सूरत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 21 करोड़ की पानी की टंकी: उद्घाटन से पहले ही हुआ बड़ा हादसा

सूरत

गुजरात के सूरत जिले से भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ 21 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी एक पानी की टंकी उद्घाटन से पहले ही ताश के पत्तों की तरह ढह गई। यह घटना न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी है, बल्कि निर्माण कार्य में हुई भारी अनियमितताओं का जीता-जागता प्रमाण भी है।

हादसे का पूरा विवरण

यह घटना 19 जनवरी 2026 को सूरत के मांडवी तालुका के तड़केश्वर गांव में हुई। यहाँ ‘गाय पाक पानी सन्याल योजना’ के तहत 11 लाख लीटर क्षमता वाली और 15 मीटर ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया गया था।

सूरत में भ्रष्टाचार

जब योजना के तहत टंकी की टेस्टिंग (परीक्षण) की जा रही थी, तब उसमें 9 लाख लीटर पानी भरते ही पूरी संरचना भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला समेत तीन मजदूर घायल हो गए। यह टंकी क्षेत्र के लगभग 33-14 गांवों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए बनाई गई थी, जिसका ग्रामीण पिछले तीन वर्षों से इंतजार कर रहे थे।

भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के संकेत

घटनास्थल पर बिखरे मलबे की शुरुआती जांच ही भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। मलबे में सीमेंट की परतें हाथों से ही उखड़ रही हैं, जो सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की ओर इशारा करती हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि:

• ठेकेदार ने लोहे (सरिया) और सीमेंट की गुणवत्ता में भारी कटौती की।

• 21 करोड़ रुपये के बड़े बजट के बावजूद निर्माण मानकों का पालन नहीं किया गया।

• अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग किया गया।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं:

• निलंबन: डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जय चौधरी को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है।

• भुगतान पर रोक: संबंधित ठेकेदार एजेंसी के सभी भुगतान रोक दिए गए हैं।

• नोटिस: PMC मार्स प्लानिंग और अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

• तकनीकी जांच: SVNIT सूरत की टीम, GERI और विजिलेंस विभाग के साथ मिलकर सैंपल की जांच कर रही है ताकि तकनीकी कमियों का पता लगाया जा सके।

21 करोड़ की पानी की टंकी

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने गुजरात की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। विपक्ष (कांग्रेस) ने सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए इसे “भ्रष्टाचार का मॉडल” करार दिया है। वहीं, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह टंकी उद्घाटन के बाद गिरती, तो सैकड़ों मासूमों की जान जा सकती थी। वर्तमान में दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग जोर पकड़ रही है।

यह हादसा विकास के दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। जहां एक तरफ अहमदाबाद में 70 साल पुरानी टंकियों को गिराने के लिए भारी मशीनों की जरूरत पड़ती है, वहीं 21 करोड़ की यह नई टंकी अपना वजन भी नहीं सह पाई। भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए पारदर्शी टेंडरिंग, सख्त थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करना समय की मांग है।

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