Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas 2025: आस्था की स्वतंत्रता के लिए अंतिम बलिदान

Guru Tegh Bahadur

History That Still Shakes Empires — धर्म के लिए स्वयं को कुर्बान करने वाला अद्वितीय बलिदान 24 नवंबर 2025 को भारत और पूरी दुनिया Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas को कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ मना रही है।

9वें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब ने वर्ष 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक पर अपने प्राण त्याग दिए — धर्म, स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए। मुगल शासक औरंगज़ेब की जबरन धर्म-परिवर्तन नीतियों के खिलाफ उन्होंने कश्मीरी हिंदुओं, नानकपंथियों और निर्बलों के अधिकारों के लिए स्वयं को समर्पित किया।

इसलिए उन्हें “Hind Di Chadar / Dharma Ki Chadar” कहा जाता है — वह ढाल जिसने पूरी सभ्यता को बचाया।

Nationwide Tributes —

  • गुरुद्वारों से लेकर सोशल मीडिया तक, भक्ति और सम्मान की गूंज
  • शहीदी दिवस पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं:-
  • सीस गंज साहिब (दिल्ली) – अखंड पाठ, अरदास, शबद-कीर्तन
  • अमृतसर, आनंदपुर साहिब, पटना साहिब – प्रभातफेरी, कीर्तन दरबार, लंगर सेवा
  • स्कूलों में secularism और religious freedom पर जागरूकता कार्यक्रम
  • SGPC, DSGMC और सिख धर्मगुरुओं द्वारा विशेष संदेश
  • सोशल मीडिया पर #GuruTeghBahadur और #HindDiChadar ट्रेंड
  • Guru Tegh Bahadur

हर जगह एक ही संदेश —

  • धर्म की आज़ादी किसी एक धर्म की नहीं, पूरी मानवता की जीत है।
  • आधुनिक भारत के लिए गुरु साहिब का संदेश
  • गुरु तेग बहादुर जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि:

Freedom of Faith is a fundamental human right

  • डर को त्यागो और सही के लिए खड़े होओ
  • धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता ही समाज की असली शक्ति है
  • उनकी शहादत आधुनिक भारत में इंसाफ, सह-अस्तित्व और मानवता का मार्गदर्शन करती है।

Their Sacrifice Is Not History, It Is a Guiding Light

आज का शहीदी दिवस सिर्फ़ एक स्मृति नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि जब अन्याय बढ़े, तब आवाज़ भी बुलंद होनी चाहिए। गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान दुनिया की सबसे महान कुर्बानियों में से एक है — “A global symbol of courage and freedom of conscience.”

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