1 फरवरी को जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश किया, उम्मीद थी कि बाजार झूमेगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। सेंसेक्स और निफ्टी ने गोता लगा दिया और सोने-चांदी के भाव ऐसे गिरे जैसे किसी ने आसमान से पत्थर फेंक दिया हो। आम आदमी और छोटे निवेशक (Retail Investors) डरे हुए हैं। हर किसी के मन में बस एक ही सवाल है— “आखिर बजट तो आ गया, फिर ये भारी गिरावट क्यों?”
क्या यह डरने का वक्त है या खरीदारी का? आज हम इस गिरावट का गहरा विश्लेषण (Deep Analysis) करेंगे और आपको बताएंगे वो 3 बड़े कारण जो इस ‘खून-खराबे’ (Blood Bath) के जिम्मेदार हैं।
सोना-चांदी क्यों गिरा? (यह ‘बुरी’ नहीं, ‘अच्छी’ खबर है)
सबसे पहले बात करते हैं गोल्ड और सिल्वर की, जिनके दाम में भारी गिरावट आई है। लोग सोच रहे हैं कि सोने की वैल्यू कम हो गई, लेकिन सच कुछ और है। कस्टम ड्यूटी में कटौती (Customs Duty Cut): बजट 2026 में सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (Import Tax) को घटा दिया है। जब टैक्स कम होता है, तो चीज़ें सस्ती होती हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेश से खरीदता है। जैसे ही टैक्स कम हुआ, सोने की कीमत अपने आप 4,000 से 5,000 रुपये तक गिर गई।
सरल भाषा में यह गिरावट इसलिए नहीं है कि लोग सोना बेच रहे हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि सरकार ने इसे सस्ता कर दिया है। जिनके पास पहले से सोना था, उन्हें वैल्यू कम लग रही है, लेकिन जो अब खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह लॉटरी है।

शेयर बाजार क्यों क्रैश हुआ? (The Stock Market Crash)
शेयर बाजार का गिरना थोड़ा चिंताजनक है। इसके पीछे बजट से जुड़ी दो बड़ी निराशाएं हैं।
पहला कारण: कैपिटल गेन्स टैक्स का डर (Capital Gains Tax Hike)
शेयर बाजार के निवेशकों को सबसे ज्यादा डर ‘टैक्स’ से लगता है। इस बजट में सरकार ने शेयर बाजार से होने वाली कमाई पर टैक्स (STCG और LTCG) को थोड़ा बढ़ा दिया है। बाजार को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। निवेशकों को लगा कि अब उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सरकार ले जाएगी। इसी गुस्से और डर में बड़े निवेशकों (FIIs) ने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे बाजार धड़ाम से नीचे आ गया।
दूसरा कारण: मिडिल क्लास की ‘जेब’ खाली रह गई
शेयर बाजार चलता है कंपनियों के मुनाफे से। और कंपनियां मुनाफा तब कमाती हैं जब मिडिल क्लास सामान खरीदता है। बाजार को उम्मीद थी कि सरकार मिडिल क्लास को टैक्स में बड़ी छूट देगी, जिससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा और वो खरीदारी करेंगे। लेकिन बजट में टैक्स स्लैब में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इससे यह संदेश गया कि अगले एक साल तक डिमांड (Demand) कम रह सकती है। इसलिए FMCG और ऑटो सेक्टर के शेयर टूट गए।

‘ओवरवैल्यूएशन’ का गुब्बारा फूटना था
बजट तो बस एक बहाना था, सच्चाई यह है कि भारतीय बाजार पहले से ही बहुत महंगा(Overvalued) हो चुका था।
- गुब्बारा: पिछले 6 महीनों से मार्केट लगातार ऊपर जा रहा था, बिना किसी ठोस कारण के। हर शेयर अपनी असली कीमत से दोगुने-तिगुने दाम पर बिक रहा था।
- सुई: बजट ने बस उस गुब्बारे में सुई चुभाने का काम किया। बड़े निवेशक (Big Bulls) बस एक मौके की तलाश में थे कि कब प्रॉफिट बुक करें और निकल जाएं। बजट की थोड़ी सी निराशा ने उन्हें यह मौका दे दिया।
अब आपको क्या करना चाहिए? (ApniVani की सलाह)
बाजार में जब भी खून-खराबा होता है, समझदार निवेशक घबराते नहीं हैं।
- सोना-चांदी: अगर आप शादी-ब्याह के लिए जेवर बनवाना चाहते थे, तो यह खरीदारी का बेस्ट टाइम है। ड्यूटी कम होने का फायदा उठाएं।
- शेयर बाजार: अगर आप लम्बे समय (Long Term) के खिलाडी हैं, तो अपनी SIP बंद न करें। जब बाजार गिरता है, तो आपको कम दाम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।
- पैनिक सेलिंग: डरकर अपना पोर्टफोलियो खाली न करें। बजट का असर 1-2 हफ्ते में खत्म हो जाएगा और बाजार फिर अपनी चाल पकड़ लेगा।
क्या ये हमेशा के लिए है ?
यह गिरावट स्थायी (Permanent) नहीं है। यह बस एक ‘करेक्शन’ है जो बाजार की सेहत के लिए जरूरी था।
आपकी राय: क्या आपने इस गिरावट में खरीदारी की या डर के मारे अपने शेयर बेच दिए? कमेंट करके हमें जरूर बताएं!