Dharamshala Ragging Horror: 19 साल की पल्लवी की दर्दनाक मौत, 3 सीनियर छात्राओं पर आरोप! क्या बेटियां भी हो रही हैं इतनी क्रूर?

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कॉलेज को हम शिक्षा का मंदिर मानते हैं, जहाँ बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर जाते हैं। लेकिन जब यही मंदिर किसी मासूम के लिए “मौत का घर” बन जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के खूबसूरत शहर धर्मशाला से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता का दिल दहला दिया है। Govt Degree College, Dharamshala की 19 वर्षीय छात्रा पल्लवी अब हमारे बीच नहीं रही।

आरोप है कि पल्लवी की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि Ragging के नाम पर दिए गए मानसिक और शारीरिक टॉर्चर की वजह से हुई है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसे सताने वाले कोई लड़के नहीं, बल्कि उसकी ही अपनी सीनियर ‘दीदी’ (Senior Girls) थीं।

आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की पूरी सच्चाई और उठाएंगे वो सवाल जिससे समाज नजरें चुरा रहा है—क्या लड़कियां भी अब संवेदना खोकर क्रूर होती जा रही हैं?

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2 महीने का वो दर्दनाक सफर (The Incident)

पल्लवी, जो अपने परिवार की लाडली थी, बड़े अरमानों के साथ धर्मशाला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में पढ़ने गई थी। लेकिन उसे नहीं पता था कि वहां उसका सामना शिक्षा से पहले खौफ से होगा।

रिपोर्ट्स और परिजनों के आरोपों के मुताबिक, पल्लवी के साथ कॉलेज में उसकी तीन सीनियर छात्राओं—हर्षिता (Harshita), आकृति (Aakriti) और कोमोलिका (Komolika)—ने रैगिंग की थी।

यह घटना करीब दो महीने पहले की बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि रैगिंग के दौरान पल्लवी को इतना गहरा सदमा (Trauma) लगा कि वह बीमार पड़ गई। दो महीने तक वह जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही, लेकिन अंत में यह जंग हार गई और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया।

रैगिंग या टॉर्चर? (Details of Allegations)

रैगिंग के नाम पर सिर्फ परिचय (Introduction) नहीं होता। कई बार यह ‘Intro’ कब ‘Insult’ और ‘Torture’ में बदल जाता है, पता ही नहीं चलता।

पल्लवी के मामले में भी आरोप है कि सीनियर छात्राओं ने उसे मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया।

उसे डराया-धमकाया गया।

ऐसे काम करने पर मजबूर किया गया जिससे उसकी आत्म-सम्मान (Self-respect) को ठेस पहुंची।

इस घटना ने पल्लवी के दिमाग पर इतना गहरा असर डाला कि वह डिप्रेशन में चली गई और उसकी शारीरिक हालत भी बिगड़ती गई।

बेटियां क्यों बन रही हैं इतनी पत्थर-दिल? (A alarming trend)

आमतौर पर हम सुनते हैं कि “लड़के शैतान होते हैं” या रैगिंग में लड़कों का ग्रुप ज्यादा आक्रामक होता है। लेकिन पल्लवी का केस समाज के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) है।

आरोपी छात्राओं—हर्षिता, आकृति और कोमोलिका—ने जिस तरह एक जूनियर लड़की के साथ व्यवहार किया, वह दिखाता है कि संवेदनहीनता (Insensitivity) का जेंडर से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या ‘कूल’ दिखने की होड़ में लड़कियां अपनी ममता और दया भूल रही हैं?

क्या सीनियर होने का पावर लड़कियों को भी “बुली” (Bully) बना रहा है?

“Women Support Women” का नारा देने वाला समाज आज यह देखकर सन्न है कि एक लड़की ही दूसरी लड़की की मौत की वजह बन गई।

कानून और पुलिस की कार्रवाई (Police Action)

पल्लवी की मौत के बाद पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

रैगिंग (Ragging) भारत में एक दंडनीय अपराध है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की गाइडलाइंस के मुताबिक:

अगर रैगिंग साबित होती है, तो आरोपी छात्रों को कॉलेज से निकाला जा सकता है।

उन्हें सरकारी नौकरी मिलने में भी दिक्कत आ सकती है।

IPC की गंभीर धाराओं के तहत जेल की सजा भी हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश में वैसे भी रैगिंग के खिलाफ सख्त कानून हैं (आपको ‘अमन काचरू’ केस याद होगा), लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

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कॉलेज प्रशासन पर उठते सवाल

इस पूरी घटना में कॉलेज प्रशासन (College Administration) भी सवालों के घेरे में है।

क्या कॉलेज में Anti-Ragging Committee सक्रिय थी?

जब दो महीने पहले घटना हुई, तो क्या किसी ने पल्लवी की सुध ली?

सीनियर छात्राओं पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

अगर समय रहते कॉलेज प्रशासन जाग जाता, तो शायद आज पल्लवी जिंदा होती।

सवाल?

19 साल की पल्लवी तो चली गई, लेकिन वह अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है। यह सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं है, यह उस भरोसे की मौत है जो एक माता-पिता सिस्टम पर करते हैं।

हर्षिता, आकृति और कोमोलिका जैसे छात्रों को (अगर दोषी साबित हों) ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बने। साथ ही, हमें यह भी सोचना होगा कि हम अपनी बेटियों को कैसी शिक्षा दे रहे हैं—सिर्फ डिग्रियां या इंसानियत भी?

पल्लवी को इंसाफ दिलाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। रैगिंग ‘मजाक’ नहीं, ‘अपराध’ है!

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