West Bengal Election Phase 1 Voting Live: बंगाल में पहले चरण का महासंग्राम शुरू! 152 सीटों पर वोटिंग जारी, जानें पूरी details

West Bengal Election Phase 1 Voting Live

देश की निगाहें आज सिर्फ और सिर्फ पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं! 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए 2026 के महामुकाबले का आगाज़ हो चुका है। आज, गुरुवार (23 अप्रैल 2026) सुबह 7 बजे से राज्य में पहले चरण (Phase 1) का मतदान कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गया है।

इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता पाने की होड़ नहीं है, बल्कि यह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ‘मिशन बंगाल’ का सबसे बड़ा टेस्ट है। मतदान केंद्रों के बाहर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी लाइनें इस बात का सबूत हैं कि बंगाल का वोटर इस बार बदलाव या बचाव के मूड में है। ‘ApniVani’ की इस विशेष पोलिटिकल कवरेज में आइए जानते हैं पहले चरण की वोटिंग से जुड़ी 5 सबसे बड़ी और अहम बातें।

16 जिले और 152 सीटें: दांव पर दिग्गजों की साख

इस बार का चुनाव आयोग (ECI) ने सिर्फ दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है।

आज हो रहे पहले चरण में राज्य के 16 जिलों की कुल 152 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इन 16 जिलों में उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार से लेकर दक्षिण बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और नंदीग्राम (पूर्व मेदिनीपुर) जैसे हाई-प्रोफाइल और अति-संवेदनशील इलाके शामिल हैं। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवारों की किस्मत आज EVM में कैद हो जाएगी।

3.6 करोड़ वोटर करेंगे 44 हजार पोलिंग बूथों पर मतदान

पहले चरण का आंकड़ा बहुत ही विशाल है।

चुनाव आयोग के अनुसार, आज लगभग 3.6 करोड़ (36 मिलियन) मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसके लिए पूरे राज्य में 44,378 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे सुबह-सुबह ही अपना वोट डाल लें। वोटिंग का समय सुबह 7:00 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।

‘सुपर-सेंसिटिव’ बूथों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम

बंगाल चुनावों का इतिहास अक्सर हिंसा से जुड़ा रहा है, इसलिए इस बार चुनाव आयोग कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

कुल 44 हज़ार बूथों में से 7,384 बूथों को ‘अति-संवेदनशील’ (Super-Sensitive/Critical) घोषित किया गया है। मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष (Free and Fair) बनाने के लिए राज्य में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की 2,407 कंपनियां (लगभग 2.4 लाख जवान) तैनात की गई हैं। हर पोलिंग स्टेशन पर वेबकास्टिंग के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी सीधी निगरानी दिल्ली से की जा रही है।

मोबाइल फोन पर पूरी तरह से बैन! (ECI की नई गाइडलाइन)

अगर आप वोट डालने जा रहे हैं, तो यह नियम ज़रूर जान लें।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोलिंग बूथ के अंदर मोबाइल फोन ले जाने या फ़ोटो/वीडियो बनाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। हालांकि, मतदाताओं की सुविधा के लिए बूथ के बाहर ‘मोबाइल डिपॉजिट फैसिलिटी’ (फ़ोन जमा करने की जगह) बनाई गई है। इसके अलावा, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर और रैंप जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

West Bengal Election Phase 1 Voting Live
Credit – NDTV

कब आएगा रिजल्ट और दूसरे चरण की वोटिंग?

आज के मतदान के बाद, राज्य की बची हुई 142 सीटों के लिए दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल 2026 को होगी।

बंगाल की जनता ने किसे अपना मुख्यमंत्री चुना है, इसका फाइनल फैसला 4 मई 2026 को मतगणना (Result Day) वाले दिन होगा। तब तक पूरे राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर रहेगा।

ApniVani की अपील

लोकतंत्र में आपका एक वोट भी सरकार बनाने या गिराने की ताकत रखता है। ‘ApniVani’ पश्चिम बंगाल के सभी 3.6 करोड़ मतदाताओं से यह अपील करता है कि वे बिना किसी डर या प्रलोभन के, अपने घरों से बाहर निकलें और भारी संख्या में मतदान करें।

आपकी राय: आपको क्या लगता है, इस बार पश्चिम बंगाल में किसका पलड़ा भारी है— ममता दीदी या बीजेपी? अपनी बेबाक राय और अपने क्षेत्र का लाइव माहौल नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ ज़रूर शेयर करें!

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National Voters Day: सिर्फ 1 दिन के ‘बादशाह’ हैं आप! बंगाल की हिंसा और आपके वोट की ताकत का कड़वा सच

National Voters' Day

आज 25 जनवरी है मतलब ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ (National Voters’ Day)। सारे जगह आपको बताया जाएगा कि आप देश के मालिक हैं। टीवी पर बड़े-बड़े नेता कहेंगे कि “वोट आपका अधिकार है।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस उंगली पर स्याही लगवाकर आप सेल्फी पोस्ट करते हैं, उसकी असली ताकत क्या है? क्या हम वाकई लोकतंत्र के राजा हैं, या सिर्फ 5 साल में एक दिन के लिए ‘इस्तेमाल’ किए जाने वाले लोग?

आज इस विशेष रिपोर्ट में हम बात करेंगे वोट की ताकत की, उन लोगों की जो राजनीति से नफरत करते हैं, और बंगाल (Bengal) जैसे राज्यों के उस अजीब सच की जहाँ वोट देना ‘अधिकार’ नहीं, बल्कि ‘जान जोखिम’ में डालना बन गया है।

Suppressing Voters in Bengal

“मुझे राजनीति में इंटरेस्ट नहीं”—यह सबसे बड़ी बेवकूफी है

आजकल के युवाओं का सबसे कॉमन डायलॉग है— “यार, पॉलिटिक्स गंदी है, मुझे इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है।”

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो यह कड़वी बात सुन लीजिए: आप राजनीति में भाग लें या न लें, राजनीति आप में पूरी दिलचस्पी लेती है। जिस सड़क पर आप चलते हैं, उसका ठेका राजनीति तय करती है। जिस कॉलेज में आप पढ़ते हैं, उसकी फीस राजनीति तय करती है। आपकी गाड़ी का पेट्रोल और घर का राशन—सब कुछ राजनीति से जुड़ा है। अगर आप वोट नहीं देते, तो आपको शिकायत करने का भी कोई हक नहीं है। जब आप घर बैठते हैं, तो आप एक ‘गलत आदमी’ को चुनने में मदद कर रहे होते हैं।

प्लेटो ने कहा था— “राजनीति में भाग न लेने की सजा यह है कि आपको अपने से बुरे लोगों द्वारा शासित होना पड़ता है।”

5 साल के ‘नौकर’ और 1 दिन के ‘राजा’

हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना (Irony) यही है। जिस दिन चुनाव होता है, उस दिन बड़े से बड़ा नेता, जो 5 साल तक अपनी गाड़ी का शीशा नीचे नहीं करता, वो आपके पैरों में गिर जाता है। आपके सामने हाथ जोड़ता है, जाति-धर्म की दुहाई देता है, और दारू-मुर्गा भी बांटता है। क्यों? क्योंकि उसे पता है कि अगले 24 घंटे के लिए असली ‘बॉस’ आप हैं।

लेकिन सवाल यह है कि यह ताकत सिर्फ एक दिन क्यों?जैसे ही चुनाव खत्म होता है, वह नेता ‘राजा’ बन जाता है और जनता वापस ‘प्रजा’ बन जाती है। वोट की ताकत का यह असंतुलन हमें सोचना होगा। क्या हम सिर्फ एक दिन के मालिक हैं?

ECI chief Election commissioner -and others

बंगाल की हकीकत: जहाँ वोट देना ‘जुर्म’ बन जाता है

अब आते हैं सिक्के के दूसरे पहलू पर। हम कहते हैं “वोट देना हमारा हक है,” लेकिन क्या भारत के हर कोने में यह हक सुरक्षित है? पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पिछले कुछ चुनावों को याद कीजिए। क्या मंजर था? वोट देने जाने वालों को डराया गया। चुनाव के बाद हिंसा (Post-Poll Violence) हुई, घर जलाए गए, और महिलाओं के साथ बदसलूकी हुई। पंचायत चुनावों में तो मतपेटियां (Ballot Boxes) तक तालाब में फेंक दी गईं।

यह कैसा लोकतंत्र है जहाँ अपनी मर्जी का बटन दबाने पर जान का खतरा हो? सिर्फ बंगाल ही नहीं, बिहार और यूपी के कई बाहुबली इलाकों में भी आज भी ‘साइलेंट कैप्चरिंग’ होती है। जब तक हर नागरिक बिना डरे वोट नहीं डाल सकता, तब तक National Voters’ Day की बधाई देना बेमानी है। प्रशासन और चुनाव आयोग (ECI) दावा करते हैं कि चुनाव निष्पक्ष हैं, लेकिन जब एक गरीब आदमी को डंडे के जोर पर वोट डालने से रोका जाता है, तो लोकतंत्र मर जाता है।

सुधार कैसे आएगा?

सिर्फ कमियां गिनाने से कुछ नहीं होगा। अगर हमें इस सिस्टम को सुधारना है, तो हमें अपनी एक दिन की ताकत को 5 साल की ताकत में बदलना होगा।

  • NOTA का सही इस्तेमाल: अगर आपको कोई कैंडिडेट पसंद नहीं है, तो घर मत बैठिए। बूथ पर जाइए और NOTA (None of the Above) दबाइए। यह नेताओं के मुंह पर तमाचा है कि “तुम में से कोई भी मेरे लायक नहीं है।”
  • सवाल पूछना सीखें: चुनाव के बाद अपने पार्षद/विधायक को सोशल मीडिया पर टैग करके सवाल पूछिए। उन्हें याद दिलाइए कि वो मालिक नहीं, सेवक हैं।
  • डर से आजादी: बंगाल हो या बिहार, गुंडागर्दी तब तक चलती है जब तक शरीफ आदमी चुप रहता है। जब पूरा मोहल्ला या पूरा गांव एक साथ खड़ा हो जाएगा, तो किसी बाहुबली की हिम्मत नहीं होगी।

अपना हक खुद मांगना सीखो

आज 25 जनवरी है। आज शपथ लीजिए कि चाहे धूप हो, बारिश हो या लंबी लाइन—अगले चुनाव में आप वोट जरूर डालेंगे। याद रखिए, आपकी उंगली पर लगी वह नीली स्याही (Ink) सिर्फ एक निशान नहीं है, वह इस देश के भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप आज चूक गए, तो अगले 5 साल तक रोने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

जागो मतदाता, जागो!

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि भारत में ‘राइट टू रिकॉल’ (Right to Recall) यानी काम न करने पर नेता को हटाने का कानून होना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।

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