भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके कुछ घंटे बाद ही आरके सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि सिंह पिछले कई महीनों से पार्टी नेतृत्व और सरकार पर खुलकर सवाल उठा रहे थे।
क्यों हुई कार्रवाई? क्या थे आरोप?
बीजेपी ने आरके सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। पार्टी के अनुशासन समिति ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिसमें उनसे उनके हालिया बयानों पर जवाब मांगा गया था।
आरके सिंह पर मुख्य आरोप:
1. भ्रष्टाचार पर सरकार पर खुली आलोचना
सिंह ने बिहार में एक बड़े पावर प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उनका दावा था कि भागलपुर में अडानी ग्रुप को दिए गए बिजली प्रोजेक्ट में 62,000 करोड़ रुपये का घोटाला है। पूर्व ऊर्जा मंत्री होने के कारण उनके आरोपों ने बिहार और केंद्र में एनडीए सरकार को असहज कर दिया था।
2. चुनाव के वक्त पार्टी के खिलाफ बयानबाजी
उन्होंने कई बार खुलकर कहा कि बीजेपी “अपराधियों को टिकट दे रही है”। इतना ही नहीं, उन्होंने मतदाताओं से यह तक कह दिया था कि अगर साफ-सुथरा उम्मीदवार न मिले तो NOTA दबा देना।
3. चुनाव आयोग और कानून व्यवस्था पर हमले
चुनाव के दौरान आरके सिंह ने चुनाव आयोग पर भी पक्षपात और आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया था। बीजेपी नेतृत्व का मानना था कि ऐसे बयान सीधे तौर पर पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा रहे थे।

आरके सिंह की प्रतिक्रिया : “मैंने अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाई, क्या ये गलत है?”
पार्टी से निष्कासन के बाद आरके सिंह ने कहा कि उन्हें भेजे गए नोटिस में “पार्टी विरोधी गतिविधि” का कोई स्पष्ट उदाहरण नहीं दिया गया था।उन्होंने अपना इस्तीफा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजते हुए कहा: “मैंने सिर्फ अपराधियों को टिकट देने का विरोध किया। अगर यह पार्टी विरोधी है, तो फिर मैं ऐसी पार्टी में नहीं रह सकता।”
“मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ बोल रहा था, यह देश के हित में था।” उनके तेवरों से साफ है कि वे कार्रवाई से नाराज़ हैं और भविष्य में किसी नई राजनीतिक दिशा के संकेत भी दे रहे हैं।
कौन हैं आरके सिंह?
- 1975 बैच के पूर्व IAS अधिकारी.
- भारत के गृह सचिव रहे.
- 2013 में BJP में शामिल हुए.
- 2014 और 2019 में आरा से सांसद चुने गए.
- मोदी सरकार में ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री रहे.
- 2024 लोकसभा चुनाव में आरा सीट हार गए.
आरके Singh को पार्टी के अनुभवी और कड़े प्रशासक नेताओं में गिना जाता था।
राजनीति में हलचल तेज, कई सवाल खड़े
बीजेपी के लिए यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में पार्टी पहले से ही आंतरिक विवादों में घिरी है। आरके सिंह जैसे बड़े चेहरे को हटाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि:
- कया बीजेपी में असंतोष बढ़ रहा है?
- क्या पार्टी भविष्य में और कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने वाली है?
- आरके सिंह किस राजनीतिक दिशा में जाएंगे?
आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है।