अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई

जावेद अहमद

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब एजेंसी ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़े एक बड़े मामले की जांच कर रही थी, जिसमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम लगातार सामने आ रहा था।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

ईडी ने जावेद सिद्दीकी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने अल-फलाह समूह से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की और मौके से मिले दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों तथा वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की। इन सबूतों में कथित रूप से संदिग्ध फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े निशान पाए गए थे।

जावेद अहमद

क्यों आई यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में?

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थी। जांच तब तीव्र हुई जब पता चला कि विश्वविद्यालय के कई फैकल्टी सदस्य एक ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने के शक में चिन्हित किए गए हैं।
इससे पहले, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मुजम्मिल शकील को विस्फोटक, हथियार और बम बनाने के उपकरण रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद ईडी और अन्य एजेंसियों ने विश्वविद्यालय तथा उससे जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की गहराई से जांच शुरू की।

जावेद अहमद

क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि सिद्दीकी और उनकी संस्था से जुड़े कुछ व्यक्तियों ने अवैध फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को छुपाने की कोशिश की।
ईडी के अनुसार, सिद्दीकी की यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन कई जगह संदिग्ध पाए गए।
आतंकी मॉड्यूल मामले में सामने आए लिंक ने जांच को और मजबूत कर दिया।

आगे क्या?

ईडी सिद्दीकी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में है कि मनी लॉन्ड्रिंग में और कौन शामिल था। साथ ही, एजेंसी उन पैसों के फ्लो का भी पता लगाएगी, जिनके बारे में शक है कि उनका इस्तेमाल गलत गतिविधियों में किया गया।

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