केंद्र सरकार ने आज 25 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केरल राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम‘ करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। यह निर्णय मलयालम भाषा के मूल स्वरूप को बहाल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जहां राज्य को सदियों से ‘केरलम’ कहा जाता रहा है। केरल विधानसभा के प्रस्ताव को गृह मंत्रालय ने स्वीकृति दी, जो संघीय ढांचे में राज्यों की भाषाई आकांक्षाओं का सम्मान करता है। यह खबर न केवल दक्षिण भारत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करेगी।
केरल नाम बदलाव का पूरा इतिहास

केरल नाम बदलाव की मांग 2010 से चली आ रही थी, जब मलयालम साहित्यकारों और भाषाविदों ने अंग्रेजी प्रभाव वाले ‘केरल’ उच्चारण पर सवाल उठाए। मलयालम में ‘म’ ध्वनि राज्य के प्राचीन नाम ‘चेेरम’ से जुड़ी है, जो तमिल-मलयालम मिश्रण दर्शाता है। 2024 में केरल विधानसभा ने 100% बहुमति से प्रस्ताव पास किया। केंद्र ने भाषाई विशेषज्ञों, सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड्स और जनमत सर्वेक्षण के बाद 25 फरवरी 2026 को अंतिम मंजूरी दी। यह ओडिशा के ‘ओडिशा’ से ‘उत्कल’ और तमिलनाडु के नाम सुधार जैसे पूर्व मामलों की याद दिलाता है।
मलयालम भाषा को क्यों मिला प्राथमिकता?
‘केरलम’ नाम मलयालम के ‘കേരളം’ उच्चारण से सीधा मेल खाता है, जिसका अर्थ ‘नारियल भूमि’ है। यह बदलाव सरकारी दस्तावेजों, पासपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर लागू होगा। UNESCO की रिपोर्ट्स के अनुसार, भाषाई शुद्धता सांस्कृतिक संरक्षण में 30% वृद्धि लाती है। केरलम से मलयालम शिक्षा और साहित्य को बढ़ावा मिलेगा, युवा पीढ़ी भाषा से जुड़ेगी। पर्यटन में भी फायदा: ‘केरलम’ ब्रांड अधिक प्रामाणिक लगेगा, जिससे 2026 में 10% अधिक पर्यटक आकर्षित हो सकते हैं।
केंद्र सरकार की भूमिका और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का यह फैसला ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ विजन का हिस्सा है, जो स्थानीय संस्कृतियों को बढ़ावा देता है। गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, “भाषाई गौरव का सम्मान ही राष्ट्र निर्माण है।” केरल की LDF सरकार ने इसे ‘ऐतिहासिक विजय’ बताया, जबकि विपक्षी कांग्रेस ने बधाई दी लेकिन श्रेय लेने की कोशिश की। BJP ने इसे दक्षिण नीति की सफलता कहा। यह फैसला महाराष्ट्र (मुंबई को मुंबादेव) और कर्नाटक की मांगों को प्रेरित कर सकता है।

केरलम नाम से क्या बदलेगा? कार्यान्वयन प्लान
नाम बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। Google Maps, Apple Maps और IRCTC जैसी ऐप्स अपडेट होंगी। शिक्षा मंत्रालय स्कूल किताबों में बदलाव करेगा। आर्थिक प्रभाव: राज्य का निर्यात ब्रांड ‘केरलम स्पाइसेस’ मजबूत होगा। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, यह स्थानीय इको-टूरिज्म को 15% बढ़ावा देगा। चुनौतियां: अंतरराष्ट्रीय संधियों में संशोधन, लेकिन केंद्र ने 6 महीने का समय दिया है। कुल मिलाकर, केरलम भारत की भाषाई विविधता का नया अध्याय खोलेगा।
केरलम नाम मंजूरी सांस्कृतिक जागरण की मिसाल है। यह दिखाता है कि केंद्र-राज्य सहयोग से असंभव संभव होता है।