बिहार में गंगा हुई निर्मल: BSPCB की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, जानें कैसे STPs ने बदली पवित्र नदी की सूरत

गंगा

बिहार में गंगा नदी के प्रदूषण को लेकर वर्षों से जारी चिंता के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में स्थापित किए गए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) के कारण गंगा के पानी की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। अब नदी का पानी न केवल जलीय जीवों के लिए अनुकूल हो रहा है, बल्कि कई घाटों पर प्रदूषण के स्तर में भी भारी गिरावट आई है।

बिहार में गंगा की स्वच्छता: एक नया अध्याय

बिहार की जीवनदायिनी गंगा नदी, जो कभी बढ़ते शहरीकरण और अनियंत्रित सीवेज के कारण प्रदूषित हो रही थी, अब पुनर्जीवन की राह पर है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) की हालिया रिपोर्ट यह संकेत देती है कि पिछले कुछ वर्षों में ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत जो बुनियादी ढांचे तैयार किए गए हैं, उनका सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पटना समेत बिहार के विभिन्न जिलों में एसटीपी (STP) की कार्यप्रणाली और उनकी बढ़ती क्षमता ने नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। जहाँ पहले शहरों का कचरा सीधे गंगा की लहरों में मिलता था, अब उसे वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जा रहा है।

Sewage Treatment Plants (STP) का जादू: आंकड़ों की जुबानी

बिहार में गंगा नदी के किनारे बसे शहरों से रोजाना निकलने वाले सीवेज का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रही है। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में गंगा के किनारे स्थित शहरों से लगभग 455 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज निकलता है। नमामि गंगे योजना से पहले, राज्य में केवल 124 MLD उपचार की क्षमता थी, जो अब बढ़कर कई गुना हो गई है।

पटना में बेऊर, कर्मलीचक और सैदपुर जैसे इलाकों में नए एसटीपी के चालू होने से गंगा में गिरने वाले ऑर्गेनिक लोड में भारी कमी आई है। BSPCB के अनुसार, नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen – DO) का स्तर बढ़ा है, जो पानी की शुद्धता का एक मुख्य मानक है।

पानी की गुणवत्ता में सुधार: क्या कहते हैं मानक?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंगा के पानी की जांच 34 विभिन्न स्थानों पर पाक्षिक (Fortnightly) आधार पर करता है। हालिया जांच के परिणामों में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर आए हैं:

• pH लेवल और Dissolved Oxygen: गंगा के अधिकांश हिस्सों में pH मान और DO (घुलित ऑक्सीजन) का स्तर अब मानकों के अनुरूप पाया गया है। यह जलीय जीवन, विशेषकर लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के लिए बहुत अच्छी खबर है।

• BOD (Biochemical Oxygen Demand): सीवेज ट्रीटमेंट के कारण BOD के स्तर में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर से भागलपुर तक के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

• बैक्टिरियोलॉजिकल सुधार: हालांकि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ (Faecal Coliform) अभी भी कुछ जगहों पर चुनौती बना हुआ है, लेकिन एसटीपी के माध्यम से क्लोरिनेशन की प्रक्रिया ने इसे नियंत्रित करने में मदद की है।

पटना: स्वच्छता का मॉडल बनता शहर

राजधानी पटना में गंगा की स्थिति में सबसे अधिक बदलाव देखा गया है। पटना के बेऊर में 43 MLD क्षमता वाले एसटीपी और कर्मलीचक जैसे प्रोजेक्ट्स ने शहर के बड़े ड्रेनेज सिस्टम को गंगा में सीधे मिलने से रोक दिया है। बिहार शहरी बुनियादी ढांचा विकास निगम (BUIDCo) के अनुसार, पटना को 100% सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता वाला शहर बनाने का लक्ष्य अब अंतिम चरणों में है।

सरकार की ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ (One City One Operator) मॉडल वाली नीति ने इन प्लांट्स के रखरखाव और संचालन (O&M) को और अधिक प्रभावी बना दिया है। अब न केवल प्लांट बनाए जा रहे हैं, बल्कि उनकी 15 वर्षों तक की देखभाल की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

जलीय जैव विविधता पर प्रभाव: डॉल्फिन की वापसी

पानी की गुणवत्ता सुधरने का सबसे बड़ा प्रमाण ‘गंगा डॉल्फिन’ की बढ़ती संख्या है। जब पानी में प्रदूषण कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, तो मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या में वृद्धि होती है। बिहार के सुल्तानगंज से लेकर कहलगाम तक के क्षेत्र में अब डॉल्फिन का दिखना आम बात हो गई है, जो इस बात का सबूत है कि नदी का इकोसिस्टम फिर से जीवित हो रहा है।

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चुनौतियाँ अभी भी बरकरार: कोलिफॉर्म का मुद्दा

भले ही पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन BSPCB की रिपोर्ट यह भी आगाह करती है कि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ और ‘टोटल कोलिफॉर्म’ का स्तर अभी भी कुछ घाटों पर मानक से अधिक है। इसका मुख्य कारण कुछ छोटे नालों का अब भी सीधे नदी में गिरना और घाटों पर होने वाली मानवीय गतिविधियां हैं। बोर्ड का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य के सभी 58 स्वीकृत प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे, यह समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

क्या आपको लगता है कि आपके शहर के पास गंगा के घाट अब पहले से ज्यादा स्वच्छ दिख रहे हैं? हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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