Uttarakhand’s 25-Year Miracle: ‘Devbhoomi’ की स्थापित यात्रा, प्रकृति से प्रगति तक

Devbhoomi

उत्तराखंड स्थापना दिवस की पृष्ठभूमि 9 नवंबर 2000 को भारत के उत्तर-प्रदेश से अलग होकर 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया उत्तराखंड — जिसे बाद में Devbhoomi कहा जाने लगा। आज वही राज्य हर 9 नवंबर को अपने स्थापना दिवस पर गर्व की नई परतें गढ़ता है।

देवभूमि-की पहचान: आस्था, प्रकृति, संस्कृति

उत्तराखंड को इसलिए “Devbhoomi” कहा जाता है क्योंकि यहाँ चारधाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री – जैसे पवित्र तीर्थ मौजूद हैं। साथ ही नैनीताल, मसूरी, जिम कॉर्बेट जैसे प्राकृतिक स्थलों ने इसे देश-विदेश में प्रसिद्धि दी।

सांस्कृतिक विविधता और लोकजीवन

Devbhoomi

गढ़वाली, कुमाऊँनी बोलीभाषा, छोलिया-झोड़ा जैसे लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजन जैसे भट्ट-की चुरकनी-फाणू—ये सब उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को जीवंत बनाते हैं। स्थापना दिवस पर स्कूल-कॉलेज-गांवों में मेले, रैलियाँ और लोकगान-भजन का रंग छा जाता है।

विकास-और-प्रकृति: संतुलन की चुनौती

उत्तराखंड न सिर्फ धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि भारत के लिए जलवायु-सुरक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभाता है—यहाँ से निकलती गंगा-यमुनाओं की धार ने करोड़ों जीवन को पोषण दिया। उसी समय पर्यटन, जल-विद्युत, हर्बल उत्पादन जैसे क्षेत्र विकास की राह पर हैं। लेकिन हिमालय की नाजुक स्थिति और पलायन-चुनौतियों ने ये सवाल उठाया है कि विकास कितनी टिकाऊ है?

भविष्य-के लिए संकल्प

उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं—यह आस्था, प्रकृति, संघर्ष और नवाचार का संगम है। 9 नवंबर को हम सिर्फ स्थापना दिवस नहीं मनाते, बल्कि यह संकल्प लेते हैं कि “हमारी संस्कृति, हमारा पर्यावरण और हमारी आधुनिकता साथ चलेंगी”। नए दशक में उत्तराखंड का उद्देश्य है—नयी ऊँचाइयाँ, लेकिन जड़ों से बँधी हुई।

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