DRDO का ‘जीवन रक्षक’ कमाल: लड़ाकू पायलटों के लिए हाई-स्पीड एस्केप सिस्टम का सफल परीक्षण! जानिए कैसे अब हवा में और भी सुरक्षित हुए हमारे जाँबाज़

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भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है। हाल ही में, DRDO ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लड़ाकू विमानों के लिए डिज़ाइन किए गए ‘पायलट एस्केप सिस्टम’ (Pilot Escape System) का हाई-स्पीड सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि न केवल हमारे पायलटों की सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि भारत को इस विशिष्ट तकनीक वाले चुनिंदा देशों की कतार में भी खड़ा करेगी।

‘एस्केप सिस्टम’ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

पायलट एस्केप सिस्टम, जिसे आमतौर पर इजेक्शन सीट (Ejection Seat) के रूप में जाना जाता है, लड़ाकू विमानों का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर होता है।

  • उद्देश्य: यह सिस्टम पायलट को विमान में किसी गंभीर खराबी या दुर्घटना की स्थिति में, विमान से कुछ सेकंड के भीतर सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में मदद करता है।
  • कार्यप्रणाली: यह रॉकेट-पावर्ड सिस्टम होता है जो विमान की कॉकपिट कैनोपी को तोड़कर या हटाकर, सीट को पायलट सहित तेज़ गति से बाहर निकालता है। इसके बाद पैराशूट अपने आप खुल जाता है, जिससे पायलट ज़मीन पर सुरक्षित उतर सके।
  • लड़ाकू विमान अत्यधिक तेज़ गति और कम ऊँचाई पर उड़ान भरते हैं। ऐसे में, यह सिस्टम पायलट को बाहर निकालने के लिए बेहद कम समय देता है। DRDO का यह नया सिस्टम इसी चुनौती को पार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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DRDO के हाई-स्पीड परीक्षण की मुख्य बातें

DRDO की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला, एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने इस महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व किया है।

  • परीक्षण का फोकस: यह परीक्षण विशेष रूप से सीट और पायलट को बाहर निकालने की गति और सुरक्षा पर केंद्रित था। हाई-स्पीड परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि अत्यधिक तेज़ गति (Supersonic Speed) पर भी इजेक्शन के दौरान पायलट को कोई गंभीर चोट न पहुँचे।
  • सफलता: परीक्षण में यह साबित हुआ कि सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुसार, पायलट को विमान से तेज़ी और स्थिरता के साथ सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में पूरी तरह सक्षम है।
  • तकनीकी विशेषता: यह स्वदेशी रूप से विकसित प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि इजेक्शन के दौरान पायलट पर पड़ने वाले ‘जी-फोर्स’ (G-Force) का दबाव कम हो। अत्यधिक जी-फोर्स से पायलट बेहोश हो सकता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना इस तकनीक का सबसे जटिल हिस्सा है।
  • उपयोग: यह उन्नत इजेक्शन सीट सिस्टम भविष्य में भारत के अपने लड़ाकू विमान, जैसे कि तेजस (LCA Tejas) और आने वाले AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) में उपयोग किया जा सकता है।
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स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम

यह सफलता भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बल देती है।

  • आयात पर निर्भरता कम: अभी तक, भारत को कई लड़ाकू विमानों के लिए यह जटिल एस्केप तकनीक विदेशी कंपनियों से आयात करनी पड़ती थी।
  • लागत में कमी: स्वदेशी विकास से न केवल आयात पर होने वाला खर्च बचेगा, बल्कि इसकी तकनीक भी पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में रहेगी, जिससे गोपनीयता और अनुकूलन (Customization) संभव होगा।

DRDO का यह उन्नत एस्केप सिस्टम भारतीय वायुसेना के बेड़े को तकनीकी रूप से और मज़बूत करेगा, जिससे हमारे जाँबाज़ पायलट बेझिझक और पूरे आत्मविश्वास के साथ देश की रक्षा कर सकेंगे। यह सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि हमारे सैनिकों के जीवन की गारंटी है।

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