन जाती है। बचाव दल को घटनास्थल तक पहुँचने में तंग गलियों के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिससे बचाव कार्य में देरी हुई, और पीड़ितों को बाहर निकालने का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया।

राजधानी दिल्ली

तिगड़ी एक्सटेंशन की भयावहता: जूते की दुकान से फैली आग

दूसरी घटना और भी ज्यादा भयावह थी। यह हादसा तिगड़ी एक्सटेंशन में हुआ, जहाँ जूते की एक दुकान में आग लगी। यह दुकान एक तीन मंजिला इमारत के निचले तल पर स्थित थी। जूतों जैसे ज्वलनशील सामग्री (Flammable Material) के कारण आग पल भर में ही बेकाबू हो गई और तेज़ी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई।आग का धुआँ और लपटें इतनी तीव्र थीं कि इमारत के अंदर फंसे लोगों के लिए बच निकलना लगभग असंभव हो गया। इस दुखद हादसे में चार लोगों की मौत हो गई।

शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस इमारत का उपयोग आवासीय और व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था, जो कि सुरक्षा मानकों का एक बड़ा उल्लंघन है। अक्सर, आवासीय भवनों में व्यवसाय चलाने से असुरक्षित वायरिंग और अतिरिक्त लोड की समस्या पैदा होती है, जो आग लगने के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है।
ये दोनों ही घटनाएं दिल्ली की शहरी नियोजन (Urban Planning) और सुरक्षा नियमों के खोखलेपन को उजागर करती हैं। सवाल यह है कि क्या हम इन त्रासदियों से कोई सबक लेंगे, या फिर अगली दुर्घटना का इंतज़ार करेंगे?

Read more

प्रगति मैदान में दिल्ली ट्रेड फेयर लगी जबरदस्त भीड़, हर राज्य की संस्कृति और नवाचार का प्रदर्शन

दिल्ली

राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में इस समय ‘दिल्ली ट्रेड फेयर 2025’ पूरे शबाब पर है। 14 नवंबर से शुरू हुआ यह मेला रोजाना हजारों लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। परिवारों, छात्रों, व्यापारियों और घरेलू खरीदारों—सबकी भारी भीड़ यहां देखने को मिल रही है। यह मेला 27 नवंबर तक जारी रहेगा।

इस बार मेले की थीम ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ रखी गई है, जो देश की एकता, संस्कृति और विविधता को एक मंच पर दिखाती है।

क्या है इस बार का खास आकर्षण?

  • मेले में इस बार कई राज्यों को पार्टनर और फोकस स्टेट के रूप में चुना गया है:
  • पार्टनर स्टेट – बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश
  • फोकस स्टेट – झारखंड

इन राज्यों के पवेलियन सबसे ज्यादा भीड़ आकर्षित कर रहे हैं। लोग यहां की पारंपरिक कलाएं, हस्तशिल्प, लोकनृत्य, हैंडलूम उत्पाद, बांस कला, मधुबनी पेंटिंग, राजस्थानी ज्वेलरी, और महाराष्ट्र की वारली आर्ट जैसी चीजें बड़ी उत्सुकता से देख रहे हैं। टेक्नोलॉजी और ‘विकसित भारत @2047’ का दमदार प्रदर्शन

दिल्ली

इस बार मेले में भारत के भविष्य को दिखाने वाला एक बड़ा सेक्शन बनाया गया है, जिसमें—

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • साइबर सिक्योरिटी
  • डीप टेक
  • स्टार्टअप इनोवेशन
  • डिजिटल इंडिया मिशन

जैसे क्षेत्रों में देश की उपलब्धियों और नए प्रयोगों को प्रदर्शित किया जा रहा है। छात्रों और युवा उद्यमियों के लिए यह सेक्शन काफी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

भीड़ क्यों इतनी ज्यादा है?

  • त्योहारी सीजन के बाद शॉपिंग का बढ़ता रुझान
  • राज्यों के पवेलियन का सुंदर सेटअप
  • खाने-पीने के स्टॉल, आर्टवर्क, होम डेकोर, हैंडीक्राफ्ट की बड़ी रेंज
  • बच्चों के लिए मनोरंजन

मेले में सप्ताहांत पर तो पैरों रखने की जगह तक नहीं मिल रही।

आम लोगों के लिए जरूरी जानकारी

मेला कब तक खुला है?

  • 19 नवंबर से 27 नवंबर तक आम जनता के लिए खुला.
  • समय: सुबह 10 बजे से शाम 7:30 बजे तक
  • प्रवेश बंद: शाम 5:30 बजे
  • टिकट कीमतें
  • Week के दिन (Mon–Fri):
  • वयस्क: ₹80
  • बच्चे: ₹40
  • सप्ताहांत (Sat–Sun) और छुट्टी:
  • वयस्क: ₹150
  • बच्चे: ₹60
  • दिल्ली

फ्री एंट्री:

  • वरिष्ठ नागरिक
  • दिव्यांगजन
  • टिकट कहां से खरीदें?
  • 55 मेट्रो स्टेशनों से
  • ‘सारथी’ ऐप
  • ITPO की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन बुकिंग

प्रगति मैदान कैसे पहुंचें?

सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन: सुप्रीम कोर्ट (ब्लू लाइन).ट्रैफिक देखते हुए—मेट्रो से यात्रा करना सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

क्यों खास है दिल्ली ट्रेड फेयर 2025?

यह मेला सिर्फ व्यापार या खरीदारी का मंच नहीं है, बल्कि—

  • भारत की कला
  • संस्कृति
  • परंपरा
  • नवाचार
  • राज्यों की विविधता
  • सरकारी अभियानों की झलक

सब कुछ एक ही जगह दिखाने वाला एक विशाल सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है।परिवारों के लिए घूमने का शानदार मौका है, और व्यापारियों के लिए नए बिजनेस अवसर भी।

Read more

दिल्ली ब्लास्ट: डीएनए टेस्ट से खुलासा, डॉ. उमर उन नबी ही चला रहे थे ब्लास्ट वाली कार

दिल्ली

दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की है कि धमाके के वक्त ह्युंडई i20 कार चला रहे व्यक्ति की पहचान डॉ. उमर उन नबी के रूप में हुई है। उनकी पहचान डीएनए टेस्ट के जरिए की गई, जिससे स्पष्ट हो गया कि विस्फोट के समय वही वाहन के स्टीयरिंग पर मौजूद थे।

दिल्ली

पुलिस के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद डॉ. उमर उन नबी का पैर स्टीयरिंग और एक्सेलेरेटर के बीच फंसा पाया गया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि धमाका अचानक हुआ और उनके पास बचने का मौका नहीं था। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे शुरुआती पहचान मुश्किल हो गई थी।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धमाका एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ब्लास्ट का उद्देश्य क्या था और इसमें अन्य कौन-कौन शामिल थे। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनआईए (NIA) इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं। टीम ने घटनास्थल से कई सबूत जुटाए हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ विस्फोटक कहां से लाया गया था।

दिल्ली

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में डॉ. उमर उन नबी के संपर्कों और हालिया गतिविधियों की भी गहन जांच की जाएगी, ताकि इस धमाके के पीछे की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।

Read more

दिल्ली में जब हवा हुई जहरीली- (आया Breath Rights)

दिल्ली

प्रदूषण की तबाही: दिल्ली की आबो हवा में घुटन रविवार को राजधानी India Gate में हजारों युवा, माता-पिता और पर्यावरण कार्यकर्ता एक साथ जमा हुए, क्योंकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता चरम स्तर पर पहुँच चुकी है। AQI कई इलाकों में 400 के ऊपर दर्ज हुआ, जिससे लोगों ने यह सवाल उठाया—“हमें साँस लेने का हक़ क्यों नहीं मिला?”
भीषण स्मॉग में बच्चों, बुज़ुर्गों और रास्ते-पर काम करने वालों को सबसे ज़्यादा ख़तरा बताया गया, और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से “कार्रवाई की लड़ाई” मांगी, सिर्फ बयान नहीं।

गुस्सा, गिरफ्तारी और प्रश्न

दिल्ली

प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने “अनधिकृत सभा” के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लिया।
नफे-नुकसान का खेल यहाँ सिर्फ गाड़ियों और पटाखों का नहीं—बल्कि निर्माण-धूल, ठेका-काम, वेस्ट-जलाना और प्रशासन की निष्क्रियता का भी है। सवाल उठता है: क्या सिर्फ सरकार दोषी है, या हम खुद अपनी भूमिका निभा पाए हैं?

हवा को जवाब देने की देर

यह धरना सिर्फ एक आंदोलन नहीं—यह चेतावनी है कि दिल्ली जब तक “साँस लेने-का अधिकार” नहीं देगा, सामाजिक स्वास्थ्य संकट गहराता रहेगा। अब वक्त है सरकार और नागरिक दोनों की सहभागिता की—क्या इसे सिर्फ अगले सर्दियों का मौसम कहकर टाल देंगे या इस बार परिवर्तन की दिशा चुनेंगे?

Read more